अलवर के डॉ. संसार राज मीणा दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों में शामिल, इटली में कर रहे शोध
अलवर के अंबेडकर नगर निवासी डॉ. संसार राज मीणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल की है। उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सवियर की ओर से जारी दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। वे इटली में रहकर भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम का आकलन करने पर शोध कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि से अलवर और राजस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आया है।
इंजीनियरिंग और जियोमैटिक्स में बनाई पहचान
डॉ. संसार राज मीणा को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका और एल्सवियर की ओर से जारी दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिलने की जानकारी दी गई है। वे इंजीनियरिंग के अंतर्गत जियोलॉजिकल एंड जियोमैटिक्स इंजीनियरिंग क्षेत्र में शोध कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस उपक्षेत्र में उनकी वैश्विक रैंक 1606 बताई गई है।डॉ. मीणा का शोध भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित है। इन तकनीकों की मदद से भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम का आकलन किया जाता है। उनका काम आपदाओं की पहचान, निगरानी और पूर्वानुमान से जुड़ी तकनीकों को बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है।
इटली में वैज्ञानिक, करोड़ों की रिसर्च परियोजना का नेतृत्व
डॉ. संसार राज मीणा वर्तमान में इटली के ट्रिएस्टे शहर स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान एवं प्रायोगिक भूभौतिकी संस्थान में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा, वे यूनिवर्सिटी ऑफ पाडोवा से बाहरी शोधकर्ता और अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से विजिटिंग रिसर्चर के रूप में भी जुड़े हैं।उनकी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि इटली की एफआईएस योजना के तहत शोध परियोजना हासिल करना है। जानकारी के अनुसार, उनकी ‘NATURA’ परियोजना को करीब 14 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इस परियोजना में वे मुख्य अन्वेषक यानी प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर की भूमिका निभा रहे हैं।यह परियोजना उनके शोध कार्य और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को दर्शाती है। प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को समझने और उनका आकलन करने के लिए ऐसे शोध उपयोगी साबित हो सकते हैं।
दौसा के गांव से शुरू हुआ सफर
डॉ. संसार राज मीणा मूल रूप से दौसा जिले के मंडावर गांव के निवासी हैं। उनका परिवार बाद में अलवर आकर बस गया। उनकी शुरुआती पढ़ाई अलवर में हुई। इसके बाद उन्होंने सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ और सिल्वर ओक स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से भूगोल में स्नातक किया। इसके बाद छात्रवृत्ति के माध्यम से नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे से जीआईएस और रिमोट सेंसिंग में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की।उनकी शैक्षणिक यात्रा में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अध्ययन और शोध के अवसर महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने अपनी विशेषज्ञता को आगे बढ़ाते हुए भू-सूचना विज्ञान और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े शोध के क्षेत्र में पहचान बनाई।
विदेश में छात्रवृत्ति ने बदली करियर की दिशा
डॉ. मीणा ने भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के माध्यम से ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ साल्जबर्ग से जियोइन्फॉर्मेटिक्स में पीएचडी की। उनके अनुसार, इस छात्रवृत्ति ने उनके जीवन की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।पीएचडी पूरी करने के बाद उन्होंने इटली में पोस्टडॉक्टोरल शोध किया। इसके बाद वे विभिन्न शोध परियोजनाओं से जुड़े और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम का आकलन करने वाली तकनीकों पर काम जारी रखा।उनकी यात्रा बताती है कि उच्च शिक्षा, शोध के प्रति रुचि और उपलब्ध अवसरों का उपयोग करके विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना करियर बना सकते हैं। छात्रवृत्तियां उन विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती हैं, जिनके लिए विदेश में पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होता है।
युवाओं को दिया विज्ञान और शोध का संदेश
डॉ. संसार राज मीणा का मानना है कि युवाओं को करियर के विकल्पों पर व्यापक नजरिया रखना चाहिए। सरकारी नौकरी सफलता का एक रास्ता है, लेकिन विज्ञान और शोध के माध्यम से भी समाज और देश की सेवा की जा सकती है।उनका कहना है कि गांवों और छोटे शहरों से आने वाले विद्यार्थी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक बन सकते हैं। इसके लिए विषय में रुचि, लगातार मेहनत और सही अवसरों का लाभ उठाना जरूरी है।डॉ. मीणा की उपलब्धि अलवर के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। उनका शैक्षणिक सफर यह संदेश देता है कि विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भौगोलिक पृष्ठभूमि अपने आप में बाधा नहीं है।