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खरगे की PM मोदी को चुनौती: हिम्मत है तो संसद भंग कर बैलेट पेपर से कराएं चुनाव

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को अपनी चुनावी ताकत पर भरोसा है, तो संसद भंग कराकर मतपत्रों के जरिए चुनाव कराए जाएं। खरगे ने यह टिप्पणी कर्नाटक विधान परिषद चुनावों के नतीजों के बाद की, जहां भाजपा और जेडीएस ने चारों सीटें जीतीं। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों पर भी चर्चा की मांग की। इस बीच, कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने कथित ‘वोट चोरी’ के विरोध में 1 नवंबर को दिल्ली में रैली करने की तैयारी की है।

खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को दी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को कर्नाटक विधान परिषद चुनावों के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को अपने प्रदर्शन पर इतना भरोसा है, तो वह संसद भंग कराकर बैलेट पेपर से चुनाव कराए।खरगे ने यह भी कहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर किसी पार्टी को अपनी राजनीतिक ताकत को लेकर अहंकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने पुराने चुनावी दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय भाजपा संसद में केवल दो सीटों तक सिमटी हुई थी।उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठा रहे हैं।

महंगाई, बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा की मांग

खरगे ने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी और युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इन महत्वपूर्ण विषयों से ध्यान हटाकर दूसरे मुद्दों पर बयान दे रहे हैं।कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री की ओर से कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर की जाने वाली टिप्पणियों का भी जवाब दिया। उन्होंने भाजपा के पुराने चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं।हालांकि, सरकार की नीतियों और उनके प्रभाव को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के दावे अलग-अलग हैं। इन मुद्दों का आकलन आर्थिक आंकड़ों, रोजगार संबंधी रिपोर्टों और अन्य आधिकारिक जानकारियों के आधार पर किया जाना चाहिए।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद आया बयान

खरगे की टिप्पणी कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों के चुनाव परिणामों के बाद आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा और जेडीएस गठबंधन ने इन चारों सीटों पर जीत दर्ज की।खरगे ने कहा कि इन नतीजों के बावजूद कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग वापस नहीं लेगी। उनका तर्क था कि किसी चुनाव में हार या जीत के आधार पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी मांगों को छोड़ना जरूरी नहीं है।यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि कर्नाटक विधान परिषद के इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। इसके बावजूद भाजपा और जेडीएस की जीत हुई। खरगे ने इसी संदर्भ में भाजपा को संसद भंग कर मतपत्रों से चुनाव कराने की चुनौती दी।

1 नवंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन की रैली

कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने कथित ‘वोट चोरी’ तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बनाई है।खरगे के अनुसार, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए संघर्ष और सार्वजनिक भागीदारी जरूरी है।विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कुछ पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने या उनके मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए निर्वाचन आयोग के आंकड़े, संबंधित रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विरोध

खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपनी आलोचना दोहराई। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन आयोग से जवाबदेही की मांग की है।विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर रोक और कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है।हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया से जुड़े तथ्य अलग-अलग विषय हैं। किसी भी अनियमितता के निष्कर्ष के लिए दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी की जांच जरूरी है।

चुनाव प्रक्रिया पर बहस के बीच राजनीतिक टकराव तेज

खरगे के बयान से चुनावी पारदर्शिता और EVM के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर कायम है, जबकि भाजपा और विपक्ष के बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।अब सभी की नजर 1 नवंबर को प्रस्तावित दिल्ली रैली और उसके दौरान विपक्षी नेताओं के बयानों पर रहेगी। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवालों का आकलन निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

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