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सीकर: तिरंगे में लिपटे इंस्पेक्टर पिता को देख बिलख पड़ीं 6 बेटियां, बेटे ने दी मुखाग्नि; गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

सीकर जिले के बडिया गांव में इंस्पेक्टर रामप्रताप खटीक को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई। कैंसर से जूझ रहे 58 वर्षीय रामप्रताप का दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। रविवार सुबह उनकी पार्थिव देह गांव पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। पिता को तिरंगे में लिपटा देखकर उनकी छह बेटियां बिलख पड़ीं। वहीं, पत्नी संतोष देवी और मां कस्तूरी देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम संस्कार में बेटे शिव कुमार ने मुखाग्नि दी।

तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह घर पहुंची, भावुक हुआ परिवार

सीकर जिले के बडिया गांव में रविवार सुबह इंस्पेक्टर रामप्रताप खटीक की अंतिम विदाई के दौरान माहौल गमगीन हो गया। सुबह करीब 5 बजे बटालियन के जवान उनकी पार्थिव देह लेकर गांव पहुंचे। करीब 7 बजे जब तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो परिजनों का दुख छलक पड़ा।पिता को अंतिम बार देखने के लिए उनकी छह बेटियां बिलख उठीं। परिवार के इस दर्दनाक पल ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। मोहल्ले की महिलाएं भी रोने लगीं। रामप्रताप की पत्नी संतोष देवी बेसुध हो गईं। वहीं, उनकी बुजुर्ग मां कस्तूरी देवी भी बेटे को खोने का गम सह नहीं सकीं।

एक साल से कैंसर से जूझ रहे थे इंस्पेक्टर रामप्रताप

इंस्पेक्टर रामप्रताप खटीक (58) खटियान की ढाणी, बडिया मोड़ महावाना के निवासी थे। वह करीब एक साल से कैंसर से पीड़ित थे। शनिवार दोपहर दिल्ली के बालाजी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।जानकारी के अनुसार, उनकी तैनाती दिल्ली के नरैना स्थित सातवीं बटालियन में थी। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों और गांव में शोक की लहर फैल गई। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे रामप्रताप के निधन से परिवार ने अपना एक अहम सहारा खो दिया।

10 किलोमीटर तक निकाली गई तिरंगा रैली

घर पर अंतिम दर्शन के बाद रामप्रताप खटीक की अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान करीब 10 किलोमीटर तक तिरंगा रैली निकाली गई। रैली में ग्रामीण और परिचित शामिल हुए। सम्मान के साथ अंतिम यात्रा श्मशान भूमि पहुंची।श्मशान भूमि पर आईटीआई बटालियन के अधिकारी सतपाल सिंह ने रामप्रताप की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने उन्हें नमन किया। गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

बेटे शिव कुमार ने दी मुखाग्नि, छह बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल

अंतिम संस्कार के दौरान बेटे शिव कुमार ने पिता को मुखाग्नि दी। रामप्रताप छह बेटियों के पिता थे। पिता की पार्थिव देह के सामने बेटियों का विलाप वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया।परिवार के इस कठिन समय में रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने परिजनों को सांत्वना दी। पिता को खोने का दुख और परिवार की जिम्मेदारियों की चिंता माहौल में साफ नजर आई। रामप्रताप की अंतिम विदाई गांव के लिए भी एक भावुक क्षण रही।

गांव में शोक, इंस्पेक्टर को दी गई श्रद्धांजलि

रामप्रताप खटीक के निधन से बडिया गांव में शोक का माहौल रहा। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुई विदाई ने उनके सेवाकाल और परिवार के दुख को एक साथ सामने ला दिया।उनके निधन से परिवार ने अपने प्रिय सदस्य को खो दिया। वहीं, गांव के लोगों ने भी उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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