राजस्थान कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: सोशल इंजीनियरिंग मॉडल पर 45 नए जिलाध्यक्ष, जयपुर सहित 4 जिलों की सूची रोकी गई…
राजस्थान कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत बड़ा बदलाव सामने आया है। राहुल गांधी के ‘ड्रीम ऑर्गेनाइजेशन मॉडल’ को आगे बढ़ाते हुए पार्टी ने 45 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। यह सिर्फ पदों का वितरण नहीं, बल्कि आगामी निकाय और पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई सोशल इंजीनियरिंग की नई रणनीति मानी जा रही है। जबकि जयपुर शहर समेत 4 जिलों की घोषणा रोक कर हाईकमान ने अलग ही सियासी संदेश दे दिया है।
संगठन सृजन अभियान का बड़ा चरण जारी
कांग्रेस हाईकमान ने शनिवार देर रात राजस्थान में 45 जिलाध्यक्षों के नाम अंतिम कर दिए। ये नियुक्तियां राहुल गांधी के संगठन सुधार अभियान की दूसरी बड़ी लिस्ट मानी जा रही हैं, जिसका मकसद युवा नेतृत्व, जमीनी कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को आगे लाना है।
इसका सबसे बड़ा संकेत यह है कि कई जिलों में पुराने समीकरण तोड़कर नए चेहरे सामने लाए गए हैं।
जयपुर समेत 4 जिलों की घोषणा रोकी – संदेश क्या?
जयपुर शहर, प्रतापगढ़, राजसमंद और झालावाड़–बारां जिलाध्यक्षों की घोषणा रोक दी गई है।
यह रोक सीधे तौर पर दर्शाती है कि इन जिलों में factionalism और caste-equation को लेकर अंतिम निर्णय पर पार्टी सर्वसम्मति नहीं बना पाई है।
सूत्रों के अनुसार, इन जिलों के लिए हाईकमान खुद अंतिम पैनल पर काम कर रहा है।
विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी – चुनावों का सीधा कनेक्शन
जारी सूची में 12 मौजूदा विधायक, 2 पूर्व मंत्री, 3 पूर्व विधायक को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
यह संकेत देता है कि कांग्रेस अब संगठन को चुनावी मोड में ले जा रही है, जहाँ विधायक सीधे जिला स्तर की राजनीति को संभालेंगे और निकाय–पंचायत चुनावों में परिणाम तय करने की भूमिका निभाएंगे।
यह प्रयोग राजस्थान में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर किया गया है।
सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला – 7 महिला जिलाध्यक्ष भी शामिल
कांग्रेस ने इस बार जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ-साथ महिला भागीदारी पर भी फोकस किया है।
लिस्ट में 7 महिलाओं को जिलाध्यक्ष बनाना यह दर्शाता है कि पार्टी महिला नेतृत्व को संगठन के शीर्ष स्तर में ज्यादा स्पेस देना चाहती है।
युवा + महिला + जातीय संतुलन— यही नई लिस्ट की सबसे बड़ी विशेषता मानी जा रही है।
तीन जिलाध्यक्ष रिपीट – बेहतर परफॉर्मेंस का इनाम
पार्टी ने तीन जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका दिया है।
यह स्पष्ट संकेत है कि परफॉर्मेंस-आधारित मॉडल पर संगठन आगे बढ़ रहा है।
जहां कार्यकर्ताओं को संदेश दिया गया है कि अच्छा काम करो, पद अपने आप टिके रहेंगे।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज – आखिर इतने विधायकों को क्यों?
12 विधायकों को जिलाध्यक्ष बनाने पर प्रदेश राजनीति में बहस तेज है।
कुछ लोग इसे कांग्रेस की मजबूरी मान रहे हैं, तो कुछ इसे मजबूत रणनीति।
दरअसल, विपक्ष में रहते हुए पार्टी चाहती है कि विधायकों की पकड़ सीधे जिला संगठन तक रहे, ताकि चुनावी मशीनरी मजबूत हो सके।
आने वाले चुनावों की तैयारी का ब्लूप्रिंट?
सूत्र बताते हैं कि यह लिस्ट सिर्फ शुरुआत है।
कांग्रेस निकाय और पंचायत चुनावों में पूरी एकजुटता और वर्गीय संतुलन के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।
इसलिए संगठन में बड़े और साहसी निर्णय लिए गए हैं।
राजस्थान कांग्रेस की नई जिलाध्यक्षों की यह सूची सिर्फ एक संगठनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि 2025 के स्थानीय चुनावों और 2028 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई रणनीतिक रोडमैप का हिस्सा है।
जयपुर समेत 4 जिलों की सूची रोक कर हाईकमान ने संकेत दे दिया है कि आगे और भी अहम निर्णय आने वाले हैं।