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ईरान–तेल व्यापार पर और सख्त हुए ट्रंप: भारत की दो कंपनियां और दो कारोबारी अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में…

अमेरिका ने ईरान से अवैध तेल व्यापार रोकने के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत की दो कंपनियों और दो कारोबारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने कुल 17 संस्थाओं और व्यक्तियों को नामित किया है, जबकि ट्रेजरी विभाग ने अलग से 41 और इकाइयों पर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के ऊर्जा व्यापार को वैश्विक स्तर पर बाधित करने के लिए आक्रामक अभियान चला रहा है।

🔶 अमेरिका का आरोप: भारतीय कंपनियां ईरानी तेल शिपमेंट नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि भारत सहित कई देशों में मौजूद कंपनियां और कारोबारी ऐसे नेटवर्क में शामिल हैं जो अमेरिकी प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री और ढुलाई में मदद कर रहे थे।
अमेरिका के अनुसार, ये नेटवर्क गुप्त चैनलों के जरिये ईरान को अरबों रुपये का राजस्व उपलब्ध कराते हैं जो क्षेत्रीय समूहों और सैन्य गतिविधियों को फंड करता है।

🔶 भारतीय नागरिक जैर हुसैन–जुल्फिकार हुसैन और RN Ship Management पर कड़ा प्रतिबंध

प्रतिबंधित भारतीय कारोबारियों की पहचान जैर हुसैन और जुल्फिकार हुसैन के रूप में हुई है।
इन दोनों की कंपनी RN Ship Management Pvt. Ltd. पर आरोप है कि उसने 2025 की शुरुआत से ईरानी तेल ले जाने वाले कई जहाजों का संचालन किया।

अमेरिका का दावा है कि कंपनी ने बार-बार ऐसे शिपमेंट को मैनेज किया, जो सीधे तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों को उल्लंघन करते थे।

🔶 TR6 Petro India LLP पर एक्शन — 8 मिलियन डॉलर से अधिक का बिटुमेन आयात

अमेरिका ने पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार वाली भारतीय कंपनी TR6 Petro India LLP पर भी प्रतिबंध लगाया है।
ट्रेजरी विभाग का कहना है कि TR6 Petro ने अक्टूबर 2024 से जून 2025 तक ईरानी मूल के बिटुमेन की खरीद की, जिसकी कीमत 8 मिलियन डॉलर से अधिक थी।

आरोप है कि कंपनी ने ऐसी सप्लाई चेन का हिस्सा बनकर ईरान को आर्थिक लाभ पहुंचाया जिससे अमेरिकी प्रतिबंध अप्रभावी हो रहे थे।

🔶 अमेरिका की बड़ी कार्रवाई — कुल 58 संस्थाएं, जहाज और विमान निशाने पर

विदेश विभाग द्वारा लगाए गए 17 नामितीकरणों के अलावा, अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने 41 और विदेशी संस्थाओं, जहाजों, व्यक्तियों और विमानों पर प्रतिबंध लगाया।
इनमें पनामा, सेशेल्स, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े शिपिंग ऑपरेटर भी शामिल हैं।

अमेरिका का उद्देश्य ईरान की पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन को तोड़ना और उसकी आर्थिक क्षमता को सीमित करना है।

🔶 ईरान का पलटवार — सभी आरोप निराधार, ‘राजनीतिक दबाव’ का आरोप

ईरान ने अमेरिकी दावों को “भ्रामक” और “राजनीतिक दबाव का हिस्सा” बताया है।
तेहरान ने कहा कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा को ईरान अस्थिर नहीं कर रहा, बल्कि अमेरिका प्रतिबंधों का दुरुपयोग कर रहा है।

ईरान के अनुसार, अमेरिका तेल बाजार को नियंत्रित करने के लिए मनमानी कार्रवाई कर रहा है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा? यह प्रतिबंध कितना गंभीर है

विशेषज्ञ मानते हैं:

प्रतिबंध सीधे भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित नहीं करेंगे, क्योंकि भारत आधिकारिक रूप से ईरान से तेल आयात नहीं कर रहा

>लेकिन भारत की शिपिंग कंपनियों और ट्रेड फर्मों के लिए यह बड़ा अलर्ट है

>अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और बीमा प्रक्रियाओं में बाधाएं बढ़ सकती हैं

>अमेरिका अपनी मध्य-पूर्व नीति में ट्रंप के दौर में और अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है

यह कार्रवाई साफ दिखाती है कि ट्रंप प्रशासन ईरान–चीन–रूस गठजोड़ को कमजोर करने के लिए व्यापारिक नेटवर्क पर सीधा दबाव बढ़ा रहा है।

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