भरतपुर की सुजानगंगा नहर में मर रहीं मछलियां, बदबू से परेशान लोग; करोड़ों खर्च पर उठे सवाल
राजस्थान के भरतपुर शहर की ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर की बदहाल स्थिति ने सफाई और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नहर के पानी का रंग हरा पड़ गया है और कई जगह काई की मोटी परत जमा है। मृत मछलियों के सड़ने से उठ रही दुर्गंध के कारण राहगीरों को परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नहर के सुधार पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हालात नहीं बदले। अब इस मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में दोबारा उठाने की तैयारी की जा रही है।
केतन गेट से जनाना अस्पताल तक नहर की हालत खराब
भरतपुर में केतन गेट से जनाना अस्पताल तक सुजानगंगा नहर की स्थिति खराब बताई जा रही है। पानी का रंग हरा हो चुका है और कई हिस्सों में काई की मोटी परत दिखाई दे रही है। इससे नहर के पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, नहर में मछलियों के मरने और उनके सड़ने से तेज दुर्गंध फैल रही है। नहर के किनारे से गुजरने वाले कई लोग मुंह पर कपड़ा रखकर निकलते हैं। कुछ राहगीर इस रास्ते से बचने के लिए दूसरा मार्ग चुन रहे हैं।
मृत मछलियों को समय पर नहीं हटाने का आरोप
जनाना अस्पताल के पीछे नहर में मृत मछलियां पड़ी होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि उनका समय पर निस्तारण नहीं किया जा रहा। कुछ स्थानों पर श्वान मृत मछलियों को खाते दिखाई देने की बात भी कही गई है।इस स्थिति ने नहर की सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मृत मछलियों को समय पर हटाना और पानी की गुणवत्ता की जांच करना जरूरी है।हालांकि, मछलियों की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए पानी के नमूनों की जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुधार क्यों नहीं?
सुजानगंगा नहर के सुधार और सफाई पर भरतपुर विकास प्राधिकरण (BDA) तथा नगर निगम की ओर से करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि नहर की स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हो पाया है।लोगों के मुताबिक, समय-समय पर सफाई और सुधार के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद गंदगी और दुर्गंध की समस्या फिर सामने आ जाती है।ऐसे में खर्च की गई राशि, कराए गए कार्यों और उनके परिणामों की समीक्षा जरूरी है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि नहर की नियमित सफाई, पानी की गुणवत्ता और मृत मछलियों के निस्तारण की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है।
NGT में दोबारा मामला उठाने की तैयारी
सुजानगंगा नहर की बदहाली का मामला अब न्यायिक स्तर पर दोबारा उठाने की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मुद्दे पर पहले उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। बाद में मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंचा।संबंधित पक्षों का कहना है कि सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने के कारण मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। अब नहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिर से कानूनी कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।
अधिवक्ताओं ने किया नहर का निरीक्षण
वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा के साथ भोपाल के वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु सक्सेना और ओम शंकर श्रीवास्तव ने सुजानगंगा नहर का निरीक्षण किया। इस दौरान नहर की स्थिति और सफाई से जुड़े मुद्दों को देखा गया।श्रीराम शर्मा ने बताया कि वह लंबे समय से नहर के सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। हाल में हुई घोषणाओं के बाद उन्होंने अपने प्रयास कुछ समय के लिए धीमे कर दिए थे, लेकिन मौजूदा हालात से निराश होकर अब दोबारा न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं।
नगर निगम आयुक्त ने दिया मछलियां हटवाने का आश्वासन
नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार विश्नोई ने कहा कि नहर में मछलियों के मरने की जानकारी पहले नहीं मिली थी। अब ठेकेदार को निर्देश देकर जल्द मृत मछलियां हटवाई जाएंगी।उन्होंने यह भी बताया कि सुजानगंगा नहर के सुधार के लिए भरतपुर विकास प्राधिकरण परियोजना तैयार कर रहा है।फिलहाल मृत मछलियों को हटाने, नहर की सफाई और पानी की गुणवत्ता सुधारने को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल अस्थायी सफाई के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
सुजानगंगा नहर की सफाई और निगरानी जरूरी
भरतपुर की ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर शहर की महत्वपूर्ण जल संरचनाओं में शामिल है। इसकी मौजूदा स्थिति ने सफाई, पानी की गुणवत्ता और सरकारी खर्च के परिणामों को लेकर सवाल उठाए हैं।अब नगर निगम और भरतपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर नजर रहेगी। नहर में मछलियों की मौत के कारणों की जांच, नियमित सफाई और रखरखाव की स्पष्ट व्यवस्था से ही समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।