अलवर कोर्ट का बड़ा फैसला: इंश्योरेंस क्लेम के लालच में युवक की हत्या, दो आरोपियों को उम्रकैद…
अलवर के एडीजे कोर्ट संख्या-1 ने मंगलवार को सात साल पुराने एक सनसनीखेज हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों — पवन और याकूब — को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
षड्यंत्र की कहानी — “भाई की जगह किसी और की हत्या”
विशिष्ट लोक अभियोजक नवनीत तिवारी ने बताया कि यह मामला 30 सितंबर 2018 का है। आरोपी अनिल का भाई सुनील काफी समय से लापता था। इंश्योरेंस की रकम हड़पने की नीयत से अनिल ने अपने साथियों पवन और याकूब के साथ मिलकर योजना बनाई कि सुनील जैसी कद-काठी वाले किसी युवक की हत्या कर उसकी लाश को सुनील बताकर बीमा का पैसा लिया जाए।
रामकेश बना शिकार
योजना के तहत तीनों ने महावीर ढाबे पर काम करने वाले 24 वर्षीय रामकेश को निशाना बनाया, जिसकी कद-काठी सुनील से मिलती थी। आरोपियों ने उससे दोस्ती की, 30 सितंबर को बोलेरो में बैठाकर उसे कपड़े और जूते दिलाए, फिर सिलीसेढ़ के पास श्योदानपुरा में शराब पिलाकर उसकी हत्या कर दी।
पहचान में धोखा देने की कोशिश नाकाम रही
षड्यंत्र को अंजाम देने के बाद अनिल ने अपने लापता भाई सुनील के दस्तावेज और मोबाइल मौके पर छोड़ दिए ताकि शव की पहचान सुनील के रूप में हो। अगले दिन पुलिस को दस्तावेजों के आधार पर लगा कि यह शव सुनील का है और परिवार को सूचना दी गई। परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी ही कर रहे थे कि तभी मृतक रामकेश के पिता राजू वहां पहुंचे और अपने बेटे की पहचान कर ली।
पुलिस जांच और अदालत का फैसला
पुलिस जांच में अनिल, पवन और याकूब तीनों की संलिप्तता सामने आई। तीनों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। एडीजे कोर्ट संख्या-1 के न्यायाधीश धीरज शर्मा ने पवन और याकूब को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि मास्टरमाइंड अनिल की गैरहाजिरी के कारण उसका फैसला फिलहाल लंबित रखा गया है।
पीड़ित पिता की प्रतिक्रिया
मृतक रामकेश के पिता राजू ने कहा, “सात साल से मैं बेटे को न्याय दिलाने के लिए दर-दर भटक रहा था। आज अदालत के फैसले से मुझे सच्चा न्याय मिला है। अब मैं मंदिर जाकर भगवान को धन्यवाद दूंगा।”