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फर्जी हेल्थ कैंप लगाकर आधार से बनवाते थे सिम, मथुरा से दो आरोपी गिरफ्तार; 20 से ज्यादा साइबर ठगी के मामलों से जुड़े तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने साइबर ठगी के लिए सिम कार्ड और ई-सिम उपलब्ध कराने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मथुरा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वे ग्रामीण इलाकों में फर्जी हेल्थ कैंप लगाकर लोगों के आधार कार्ड और बायोमेट्रिक जानकारी हासिल करते थे। बाद में इन जानकारियों का इस्तेमाल सिम कार्ड जारी कराने में किया जाता था। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क के जरिए एक साल में 3,000 से ज्यादा सिम एक्टिवेट किए गए। जांच में 20 से अधिक साइबर ठगी की शिकायतों से भी इनके तार जुड़ने की बात सामने आई है।

फर्जी हेल्थ कैंप के जरिए जुटाते थे लोगों की जानकारी

पुलिस के अनुसार, आरोपी ग्रामीण इलाकों में सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के नाम पर हेल्थ कैंप आयोजित करते थे। इन कैंपों में आने वाले लोगों से आधार कार्ड और बायोमेट्रिक जानकारी ली जाती थी। आरोप है कि बाद में इन जानकारियों का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना सिम कार्ड जारी कराने के लिए किया जाता था।जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तरीके से जुटाए गए सिम कार्ड साइबर ठगी करने वाले लोगों तक पहुंचाए जाते थे। हालांकि, कितने लोगों की पहचान का दुरुपयोग हुआ और कितने सिम इसी तरीके से जारी कराए गए, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद होगी।

एक साल में 3,000 से ज्यादा सिम एक्टिवेट करने का शक

पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी करीब एक साल से सिम कार्ड और ई-सिम की खरीद-फरोख्त में कथित रूप से शामिल थे। जांच में सामने आया है कि वे रोजाना लगभग 20 से 30 ई-सिम का कारोबार करते थे।पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क के जरिए एक साल में 3,000 से अधिक सिम एक्टिवेट किए गए। आरोप है कि आरोपी एक एक्टिवेटेड सिम या ई-सिम 800 से 1,200 रुपये में खरीदते और करीब 2,000 रुपये में बेच देते थे।जांच में भुगतान के लिए यूएसडीटी नाम की क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सिम कहां भेजे जाते थे और उनसे किन साइबर अपराधों को अंजाम दिया गया।

डिजिटल अरेस्ट के मामले की जांच से खुला नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का पता डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई साइबर ठगी के एक मामले की जांच के दौरान चला। शिकायतकर्ता श्रीनिवास को व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया गया था। आरोप है कि उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर करीब दो सप्ताह तक धमकाया गया।इस दौरान शिकायतकर्ता से छह अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के जरिए कुल 1.64 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने मोबाइल नंबरों और डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा का विश्लेषण किया। इसके बाद जांच की कड़ियां उत्तर प्रदेश के वृंदावन और मथुरा तक पहुंचीं।

मथुरा के गांव से दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, 20 और 21 अक्टूबर 2026 की रात मथुरा जिले के फरह क्षेत्र स्थित फतीहा गांव में छापा मारकर जितेंद्र सिंह और ब्रजेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दोनों को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया।जांच एजेंसियां आरोपियों से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, सिम कार्ड की खरीद-फरोख्त और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी की रकम और सिम कार्ड के इस्तेमाल के बीच क्या संबंध था।

फिजिकल सिम को ई-सिम में बदलकर भी करते थे कारोबार

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन ग्रुप और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए एक्टिवेटेड ई-सिम हासिल करते थे। पुलिस का कहना है कि फिजिकल सिम को ई-सिम में बदलने और उनसे जुड़े क्यूआर कोड की खरीद-फरोख्त के जरिए भी कारोबार किया जाता था।जांच में फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस को कुछ विदेशी संपर्कों से जुड़े सुराग मिलने की बात कही गई है। हालांकि, इन संपर्कों की वास्तविक भूमिका और कथित नेटवर्क के विस्तार की पुष्टि होना बाकी है।

पुराने मोबाइल तोड़ देते थे आरोपी

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि वे पकड़े जाने से बचने के लिए समय-समय पर मोबाइल फोन बदलते थे और पुराने फोन नष्ट कर देते थे।अब पुलिस बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इनसे कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, संपर्कों और साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

20 से ज्यादा साइबर ठगी के मामलों से जुड़े तार

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े सिम कार्ड के तार 20 से अधिक साइबर ठगी की शिकायतों से मिले हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर पैसे वसूलने के मामले भी शामिल बताए गए हैं।फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपियों ने कितने सिम कार्ड जारी कराए, कितने लोगों की पहचान का कथित दुरुपयोग हुआ और इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन अपराधों में किया गया। जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही नेटवर्क की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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Stv News Rajasthan

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