“दिल्ली धमाका मामले में संदिग्धों के घर तोड़े जाने पर महबूबा मुफ्ती की कड़ी प्रतिक्रिया”…
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली बम धमाके के संदिग्ध आतंकवादियों के घरों को ध्वस्त करने और उनके परिजनों की गिरफ्तारी पर कड़ी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस कार्रवाई को आतंकवाद से निपटने की बजाय निर्दोषों को डराने-दहशत फैलाने वाली रणनीति बताया है।
निंदा का तीर: मकान गिराने की कार्रवाई
महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उनके घरों को बुलडोजर से गिराना और उन पर कब्जा करना सही नहीं है।
उनका तर्क है कि इस तरह की कार्रवाई सीधे उन परिजनों को निशाना बनाती है जिनका इस आतंकवादी घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है।
गिरफ्तारी पर दबाव, भय की भावना
महबूबा मुफ्ती ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ की हैं, जिससे आम लोगों में डर की एक लहर दौड़ गई है।
उनकी राय में, अपराध साबित करने के बजाय उनसे जोड़ने वाले रिश्तेदारों को “मुलज़िम” मान लेना सामूहिक दंड जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।
पीडीपी प्रमुख ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
उन्होंने यही कहा कि अगर डॉक्टरों की संलिप्तता सच साबित होती है, तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन परिवारों के साथ अपमानजनक व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
कश्मीरियों की छवि को खतरा
महबूबा मुफ्ती ने चेतावनी दी है कि यदि कश्मीरी डॉक्टरों की भागीदारी साबित होती है, तो यह न सिर्फ अपराध का मामला होगा, बल्कि कश्मीरियों की सामूहिक प्रतिष्ठा पर भी गहरा असर डालेगा।
उनका कहना है कि डॉक्टर समाज के सबसे सम्मानित लोग होते हैं, और इस तरह की घटनाएँ उनकी छवि को भी धूमिल कर सकती हैं।
महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन राज्य को यह भी याद रखना चाहिए कि कार्रवाई करते समय निर्दोषों को बचाने और मानवीय सीमाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। उनकी बात में ऐसी चिंता झलकती है कि कानून और सुरक्षा की कार्रवाई – जब न्याय के नाम पर अत्याचार बन जाए – तो लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए ही बड़ा खतरा बन सकता है।
DELHI DESK TEAM STV NEWS RAJASTHAN