क्रिकेटर शिवालिक शर्मा को बड़ी राहत, रेप केस की FIR रद्द; हाईकोर्ट ने संबंधों को माना सहमति से बना
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने आईपीएल क्रिकेटर शिवालिक शर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और आपराधिक धमकी से जुड़ी एफआईआर रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की एकलपीठ ने 17 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले के तथ्यों, व्हाट्सऐप चैट और वित्तीय लेन-देन पर विचार किया। कोर्ट के अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड से संबंध सहमति से बने हुए प्रतीत होते हैं। यह मामला सगाई के बाद बने रिश्ते और उसके टूटने के बाद दर्ज शिकायत से जुड़ा था।
राजस्थान हाईकोर्ट ने FIR और संबंधित कार्यवाही की रद्द
जोधपुर हाईकोर्ट ने शिवालिक शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 7/2025 को रद्द करने का आदेश दिया। इसके साथ ही इस एफआईआर से जुड़ी परिणामी कार्यवाहियां भी समाप्त कर दी गईं।यह आदेश 17 सितंबर 2026 को एसबी क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन संख्या 3685/2025 में पारित किया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की एकलपीठ ने की।अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बीच हुए संवाद पर विचार करने के बाद याचिका स्वीकार की। फैसले के विस्तृत कानूनी आधार को समझने के लिए अदालत के लिखित आदेश का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
2 जनवरी 2025 को दर्ज हुई थी FIR
शिवालिक शर्मा के खिलाफ जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाना क्षेत्र में 2 जनवरी 2025 को एफआईआर दर्ज हुई थी।शिकायतकर्ता अस्मिता तिवारी ने दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के आरोप लगाए थे। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(n) और 506 के तहत कार्रवाई की गई थी।इसके बाद शिवालिक शर्मा ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में शिकायत में लगाए गए आरोपों को चुनौती दी गई थी।
परिवार की मौजूदगी में हुई थी सगाई
शिवालिक शर्मा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह और शिकायतकर्ता दोनों बालिग थे। उनके अनुसार, 28 अगस्त 2023 को परिवार की मौजूदगी में दोनों की सगाई हुई थी।याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सगाई के बाद दोनों के बीच लंबे समय तक संबंध रहे। दोनों शिकायतकर्ता के घर और जयपुर सहित अन्य स्थानों पर भी साथ रहे।शिवालिक शर्मा की ओर से यह भी कहा गया कि संबंध आपसी सहमति से बने थे। उन्होंने शादी का झूठा वादा करने के आरोप को गलत बताया।ये याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें थीं। मामले में अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के आधार पर समझी जानी चाहिए।
रिश्ते में मतभेद के बाद दर्ज हुई शिकायत
याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, दोनों के बीच अगस्त 2023 से जून 2024 तक संबंध रहे। बाद में आपसी मतभेद और छोटी-छोटी बातों को लेकर रिश्ते में तनाव बढ़ गया।दलील के मुताबिक, इसके बाद दोनों अलग हो गए और शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज कराई।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट और वित्तीय लेन-देन सहित उपलब्ध तथ्यों पर विचार किया।अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर संबंधों को सहमति से बना हुआ माना और संबंधित धाराओं के तहत अपराध का आधार नहीं पाया। इसी आधार पर एफआईआर और उससे जुड़ी कार्यवाहियां रद्द की गईं।
व्हाट्सऐप चैट और वित्तीय लेन-देन भी रहे अहम
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुए संवाद और वित्तीय लेन-देन पर भी विचार किया गया।ऐसे मामलों में उपलब्ध रिकॉर्ड का महत्व होता है। हालांकि, किसी एक चैट या वित्तीय लेन-देन से हर परिस्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अदालत ने इस मामले में उपलब्ध समग्र तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया।हाईकोर्ट का आदेश इसी मामले के विशिष्ट तथ्यों और रिकॉर्ड से जुड़ा है। इसे हर ऐसे मामले पर लागू होने वाला सामान्य निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के फैसले से शिवालिक शर्मा को राहत
राजस्थान हाईकोर्ट ने शिवालिक शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए एफआईआर संख्या 7/2025 और उससे जुड़ी सभी परिणामी कार्यवाहियां रद्द कर दीं।अदालत ने लंबित अन्य आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया।इस फैसले से शिवालिक शर्मा को इस विशेष मामले में कानूनी राहत मिली है। वहीं, यह आदेश मामले के उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दिया गया है। इसे अन्य मामलों या आरोपों की स्थिति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
सहमति और आपराधिक आरोपों के बीच कानूनी अंतर
यह मामला सगाई के बाद बने संबंधों और उनके टूटने के बाद दर्ज शिकायत से जुड़ा था। ऐसे मामलों में सहमति, शादी के वादे से संबंधित आरोप और उपलब्ध साक्ष्यों का कानूनी मूल्यांकन महत्वपूर्ण होता है।केवल रिश्ता टूटने या शादी नहीं होने से अपने आप किसी आपराधिक आरोप का निष्कर्ष नहीं निकलता। इसी तरह, सहमति का सवाल भी मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होता है।इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एफआईआर रद्द की है। अदालत का फैसला इस मामले के संदर्भ में समझना जरूरी है।