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एनडीए में जाना चाहती थी, पर अंगदान कर बन गई मिसाल — 16 साल की कनिष्का ने लिवर-किडनी देकर तीन को नया जीवन दिया…

“जोधपुर की 16 वर्षीय कनिष्का गौड़ ने जीवन के अंतिम पड़ाव में वह कर दिखाया, जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। एनडीए में जाकर देश की सेवा करने का सपना भले ही अधूरा रह गया, लेकिन अंगदान कर उन्होंने मानवता की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसे देश हमेशा याद रखेगा। कनिष्का ने अपने लिवर और दोनों किडनी दान कर तीन ज़िंदगियों को नया जीवन दिया।”

सबसे कम उम्र की अंगदानी — जोधपुर की 16 वर्षीय कनिष्का ने रचा इतिहास

जोधपुर की झालामंड बाबू नगर निवासी कनिष्का गौड़ (16) ने अंगदान कर ऐसा उदाहरण पेश किया, जो पूरे प्रदेश में प्रेरणा बन गया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद 21 नवंबर को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। परिवार ने साहसिक निर्णय लेते हुए उनका लिवर और दोनों किडनी दान करने का फैसला किया।
यह एम्स जोधपुर में पहली बार किसी किशोरी के अंगदान का मामला है।

एम्स जोधपुर में अंगों का आवंटन — एक किडनी जयपुर के एसएमएस अस्पताल भेजी गई

कनिष्का का इलाज सबसे पहले डॉ. डेजी खेड़ा ने शुरू किया। सोटो, रोटो और नोटो के समन्वय से अंगों का आवंटन किया गया, जिसमें—

एक किडनी: एसएमएस अस्पताल, जयपुर

लिवर और दूसरी किडनी: एम्स, जोधपुर

ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने मिलकर ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया, जिससे किडनी मात्र 4.5 घंटे में जयपुर पहुंचाई जा सकी।

“बेटी कहीं तो जिंदा रहेगी” — माता-पिता का साहस भरा फैसला

कनिष्का के पिता अशोक गौड़ और मां संगीता गौड़ ने कहा कि
“बेटी एनडीए में जाना चाहती थी, देश सेवा का जज्बा था। आज उसके अंग किसी और के शरीर में धड़केंगे… यही हमारी ताकत बना।”
बेटी का सपना भले अपूर्ण रह गया, लेकिन अंगदान के जरिए उन्होंने मानव सेवा को सर्वोच्च रूप दे दिया।

जोधपुर संभाग में अंगदान सुविधा सिर्फ एम्स में उपलब्ध है। अब तक 9 दाताओं से 24 अंग प्राप्त किए गए हैं।

कनिष्का का ‘अधूरा सपना’ और ‘पूरी हुई विरासत’

एनडीए में जाकर देश सेवा करना कनिष्का का लक्ष्य था, लेकिन जीवन ने मौका नहीं दिया।
फिर भी उनके दान किए गए अंग आज तीन परिवारों के लिए नई उम्मीद बन चुके हैं।
कनिष्का ने अपने कार्य से साबित कर दिया कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म है।

कनिष्का भले ही कम उम्र में दुनिया छोड़ गईं, लेकिन उनका साहस, परिवार का निर्णय और अंगदान की महत्ता समाज को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
उनकी कहानी बताती है—
“हीरो बनने के लिए उम्र नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए।”

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