आनंदपाल एनकाउंटर पर अदालत का बड़ा फैसला: सात पुलिस अफसरों को मिली राहत, नहीं चलेगा मुकदमा…
राजस्थान के चर्चित आनंदपाल एनकाउंटर मामले में एक बार फिर अदालत से बड़ा अपडेट सामने आया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यह एनकाउंटर फेक नहीं था और इसमें शामिल सात पुलिस अफसरों पर अब कोई मुकदमा नहीं चलेगा। यह फैसला लंबे समय से चल रहे विवाद और चर्चाओं पर एक तरह से विराम लगाने वाला साबित हुआ है।
एनकाउंटर को फेक बताने की याचिका खारिज
जयपुर की विशेष अदालत ने आनंदपाल सिंह एनकाउंटर को फर्जी बताने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की थी। जांच रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि एनकाउंटर वास्तविक था, इसमें किसी तरह की साजिश या मनगढ़ंत कहानी नहीं पाई गई।
सात पुलिस अधिकारियों पर नहीं चलेगा मुकदमा
अदालत ने मामले में नामजद सात पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इनमें एनकाउंटर ऑपरेशन में शामिल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया या फर्जी मुठभेड़ की योजना बनाई।
आनंदपाल एनकाउंटर—राजस्थान की सबसे चर्चित कार्रवाई
2017 में चूरू जिले के मालासर गांव में हुआ यह एनकाउंटर राजस्थान की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रहा। कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल पर हत्या, लूट और फिरौती जैसे कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी। एनकाउंटर के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और इसे फेक बताने की मांग उठी थी।
फैसले से पुलिस तंत्र को मिला नैतिक बल
इस निर्णय को पुलिस विभाग के लिए राहत और मनोबल बढ़ाने वाला बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के इस फैसले से कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर लगा संदेह काफी हद तक दूर होगा। हालांकि आनंदपाल के समर्थक पक्ष आगे ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं।
आनंदपाल एनकाउंटर को लेकर आया यह फैसला राजस्थान की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम मोड़ है। वर्षों से चली आ रही बहस अब न्यायालय के इस निर्णय के बाद शांत होती नजर आ रही है। अदालत ने साफ कर दिया है कि कानून के तहत की गई कार्रवाई को फेक करार नहीं दिया जा सकता