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बारां पंचायत चुनाव 2021: 13 सीटें जीतकर भी जिला प्रमुख क्यों नहीं बना पाई BJP? जानिए क्रॉस वोटिंग की पूरी कहानी

राजस्थान के बारां जिले में वर्ष 2021 के पंचायतीराज चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। आठ पंचायत समितियों में दोनों दलों ने चार-चार समितियों में बोर्ड बनाए। वहीं, जिला परिषद की 25 सीटों में भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। इसके बावजूद जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। क्रॉस वोटिंग की चर्चा के बीच कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया जिला प्रमुख निर्वाचित हुईं। दिलचस्प बात यह रही कि अगले दिन उप जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा के छीतरलाल ने जीत दर्ज की। अब पंचायत चुनाव की नई हलचल के बीच वर्ष 2021 का यह घटनाक्रम फिर चर्चा में है।

जिला परिषद में भाजपा को मिली थी एक सीट की बढ़त

वर्ष 2021 के बारां जिला परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा था। जिला परिषद के कुल 25 वार्डों में भाजपा ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं।इस तरह सीटों के लिहाज से भाजपा को एक सीट की बढ़त हासिल थी। हालांकि, मत प्रतिशत में कांग्रेस आगे रही थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस को 48.52 प्रतिशत और भाजपा को 47.65 प्रतिशत वोट मिले थे।जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए निर्धारित था। ऐसे में दोनों दलों की नजर इस पद पर कब्जा जमाने की थी। लेकिन जिला प्रमुख के चुनाव में नतीजा भाजपा की उम्मीदों के उलट आया और कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया निर्वाचित हो गईं।

क्रॉस वोटिंग ने कैसे बदल दिया चुनावी गणित?

जिला परिषद में भाजपा के पास 13 और कांग्रेस के पास 12 सदस्य थे। इसके बावजूद जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत ने क्रॉस वोटिंग की चर्चा को जन्म दिया।राजनीतिक हलकों में सवाल उठे कि भाजपा की संख्या अधिक होने के बावजूद उसके पक्ष में सभी वोट क्यों नहीं पड़े। हालांकि, किस सदस्य ने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के भीतर भी हलचल की चर्चा हुई। बहुमत के बावजूद जिला प्रमुख का पद गंवाना पार्टी के लिए राजनीतिक झटका माना गया। वहीं, कांग्रेस ने इस परिणाम के साथ जिला परिषद की कमान हासिल कर ली।

अगले ही दिन भाजपा ने उप जिला प्रमुख का पद जीता

जिला प्रमुख के चुनाव में हार के बाद अगले दिन उप जिला प्रमुख का चुनाव हुआ। इस बार भाजपा के छीतरलाल निर्वाचित हुए।एक दिन के अंतर से आए इन नतीजों ने बारां के राजनीतिक घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया। जिला प्रमुख के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की चर्चा रही, जबकि उप जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार जीतने में सफल रहे।हालांकि, दोनों चुनावों के नतीजों से यह अपने आप साबित नहीं होता कि क्रॉस वोटिंग किसने की थी। इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने के लिए आधिकारिक मतदान रिकॉर्ड या संबंधित सदस्यों के बयान जरूरी होंगे।

आठ पंचायत समितियों में भाजपा-कांग्रेस बराबर

बारां जिले की आठ पंचायत समितियों में भी दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही थी। भाजपा ने बारां, अंता, छीपाबड़ौद और छबड़ा में बढ़त हासिल की, जबकि मांगरोल, अटरू, किशनगंज और शाहाबाद में कांग्रेस आगे रही।इस तरह पंचायत समितियों में दोनों दलों ने चार-चार जगह बोर्ड बनाए। यह परिणाम जिले में दोनों दलों की मजबूत मौजूदगी को दर्शाता था।मत प्रतिशत के स्तर पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में मुकाबला देखने को मिला। शाहाबाद में कांग्रेस को 56.37 प्रतिशत वोट मिले, जो आठों पंचायत समितियों में दोनों प्रमुख दलों के बीच दर्ज सर्वाधिक मत प्रतिशत बताया गया। वहीं, छीपाबड़ौद में भाजपा को 42.64 प्रतिशत और कांग्रेस को 37.83 प्रतिशत वोट मिले।

महिला प्रतिनिधित्व भी रहा चुनाव का अहम पहलू

वर्ष 2021 के जिला परिषद चुनाव में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कुल 25 निर्वाचित सदस्यों में 14 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल थे।इनमें भाजपा की छह और कांग्रेस की आठ महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए निर्धारित होने के कारण महिला उम्मीदवारों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी।वार्ड नंबर 24 से चुनाव जीतने वाली उर्मिला जैन भाया जिला प्रमुख बनीं। उनकी जीत ने जिला परिषद के राजनीतिक समीकरण में निर्णायक बदलाव ला दिया।

छह साल बाद फिर पंचायत चुनाव पर नजर

वर्ष 2021 के बारां पंचायत चुनाव का घटनाक्रम आज भी इसलिए चर्चा में आता है, क्योंकि जिला परिषद में एक सीट की बढ़त होने के बावजूद भाजपा जिला प्रमुख का पद हासिल नहीं कर सकी थी। वहीं, अगले दिन उप जिला प्रमुख पद पर भाजपा की जीत ने राजनीतिक समीकरण को और चर्चा में ला दिया था।अब पंचायत चुनाव की नई प्रक्रिया के बीच दोनों प्रमुख दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। बारां में पिछले चुनाव का अनुभव इस बार भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन सकता है।हालांकि, आगामी चुनावों का परिणाम पिछले चुनाव के आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता। इस बार उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, प्रचार और मतदाताओं के फैसले की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

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Stv News Rajasthan

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