जयपुर: राजस्थान में पंचायत व निकाय चुनाव पर बड़ा बयान, सियासत तेज….
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासत गर्म है। UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किए राज्य में किसी भी प्रकार का चुनाव संभव नहीं है। कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए मंत्री ने चुनाव देरी की असली वजहों को भी सामने रखा।
‘OBC आरक्षण के बिना चुनाव असंभव’ : UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा
सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ दौरे पर पहुंचे नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मंगलवार को बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि ओबीसी आरक्षण के बिना राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव कराना बिल्कुल संभव नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे, इसको लेकर राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है।
सरकार का स्टैंड साफ — ‘चुनाव एक साथ होंगे, प्रक्रियाएं पूरी होनी जरूरी’
मंत्री खर्रा ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए चुनाव प्रक्रिया में देरी की असली वजह बताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने सितंबर में ही चुनाव से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, लेकिन दो अहम प्रक्रियाएं अभी अधूरी हैं—
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा ओबीसी आबादी के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया
राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाता सूची को अंतिम रूप देना
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दोनों प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही पंचायत और नगरीय निकाय दोनों के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे।
कांग्रेस पर हमला — ‘बिना ओबीसी आरक्षण चुनाव चाहती है कांग्रेस’
इस दौरान मंत्री खर्रा ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चाहती है कि ओबीसी आरक्षण के बिना ही चुनाव संपन्न करा दिए जाएं। लेकिन बीजेपी सरकार संविधान के अनुसार पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव कराने के पक्ष में है, चाहे इसमें थोड़ा समय क्यों न लग जाए।
विश्लेषण — राजस्थान में OBC राजनीति ने बढ़ाया चुनावी तनाव
UDH मंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि राजस्थान में ओबीसी आरक्षण आने वाले पंचायत व निकाय चुनावों की प्राथमिक शर्त बन चुका है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
यदि रिपोर्ट में देरी होती है तो चुनाव भी आगे खिसक सकते हैं।
सरकार ने चुनाव एक साथ कराने का संकेत देकर प्रशासनिक तैयारी और राजनीतिक रणनीति दोनों स्पष्ट कर दी हैं।
कुल मिलाकर, ओबीसी आरक्षण का मुद्दा अब राजस्थान की स्थानीय चुनाव राजनीति का केंद्र बन चुका है और आने वाले दिनों में यह सियासी घमासान और तेज कर सकता है।