दिल्ली में साइबर क्राइम पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई…
दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ वह ऑपरेशन चला दिया है, जिसकी तैयारी कई महीनों से की जा रही थी। देशभर में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई कर न सिर्फ 700 साइबर अपराधियों को पकड़ा गया, बल्कि करीब 1000 करोड़ रुपये के ठगी रैकेट का बड़ा जाल भी सामने आया है। यह ऑपरेशन राजधानी में साइबर सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संदेश है।
700 साइबर अपराधी गिरफ्त में — दिल्ली पुलिस का मेगा ऑपरेशन सफल
दिल्ली पुलिस ने एक समन्वित अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी करते हुए 700 से ज्यादा साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई इतनी व्यापक थी कि पुलिस की कई टीमें एक ही समय पर ग्राउंड पर उतरीं और नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को निशाना बनाया।
1000 करोड़ के ठगी नेटवर्क का खुलासा — देशभर में फैला था गिरोह
जांच में सामने आया कि पकड़े गए आरोपियों से जुड़े गिरोह ने विभिन्न राज्यों में फर्जी कॉल सेंटर, डिजिटल वॉलेट, मनी म्यूल्स और नकली कस्टमर केयर नंबरों के जरिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया था। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और विदेशी लिंक भी मिलने की संभावना से इनकार नहीं की गई है।
टेक्नोलॉजी की आड़ में लोगों को बनाया जाता था निशाना
यह गैंग ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग अपडेट, केवाईसी वेरिफिकेशन, लोन ऑफर और इनामी स्कीम के नाम पर आम लोगों से पैसा ठगता था। कई मामलों में साइबर ठग स्क्रीन-शेयरिंग ऐप और फिशिंग लिंक्स का इस्तेमाल कर खाते खाली कर देते थे।
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की गई छापेमारी
पुलिस ने हजारों मोबाइल, सिम कार्ड, लैपटॉप, सर्वर और डिजिटल डेटा को कब्जे में लिया है। अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन पहले से चल रही तकनीकी ट्रैकिंग और शिकायतों के विश्लेषण पर आधारित था, जिसके चलते पूरे नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़कर एक साथ कार्रवाई की गई।
राजधानी में बढ़ते साइबर अपराध पर कड़ा संदेश
इस मेगा एक्शन के बाद दिल्ली पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी साइबर अपराधियों पर ऐसी ही कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑफर पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना ही सुरक्षा है
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई बताती है कि साइबर क्राइम अब किसी छोटे समूह का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित उद्योग बन चुका है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही खुद को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा हथियार है।