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ग्वालियर में बांग्लादेशी पासपोर्ट कांड: दान के नाम पर कमीशन लेने का आरोप, जांच में नए खुलासे

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कथित बांग्लादेशी पासपोर्ट कांड की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। मामले में डबरा के सिमरिया क्षेत्र से छह विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने में गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते की भूमिका की जांच की जा रही है। पूछताछ के अनुसार, उसे कथित तौर पर हर पासपोर्ट के बदले कमीशन मिलता था। यह रकम दान के रूप में दिए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी सरकारी दस्तावेज तैयार करने और पते के सत्यापन की प्रक्रिया में हुई संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल कर रही है।

हर फर्जी पासपोर्ट के बदले कमीशन मिलने का आरोप

ग्वालियर में सामने आए कथित बांग्लादेशी पासपोर्ट मामले में जांच का दायरा बढ़ रहा है। डबरा के सिमरिया क्षेत्र से छह लोगों के पासपोर्ट बनवाने के मामले में गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते की भूमिका सामने आई है।मिली जानकारी के अनुसार, पूछताछ में गुलाबराय को कथित तौर पर प्रत्येक पासपोर्ट के बदले कमीशन मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि घुसपैठियों का सरगना बताया जा रहा रियाल चौधरी यह रकम दान के नाम पर देता था।जांच एजेंसी इस कथित लेनदेन और आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। गुलाबराय के बैंक खातों की जांच से पैसों के लेनदेन से जुड़े तथ्यों का पता चल सकता है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

रियाल चौधरी पर जिम्मेदारी डालने का आरोप

पूछताछ के दौरान गुलाबराय ने कथित तौर पर रियाल चौधरी को पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार बताया है। उसका कहना है कि उसने भरोसे के आधार पर संबंधित लोगों के पक्ष में गवाही दी थी।हालांकि, जांच एजेंसी उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठा रही है। आरोप है कि उसे संबंधित लोगों की वास्तविक पहचान की जानकारी थी। इसके बावजूद उसने उनके दस्तावेज बनवाने में मदद की।अब जांच में गुलाबराय के बैंक खातों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों से संपर्क की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन तथ्यों से कथित नेटवर्क में उसकी भूमिका स्पष्ट हो सकती है।

चार दिन में सत्यापन और दस्तावेज तैयार होने पर सवाल

गुलाबराय के अनुसार, वह करीब पांच साल तक सिमरिया के आंबेडकर पार्क स्थित बौद्ध विहार का प्रमुख रहा था। इसी दौरान रियाल चौधरी अपने साथियों के साथ वहां आया था।आरोप है कि गुलाबराय और उसके सहयोगी गयाप्रसाद ने लिखित गवाही देकर संबंधित छह लोगों को सिमरिया टेकरी का पुराना निवासी बताया। इसके बाद उनके आधार कार्ड, मूल निवास और जन्म प्रमाण-पत्र तैयार किए गए।मामले में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि करीब 96 घंटे में दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। जांच का अहम पहलू यह है कि संबंधित अधिकारियों ने पहचान और निवास के दावों की पुष्टि किस आधार पर की।

ग्रामीणों को समझ नहीं आती थी संदिग्ध लोगों की भाषा

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सिमरिया टेकरी और आसपास के बौद्ध विहार में कुछ साल पहले कुछ अनजान लोग आकर ठहरे थे। स्थानीय ग्रामीण उनकी भाषा नहीं समझ पाते थे।ग्रामीणों को उन लोगों के मूल निवास और पहचान के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं थी। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वे लोग कौन थे और स्थानीय स्तर पर उनके रहने की व्यवस्था किसने की थी।यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित फर्जीवाड़े के लिए कोरोना काल के लॉकडाउन का समय चुना गया। हालांकि, इस संबंध में सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होना बाकी है।

पासपोर्ट केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव

कथित तौर पर बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट तैयार होने का मामला सामने आने के बाद पासपोर्ट सेवा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के कदम उठाए गए हैं।बताई गई नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को यूजर आईडी और पासवर्ड के साथ बायोमैट्रिक सत्यापन भी करना होगा। इससे सिस्टम तक पहुंच को अधिक सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।इसके अलावा, तीन मिनट तक सिस्टम पर काम नहीं होने पर स्वतः लॉगआउट होने की व्यवस्था की जानकारी दी गई है। आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी अतिरिक्त निगरानी की बात कही गई है।संदिग्ध पते की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों और थाना प्रभारियों के संपर्क नंबर दर्ज करने की व्यवस्था भी बताई गई है। इन बदलावों का उद्देश्य दस्तावेजों के सत्यापन में संभावित गड़बड़ियों को रोकना है।

दस्तावेज सत्यापन में लापरवाही की जांच जरूरी

इस मामले में केवल कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका ही नहीं, बल्कि सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में है।यदि दस्तावेज निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किए गए, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर चूक का मामला हो सकता है। हालांकि, किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष जरूरी होंगे।फिलहाल, बैंक खातों, लिखित गवाहियों, पहचान संबंधी दस्तावेजों और सत्यापन रिकॉर्ड की जांच से मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

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Stv News Rajasthan

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