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महाराष्ट्र”वोट के बदले फंड” बयान पर महाराष्ट्र की सियासत गरमाई…

नगर पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विवादित बयान— “हमें चुनोगे तो फंड मिलेगा, नहीं तो मैं भी नकार दूंगा”— ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सत्ता पक्ष सफाई दे रहा है, तो विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला बता रहा है। ताज़ा प्रतिक्रियाओं ने पूरे मुद्दे को चुनावी मंच से उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता की बहस तक पहुंचा दिया है।

फडणवीस की सफाई | “भेदभाव का इरादा नहीं, सिर्फ चुनावी बयानबाज़ी”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार की टिप्पणी को लेकर कहा कि इसे भेदभावपूर्ण इरादे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फडणवीस के मुताबिक—

>चुनावी भाषणों में कई बातें आवेग में निकल जाती हैं

>इसका वास्तविक मतलब वही नहीं होता जो शब्दों में सुनाई देता है

>महायुति सरकार सभी क्षेत्रों के बराबर विकास के लिए प्रतिबद्ध है

>उन्होंने दावा किया कि किसी भी क्षेत्र को राजनीतिक आधार पर फंड से वंचित नहीं किया जाएगा।

फडणवीस इस विवाद को चुनावी बयानबाज़ी तक सीमित रखकर राजनीतिक नुकसान से बचाना चाहते हैं। सरकार की “समान विकास” की लाइन दोहराने का उद्देश्य विपक्ष के आरोपों को कमजोर करना है।

अजित पवार का बयान | “18 उम्मीदवार जिताओ, फंड की कमी नहीं होगी”

नगर पंचायत चुनाव प्रचार में अजित पवार ने कहा था—
“अगर आप हमारे 18 उम्मीदवारों को जीताएंगे तो फंड की कमी नहीं पड़ेगी… और अगर आप हमें नकारेंगे, तो मैं भी नकार दूंगा।”

इस बयान को विपक्ष खुलेआम धमकी और भेदभावपूर्ण राजनीति बता रहा है।

ऐसे बयान चुनाव आयोग की गाइडलाइन के दायरे में आते हैं, जहां किसी भी प्रत्याशी को वोट के बदले सरकारी लाभ की सौदेबाज़ी प्रतिबंधित है। इसीलिए विपक्ष इसे मुद्दा बनाने में आक्रामक हो गया है।

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