जल जीवन मिशन की धीमी रफ्तार: राजस्थान के 44 लाख ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन का इंतजार, 3200 करोड़ का भुगतान अटका
राजस्थान में जल जीवन मिशन की प्रगति धीमी बनी हुई है। प्रदेश के करीब 44 लाख ग्रामीण परिवार अब भी नल कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 1.07 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों में से 59.24 प्रतिशत को ही नल कनेक्शन मिला है। वहीं, संवेदकों का करीब 3200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। इसके चलते पेयजल परियोजनाओं का काम प्रभावित हुआ है। उदयपुर के आदिवासी और पहाड़ी इलाकों में चुनौती और गंभीर है। अब सवाल केवल कनेक्शन देने का नहीं, बल्कि नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने का भी है।
राजस्थान में 44 लाख परिवार अब भी नल कनेक्शन से वंचित
हर ग्रामीण परिवार तक नल से पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन शुरू किया गया था। लेकिन राजस्थान में योजना की प्रगति अब भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल 1 करोड़ 7 लाख 87 हजार 724 ग्रामीण परिवारों में से 63 लाख 90 हजार 739 परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचा है। यह कुल परिवारों का 59.24 प्रतिशत है। यानी लगभग 44 लाख परिवार अब भी कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।मिशन की समयसीमा 2028 तक बढ़ाए जाने के बावजूद काम में तेजी लाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण परिवारों को समय पर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए परियोजनाओं को गति देना जरूरी है।
3200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित, परियोजनाओं पर असर
पेयजल परियोजनाओं की धीमी रफ्तार के पीछे संवेदकों का बकाया भुगतान भी बड़ी वजह बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, करीब 3200 करोड़ रुपये का भुगतान लगभग दो साल से लंबित है।भुगतान नहीं मिलने से निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की करीब 90 प्रतिशत पेयजल परियोजनाओं का काम ठप या प्रभावित है। बकाया राशि को लेकर संवेदक दो बार हड़ताल भी कर चुके हैं।हालांकि, हाल के महीनों में बजट जारी होना शुरू हुआ है। इसके बावजूद यह स्पष्ट होना बाकी है कि लंबित भुगतान और परियोजनाओं की स्थिति में कितनी सुधार हुआ है। काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए भुगतान व्यवस्था सुचारु करना अहम होगा।
रोजाना 10 हजार कनेक्शन का लक्ष्य, लेकिन कई जिलों में काम धीमा
अधिकारियों की बैठकों में मिशन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए रोजाना 10 हजार नल कनेक्शन जारी करने की बात कही गई। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंगलवार को 41 जिलों में एक भी नया कनेक्शन जारी नहीं हुआ।यह स्थिति निर्धारित लक्ष्य और जमीनी प्रगति के बीच अंतर को दिखाती है। यदि कनेक्शन जारी करने की गति नहीं बढ़ी, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को सुविधा मिलने में देरी हो सकती है।ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर लंबित परियोजनाओं को फिर से शुरू करना है। दूसरी ओर, जिन योजनाओं का काम चल रहा है, उन्हें समय पर पूरा करना भी जरूरी है।
उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा मुश्किल
उदयपुर जिले के पहाड़ी और वनाच्छादित इलाकों में जल जीवन मिशन को लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले के करीब 4.40 लाख परिवारों में से केवल 1.64 लाख परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचा है।दुर्गम पहाड़ियों और दूर-दराज की बस्तियों तक पाइपलाइन बिछाना आसान नहीं है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य में अधिक समय और संसाधनों की जरूरत पड़ती है।ऐसे क्षेत्रों में परियोजनाओं की योजना स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनानी होगी। साथ ही, पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्य पूरे होने के बाद नियमित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय औसत से पीछे राजस्थान
जल जीवन मिशन के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में नल कनेक्शन का औसत कवरेज 82.52 प्रतिशत बताया गया है। वहीं, राजस्थान में यह आंकड़ा 59.24 प्रतिशत है।दिए गए आंकड़ों में बिहार का कवरेज 95.7 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का 92.3 प्रतिशत बताया गया है। राजस्थान का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है।यह अंतर प्रदेश में परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की जरूरत को रेखांकित करता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के आंकड़ों की तुलना करते समय उनकी रिपोर्टिंग की तारीख और गणना के आधार को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
इन जिलों में जल जीवन मिशन की प्रगति बेहतर
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के कुछ जिलों में नल कनेक्शन का कवरेज अपेक्षाकृत बेहतर है।
- हनुमानगढ़: 90.97 प्रतिशत
- भीलवाड़ा: 89.75 प्रतिशत
- श्रीगंगानगर: 88.77 प्रतिशत
- पाली: 88.36 प्रतिशत
- डीडवाना-कुचामन: 85.04 प्रतिशत
- झालावाड़: 77.18 प्रतिशत
- करौली: 68.74 प्रतिशत
इन आंकड़ों से जिलों के बीच प्रगति में अंतर दिखाई देता है। कम कवरेज वाले क्षेत्रों में बाधाओं की पहचान कर कार्ययोजना बनाना जरूरी होगा। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव दूसरे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कमजोर मानसून और गिरता भूजल भी चुनौती
जल जीवन मिशन की सफलता केवल घरों तक पाइपलाइन बिछाने या नल लगाने से तय नहीं होगी। इसके लिए पानी के पर्याप्त स्रोत और नियमित आपूर्ति भी जरूरी हैं।पिछले दो वर्षों में बजट संबंधी समस्याओं से परियोजनाओं पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, कमजोर मानसूनी बारिश और कई जिलों में गिरता भूजल स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है।यदि जल स्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होगा, तो कनेक्शन होने के बावजूद परिवारों को नियमित आपूर्ति नहीं मिल पाएगी। इसलिए निर्माण कार्यों के साथ जल स्रोतों का संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आपूर्ति व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा।
2028 तक लक्ष्य पूरा करना बड़ी चुनौती
राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत लाखों परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचाना अभी बाकी है। लंबित भुगतान, निर्माण कार्यों की धीमी गति और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं लक्ष्य को प्रभावित कर सकती हैं।अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार बकाया भुगतान, बंद परियोजनाओं और नए कनेक्शनों की गति को लेकर क्या कदम उठाती है। ग्रामीण परिवारों को योजना का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब नल कनेक्शन के साथ नियमित और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति भी सुनिश्चित हो।