UP चुनाव 2027: प्रियंका गांधी ने संभाली कमान, सपा से सीट बंटवारे पर जल्द शुरू हो सकती है बातचीत
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा प्रदेश के नेताओं के साथ संभावित उम्मीदवारों और मजबूत विधानसभा सीटों पर मंथन कर रही हैं। पार्टी का जोर उन सीटों की पहचान करने पर है, जहां उसका संगठन और स्थानीय जनाधार मजबूत है। इसके बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या और समझौते को लेकर अभी अंतिम सहमति की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
प्रियंका गांधी ने संभाली यूपी चुनाव की तैयारी
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस संगठन और उम्मीदवारों की तैयारी पर ध्यान दे रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और सर्वे टीम के साथ संभावित मजबूत सीटों पर चर्चा कर रही हैं।बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद सहित वरिष्ठ नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है।पार्टी का उद्देश्य ऐसी सीटों की पहचान करना है, जहां कांग्रेस अपने संगठन, स्थानीय नेताओं और मतदाताओं के समर्थन के आधार पर प्रभावी मुकाबला कर सके। इसके लिए आंतरिक सर्वे और जमीनी फीडबैक का सहारा लिया जा रहा है।
सपा के साथ सीट बंटवारे पर कब होगी बातचीत?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ चुकी हैं। अब दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के तालमेल पर चर्चा की तैयारी कर रहे हैं।सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि गठबंधन में सीट बंटवारे पर अक्टूबर में सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार तैयार कर रही है और गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की अपेक्षा रखती है। हालांकि, यह कांग्रेस की ओर से बताई गई अपेक्षा है, सपा के साथ तय हुआ समझौता नहीं। अंतिम सीट बंटवारा दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस मजबूत सीटों की पहचान में जुटी
कांग्रेस की रणनीति केवल सीटों की संख्या तय करने तक सीमित नहीं है। पार्टी यह भी आकलन करना चाहती है कि किन विधानसभा क्षेत्रों में उसका संगठन मजबूत है और कहां गठबंधन के साथ बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस और सपा दोनों ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने स्तर पर सर्वे कराए हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित उम्मीदवारों, स्थानीय समर्थन और चुनावी परिस्थितियों का आकलन करना है। सर्वे के आधार पर कांग्रेस अपनी प्राथमिक सीटों की सूची तैयार कर सकती है। इससे सपा के साथ बातचीत में सीटों के चयन और स्थानीय समीकरणों पर चर्चा करने में मदद मिल सकती है।
150 से 200 सीटों तक की चर्चा, लेकिन अंतिम फैसला बाकी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं ने गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग उठाई है। सितंबर में राजेंद्र पाल गौतम ने कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही थी। वहीं, अक्टूबर की शुरुआत में कुछ कांग्रेस नेताओं की ओर से 200 सीटों तक तैयारी करने का दावा भी सामने आया था। इन बयानों से संकेत मिलता है कि सीटों की संख्या को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा जारी है। लेकिन 150 या 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा अंतिम समझौते का प्रमाण नहीं है।सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे में स्थानीय समीकरण, पिछले चुनावों का प्रदर्शन और दोनों दलों के संगठन की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। आधिकारिक समझौता होने तक किसी निश्चित संख्या को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस संगठन को मजबूत करने पर भी जोर
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी देने और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। इसके बाद पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन अपने आप विधानसभा चुनाव के नतीजों का संकेत नहीं देता।कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने के साथ सपा के साथ तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी है। दोनों दलों के बीच समय रहते सहमति बनने से उम्मीदवारों को तैयारी और प्रचार के लिए अधिक समय मिल सकता है।
अब सपा-कांग्रेस की बातचीत पर नजर
प्रियंका गांधी की बैठक और संभावित सीटों की पहचान को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। इसके बाद सपा के साथ सीट बंटवारे पर औपचारिक बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है।फिलहाल, दोनों दलों के बीच सीटों की अंतिम संख्या और समझौते की घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में शीर्ष नेतृत्व की बातचीत, सर्वे के निष्कर्ष और स्थानीय राजनीतिक समीकरण यह तय करने में अहम होंगे कि गठबंधन किस रूप में आगे बढ़ता है।