दिल्ली दंगा केस: SC आज देगा बड़ा फैसला, शरजील-खालिद की जमानत पर पुलिस ने जताया कड़ा विरोध…..
सुप्रीम कोर्ट आज 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े छात्र नेताओं—उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा-उर-रहमान—की जमानत याचिकाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय सुना सकता है। ये सभी आरोपी करीब साढ़े पांच साल से UAPA के तहत जेल में बंद हैं। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में साफ संकेत दे दिया है कि वह किसी भी आरोपी को जमानत देने के पक्ष में नहीं है।
दंगों की पृष्ठभूमि: 59 मौतें और 530 से ज्यादा घायल
फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में 59 लोगों की जान गई थी, जिनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल था। 530 से अधिक लोग घायल हुए। पुलिस का आरोप है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि एक “बड़ी और संगठित साजिश” के तहत भड़काई गई थी।
SC में आज फिर से सुनवाई—आरोपियों की किस्मत दांव पर
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दिनभर सुनवाई चली और पुलिस की दलीलें सुनी गईं। आज अदालत चूंकि अपना आदेश सुना सकती है, इसलिए नजरें फैसले पर टिकी हैं। सभी आरोपी छात्रों और सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे हैं और UAPA की कठोर धाराओं के तहत बंद हैं।
दिल्ली पुलिस ने दिखाए वीडियो क्लिप, ASG ने कहा—“ये ज्यादा खतरनाक”
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने अदालत में शरजील इमाम के भाषणों के वीडियो क्लिप दिखाए। उन्होंने कहा—
“जब पढ़े-लिखे लोग अतिवादी विचारों के साथ मैदान में उतरते हैं, तो वे जमीनी स्तर पर काम करने वालों से ज्यादा खतरनाक होते हैं।”
ASG ने दावा किया कि ये भाषण समुदाय विशेष को भड़काने और सरकार के खिलाफ असंतोष तैयार करने के उद्देश्य से दिए गए थे।
“मकसद CAA का विरोध नहीं, सत्ता परिवर्तन था”—पुलिस का आरोप
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि:
अभियुक्तों का असली मकसद केवल CAA का विरोध नहीं था।
योजना थी कि केंद्र सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम किया जाए।
ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान जानबूझकर दिल्ली में आगजनी करवाई गई, ताकि वैश्विक मीडिया भारतीय सरकार की छवि खराब करे।
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों द्वारा कई WhatsApp ग्रुप बनाए गए थे, जिनके जरिए चक्का जाम, प्रोटेस्ट मैनेजमेंट और भीड़ जुटाने की रणनीति बनाई गई।
“3 घंटे के भाषण में सिर्फ कुछ सेकंड दिखाए जा रहे”— बचाव पक्ष की दलील
शरजील इमाम के वकील सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कहा कि पुलिस वीडियो के कुछ सेकंड की क्लिप दिखा रही है जबकि पूरा भाषण तीन घंटे का है।
उनका तर्क था कि—
चार्जशीट में पूरा वीडियो पहले ही जमा है।
केवल छोटे हिस्से दिखाकर गलत संदर्भ बनाने की कोशिश की जा रही है।
“साढ़े 5 साल जेल में रहना जमानत का आधार नहीं”—ASG
पुलिस की ओर से कहा गया कि लंबे समय तक जेल में रहना जमानत का स्वचालित आधार नहीं हो सकता।
ASG का कहना है कि—
“अगर सुनवाई में देरी है, तो निचली अदालत को तेजी से सुनवाई करने का निर्देश दिया जा सकता है। लेकिन इतने गंभीर आरोपों में सीधे जमानत देना उचित नहीं।”
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, आज जारी हो सकता है आदेश
गुरुवार को लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत आरोपी छात्र नेताओं की जमानत पर बड़ा फैसला सुना सकती है, जिसे दिल्ली दंगा केस की सबसे अहम घटनाओं में से एक माना जा रहा है।