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CIA के पूर्व अधिकारी का बड़ा दावा: पाकिस्तान के परमाणु राज वर्षों तक बिकते रहे, ए.क्यू. खान थे नेटवर्क के केंद्र में…..

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पूर्व ऑपरेशंस चीफ़ जेम्स लॉलर ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा ऐसा खुलासा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी है। लॉलर का दावा है कि पाकिस्तान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान गुप्त रूप से कई देशों को परमाणु तकनीक और गोपनीय जानकारियाँ बेच रहे थे — और जब यह बात तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ को बताई गई, तो उनकी प्रतिक्रिया हैरान करने वाली थी।

🔶 पाकिस्तान का ‘परमाणु जनक’ अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चलाता था — बड़ा आरोप

जेम्स लॉलर के अनुसार, CIA के पास ऐसे ठोस सबूत थे कि ए.क्यू. खान ने न सिर्फ परमाणु तकनीक साझा की, बल्कि इसे कई देशों तक पहुँचाया।
यह दावा पाकिस्तान के परमाणु ढांचे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और दिखाता है कि रणनीतिक क्षमता कैसे निजी हाथों में खतरनाक रूप से फिसल सकती है।

🔶 मुशर्रफ को जब दिए गए सबूत — ‘मैं उसे मार डालूंगा’ वाली प्रतिक्रिया

लॉलर ने बताया कि जब उन्होंने परवेज़ मुशर्रफ को यह जानकारी दी कि खान लीबिया सहित कई देशों को परमाणु रहस्य दे रहा है, तो मुशर्रफ ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा— “मैं उसे मार डालूंगा।”
इसके बाद खान को कई वर्षों तक नजरबंद रखा गया।
यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि पाकिस्तान की राजनीतिक-सैन्य व्यवस्था इस मुद्दे पर कितनी असहज और असुरक्षित महसूस कर रही थी।

🔶 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना संकट: प्रसार का सबसे खतरनाक नेटवर्क

ए.क्यू. खान पर पहले भी ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया के साथ तकनीक साझा करने के आरोप लगे थे। यह नेटवर्क कभी वैश्विक परमाणु सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना गया।
परमाणु तकनीक का अनियंत्रित प्रसार अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति को अस्थिर कर सकता है और आतंकवाद समर्थित देशों के लिए भी रास्ते खोल सकता है।

🔶 अमेरिका–पाकिस्तान रिश्तों में तनाव का कारण बना पूरा मामला

लॉलर ने बताया कि यह खुलासा उस दौर में अमेरिका–पाकिस्तान संबंधों में बड़ी कड़वाहट की वजह बना। वॉशिंगटन ने इसे वैश्विक सुरक्षा के खिलाफ सीधी चुनौती के रूप में देखा।
विश्लेषण: पाकिस्तान की रणनीतिक अहमियत के बावजूद, परमाणु प्रसार के कारण अमेरिका की विश्वसनीयता संबंधी चिंताएँ लगातार बढ़ीं।

🔶 खान का विवादित सफर: स्वीकारोक्ति, नजरबंदी और उलटे आरोप

2004 में खान को घरेलू नजरबंदी में रखा गया। उन्होंने नेटवर्क में अपनी भूमिका मानी, लेकिन बाद में दावा किया कि उन्हें मुशर्रफ और बेनजीर भुट्टो ने मजबूर किया था।
यह बयान न सिर्फ घरेलू राजनीतिक संघर्ष दिखाता है बल्कि पाकिस्तान के परमाणु फैसलों में पारदर्शिता की कमी को भी उजागर करता है।

🔶 विवादों के बावजूद पाकिस्तान में ‘राष्ट्रीय नायक’

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलने के बावजूद पाकिस्तानी जनता के बीच खान को एक “परमाणु नायक” के रूप में सम्मानित किया जाता रहा। उन्हें देश का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान भी मिला।
यह पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को दर्शाता है, जहाँ रणनीतिक हथियारों को सुरक्षा से अधिक भावनाओं से जोड़ा जाता है।

🔶वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर बड़ा सवाल

लॉलर के खुलासे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या दुनिया में परमाणु तकनीक सचमुच सुरक्षित हाथों में है। ए.क्यू. खान नेटवर्क का इतिहास दिखाता है कि एक ही व्यक्ति की पहुँच से वैश्विक सुरक्षा तंत्र कितना डांवाडोल हो सकता है।

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