अरुणाचल में भारत-चीन सीमा पर तनाव, ITBP प्रमुख बोले- सुरक्षा के लिए बढ़ाई तैनाती
अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा क्षेत्रों में भारत-चीन सैनिकों के बीच तनाव की खबर सामने आई है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के अनुसार, सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए तैनाती बढ़ाई गई है। उन्होंने ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक विकसित करने तथा जवानों की सुरक्षा के लिए आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने की जानकारी भी दी।
अलवर में ITBP प्रमुख ने सीमा के हालात पर दी जानकारी
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर गुरुवार को अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज पहुंचे। यहां आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने भारत-चीन सीमा की स्थिति पर बात की।उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा क्षेत्रों में जुलाई के अंतिम दिनों से दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमने-सामने आने की स्थिति बनी हुई है। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारतीय बलों की तैनाती बढ़ाई गई है।इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा में आधुनिक तकनीक की भूमिका और ITBP की तैयारियों पर भी जानकारी साझा की।
तीन स्तरों की वार्ता के बाद भी स्थिति संवेदनशील
ITBP प्रमुख के अनुसार, भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत हुई है। इनमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC), विशेष प्रतिनिधि स्तर और कोर कमांडर स्तर की वार्ताएं शामिल हैं।इन वार्ताओं का उद्देश्य सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और तनाव कम करने के रास्ते तलाशना है। हालांकि, संबंधित क्षेत्रों में सैनिकों के आमने-सामने आने की स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं होने की जानकारी दी गई।सीमा पर सैन्य गतिविधियों के बीच दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में बातचीत और सुरक्षा व्यवस्था के अगले कदमों पर नजर बनी हुई है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर ITBP का फोकस
शत्रुजीत कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। निगरानी से लेकर सैन्य अभियानों तक इनका इस्तेमाल सुरक्षा रणनीतियों को प्रभावित कर रहा है।इसी को ध्यान में रखते हुए ITBP ड्रोन तकनीक विकसित करने और दुश्मन के ड्रोन की पहचान करने की क्षमता मजबूत करने पर काम कर रही है। बल एंटी-ड्रोन प्रणालियों के जरिए संभावित खतरे को निष्क्रिय करने की तैयारियां भी बढ़ा रहा है।सीमा पर तकनीकी निगरानी मजबूत करना सुरक्षा बलों की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित खतरों का समय रहते आकलन करने में मदद मिल सकती है।
LAC के पास जवानों की सुरक्षा के लिए बन रहे शेल्टर
ITBP प्रमुख ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाने की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि सीमा पर तैनात जवानों और महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा के लिए भूमिगत शेल्टर तैयार किए जा रहे हैं।इन सुविधाओं का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में जवानों को अधिक सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती पेश करती हैं।ऐसे में बेहतर आवास, सुरक्षा ढांचे और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सीमा पर तैनात जवानों की कार्यक्षमता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर उठाए सवाल
अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किए हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चीन नीति को लेकर सरकार की आलोचना की।उन्होंने जून 2020 में चीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। रमेश ने ITBP प्रमुख के बयान और केंद्र सरकार की चीन नीति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया।कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक होने के समय पर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि यदि ऐसी घटनाएं जुलाई से हो रही थीं, तो देश को इसकी जानकारी अक्टूबर में क्यों मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से सार्वजनिक बयान नहीं आने पर भी सवाल उठाए।ये कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं। सीमा पर घटनाओं की विस्तृत आधिकारिक जानकारी और सरकार का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।
गलवान झड़प के बाद भारत-चीन सीमा पर बढ़ी संवेदनशीलता
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे।इस घटना के बाद सीमा पर सैन्य तैनाती, निगरानी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं भी हुईं।गलवान की घटना के बाद से सीमा से जुड़े मुद्दे भारत-चीन संबंधों में संवेदनशील बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश में मौजूदा स्थिति की खबरों ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया है।
अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को भारत करता है खारिज
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। चीन राज्य के बड़े हिस्से पर दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है। चीन इस क्षेत्र के लिए ‘जांगनान’ नाम का भी इस्तेमाल करता है।चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है। भारत इन दावों और नामकरण की कोशिशों को खारिज करता है।भारत का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न अंग है। भारत के अनुसार, किसी स्थान का नाम बदलने से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।सीमा पर तनाव के बीच ITBP की तैयारियों और आधुनिक तकनीक पर जोर महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दे बनकर सामने आए हैं। वहीं, कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति और घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक होने के समय पर सवाल उठाए हैं।