सिरोही के भारजा गांव में खनन परियोजना के विरोध में चुनाव बहिष्कार, सरपंच-पंच पदों पर नहीं भरा एक भी नामांकन
सिरोही। राजस्थान के सिरोही जिले के भारजा गांव में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने सरपंच और पंच पदों के चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। मैसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना को निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने नामांकन प्रक्रिया से दूरी बनाई। गुरुवार को नामांकन के दौरान सरपंच और पंच पदों के लिए एक भी नामांकन दाखिल नहीं हुआ। प्रशासन की समझाइश के बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जब तक खनन परियोजना निरस्त नहीं होती, तब तक वे चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का बड़ा फैसला
सिरोही जिले के भारजा गांव में पंचायती राज चुनाव के बीच खनन परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सरपंच और पंच पदों के चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।जानकारी के अनुसार, मैसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर ग्रामीण लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे हैं। इसी विरोध के चलते गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी भी उम्मीदवार ने सरपंच और पंच पदों के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया।ग्रामीणों के इस सामूहिक फैसले से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर असर पड़ने की स्थिति बन गई है।
प्रशासन की समझाइश के बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अडिग
चुनाव बहिष्कार के फैसले के बाद प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए ग्रामीणों से बातचीत की।हालांकि, ग्रामीणों ने अपना रुख स्पष्ट रखते हुए खनन परियोजना को निरस्त करने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे सरपंच और पंच पदों के चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।ग्रामीणों के अनुसार, यह निर्णय गांव के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उनका विरोध प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर है। हालांकि, परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय और अन्य आपत्तियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
नामांकन नहीं होने से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर असर
भारजा गांव में सरपंच और पंच पदों के लिए एक भी नामांकन दाखिल नहीं होना चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रत्याशी के सामने नहीं आने से अब संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के सामने आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत होगी।चुनाव बहिष्कार के बाद निर्वाचन प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी, यह लागू चुनाव नियमों और निर्वाचन विभाग के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल, इस संबंध में आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।
ग्रामीणों ने खनन परियोजना निरस्त करने की मांग दोहराई
भारजा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रस्तावित खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि गांव से जुड़े मुद्दों पर उनकी मांगों का समाधान किया जाना चाहिए।ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के सामने परियोजना निरस्त करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि मांग पूरी होने के बाद ही वे चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने पर विचार करेंगे।हालांकि, परियोजना को लेकर संबंधित कंपनी और प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में खनन परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं का आकलन संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना जरूरी है।
गांव की एकजुटता से बढ़ी प्रशासन की चुनौती
भारजा में चुनाव बहिष्कार का फैसला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों के सामूहिक निर्णय ने प्रशासन के सामने संवाद और चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती रखी है।पंचायत चुनाव गांवों में स्थानीय नेतृत्व चुनने का महत्वपूर्ण अवसर होते हैं। ऐसे में किसी गांव में नामांकन नहीं होना स्थानीय असंतोष और जनसमस्याओं को समझने की जरूरत भी सामने लाता है।अब प्रशासन के अगले कदम और खनन परियोजना को लेकर होने वाले फैसलों पर नजर रहेगी।
खनन परियोजना पर फैसले का इंतजार
भारजा गांव में सरपंच और पंच पदों के चुनाव के बहिष्कार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्रामीणों की मांग पर सरकार और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।फिलहाल ग्रामीणों ने परियोजना निरस्त होने तक चुनाव में भाग नहीं लेने का रुख अपनाया है। वहीं, नामांकन नहीं होने के बाद चुनाव की आगे की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन विभाग की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।अब इस पूरे मामले में ग्रामीणों की मांग, प्रशासन की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित खनन परियोजना से जुड़े निर्णय पर निगाहें टिकी हैं।