बालोतरा के युवाओं ने बनाया AI सुरक्षा मॉडल, अब CCTV कैमरे संदिग्ध गतिविधियों पर देंगे अलर्ट
राजस्थान के बालोतरा जिले के दो युवाओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सुरक्षा मॉडल विकसित किया है। यह तकनीक मौजूदा CCTV कैमरों से मिलने वाले वीडियो का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और सुरक्षा बलों को अलर्ट देने में मदद कर सकती है। मॉडल को इंटेलिजेंट बॉर्डर वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म (IBVAP) नाम दिया गया है। इसकी खासियत यह है कि इसे बिना इंटरनेट के चलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। दोनों युवाओं का शोधपत्र तुर्की में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय IEEE सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चयनित हुआ है।
CCTV कैमरों को स्मार्ट बनाने का प्रयास
सीमा और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कैमरों की लगातार निगरानी के लिए जवानों को लंबे समय तक स्क्रीन पर नजर रखनी पड़ती है। ऐसे में संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते ध्यान देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।बालोतरा के कृष चारण भांडियावास और गौरव वैष्णव आसोतरा ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए AI आधारित मॉडल तैयार किया है। इसका उद्देश्य मौजूदा कैमरों से मिलने वाले दृश्यों का विश्लेषण कर जरूरी सूचनाएं सामने लाना है।इस मॉडल के जरिए सुरक्षा कर्मियों को हर समय स्क्रीन देखने के बजाय संदिग्ध गतिविधि से जुड़े अलर्ट मिलने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक परिस्थितियों में इसकी सटीकता और उपयोगिता का आकलन परीक्षण के आधार पर ही किया जा सकेगा।
IBVAP मॉडल में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं?
दोनों युवाओं ने अपने मॉडल का नाम इंटेलिजेंट बॉर्डर वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म (IBVAP) रखा है। इसके तहत वीडियो में मौजूद व्यक्तियों और वाहनों से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण करने की सुविधाएं विकसित की गई हैं।बताई गई जानकारी के अनुसार, मॉडल में चेहरे की पहचान, वाहन की नंबर प्लेट पढ़ने, व्यक्ति की मौजूदगी का पता लगाने और गतिविधियों पर नजर रखने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।इन सुविधाओं का उद्देश्य सुरक्षा बलों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में सहायता देना है। यह तकनीक अपने आप किसी व्यक्ति को अपराधी साबित नहीं करती। अलर्ट मिलने के बाद मानवीय जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना जरूरी होगा।
बिना इंटरनेट काम करने की क्षमता पर जोर
इस मॉडल की एक प्रमुख विशेषता इसका ऑफलाइन संचालन बताया गया है। यानी इसे काम करने के लिए हर समय इंटरनेट या क्लाउड आधारित व्यवस्था पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।संवेदनशील क्षेत्रों में ऑफलाइन तकनीक उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे वीडियो और अन्य डेटा को बाहरी नेटवर्क पर भेजने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे डेटा सुरक्षा से जुड़े जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, डेटा की सुरक्षा केवल इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए सिस्टम की सुरक्षा, डेटा संग्रहण और उपयोग से जुड़े नियम भी महत्वपूर्ण होंगे।
बचपन के दोस्तों ने मिलकर विकसित किया मॉडल
कृष चारण और गौरव वैष्णव बचपन के दोस्त हैं। दोनों ने तकनीकी शिक्षा के दौरान इस विचार पर काम किया।कृष चारण एमसीए प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी हैं, जबकि गौरव वैष्णव कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक के तीसरे वर्ष में पढ़ रहे हैं। दोनों आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी, जयपुर में अध्ययनरत हैं।कृष के अनुसार, वे ऐसा तकनीकी समाधान बनाना चाहते थे, जो वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हो। सीमा पर तैनात जवानों को लगातार स्क्रीन देखने की चुनौती से प्रेरित होकर उन्होंने ऐसा मॉडल विकसित करने का विचार किया, जो संदिग्ध गतिविधियों पर अलर्ट दे सके।गौरव ने कहा कि उनके शोधपत्र का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए चयनित होना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
तुर्की के अंतरराष्ट्रीय IEEE सम्मेलन में प्रस्तुत होगा शोधपत्र
दोनों युवाओं के IBVAP मॉडल पर तैयार शोधपत्र का तुर्की में होने वाले अंतरराष्ट्रीय IEEE सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चयन हुआ है। उनके अनुसार, शोधपत्र IEEE से जुड़े सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा।अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध प्रस्तुत करने का अवसर उनके तकनीकी कार्य को विशेषज्ञों के सामने रखने का मौका देगा। इससे मॉडल की खूबियों, सीमाओं और संभावित उपयोग पर चर्चा हो सकेगी।इसके अलावा, दोनों युवाओं को हाल ही में IEEE SKIT की ओर से आयोजित Ignite Hackathon में विजेता रहने पर 35 हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया।
सुरक्षा तकनीक में नई संभावनाएं
AI आधारित वीडियो विश्लेषण का इस्तेमाल सुरक्षा निगरानी में समय बचाने और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में सहायता के लिए किया जा सकता है। IBVAP मॉडल भी इसी दिशा में तैयार किया गया है।हालांकि, चेहरे की पहचान और गतिविधियों के विश्लेषण जैसी तकनीकों में गलत अलर्ट, पहचान संबंधी त्रुटियों और निजता से जुड़े सवालों पर ध्यान देना जरूरी है। किसी भी वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी परीक्षण, मानवीय निगरानी और डेटा सुरक्षा के स्पष्ट नियम महत्वपूर्ण होंगे।बालोतरा के दोनों युवाओं का यह प्रयास स्थानीय प्रतिभा और तकनीकी नवाचार की संभावनाओं को सामने लाता है। अब उनके शोध की प्रस्तुति और मॉडल के आगे के परीक्षण पर नजर रहेगी।