जयपुर: 25 करोड़ का खासा कोठी फ्लाईओवर सवालों के घेरे में, नीचे सड़कों पर रोज जाम
जयपुर के खासा कोठी फ्लाईओवर की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से बने इस फ्लाईओवर के बावजूद आसपास की सड़कों पर जाम की समस्या बनी हुई है। आरोप हैं कि निर्माण के दौरान अलाइनमेंट में बदलाव के कारण इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। वहीं, जयपुर में पहले करीब 170 करोड़ रुपये की लागत वाले बीआरटीएस कॉरिडोर को भी हटाया जा चुका है। ऐसे में फ्लाईओवर की योजना, यातायात दबाव और सार्वजनिक धन के उपयोग की समीक्षा की मांग उठ रही है।
25 करोड़ खर्च होने के बावजूद जाम से राहत नहीं
जयपुर के खासा कोठी फ्लाईओवर को यातायात सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। लेकिन इसकी उपयोगिता को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्लाईओवर पर अपेक्षाकृत कम वाहन गुजरते हैं, जबकि आसपास की सड़कों पर रोजाना जाम लगता है। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।खासकर एमआई रोड से कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात दबाव का मुद्दा उठाया गया है। सवाल यह है कि क्या निर्माण से पहले वाहनों की संख्या और उनके आवागमन की दिशा का पर्याप्त आकलन किया गया था? यदि फ्लाईओवर से अपेक्षित राहत नहीं मिली, तो इसके कारणों की जांच जरूरी है।
अलाइनमेंट बदलने को लेकर उठे सवाल
खासा कोठी फ्लाईओवर के निर्माण से जुड़ी योजना और उसके अलाइनमेंट को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2002 में एमआई रोड से बनीपार्क की दिशा में अलाइनमेंट प्रस्तावित होने की बात कही गई थी। बाद में 2005-06 के दौरान इसमें बदलाव किए जाने का दावा किया गया है।हालांकि, अलाइनमेंट बदलने के कारणों और उससे जुड़े निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सामने आए बिना किसी व्यक्ति या संस्था पर अनियमितता का आरोप साबित नहीं माना जा सकता। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों, स्वीकृत नक्शों और तकनीकी रिपोर्ट की समीक्षा महत्वपूर्ण है। इससे पता चल सकेगा कि बदलाव किन परिस्थितियों में किया गया और क्या वह उस समय की यातायात जरूरतों के अनुरूप था।
एमआई रोड से कलेक्ट्रेट तक यातायात अध्ययन की मांग
खासा कोठी क्षेत्र में जाम की समस्या का समाधान खोजने के लिए विस्तृत यातायात अध्ययन कराने की जरूरत बताई जा रही है। इसमें एमआई रोड, बनीपार्क, खासा कोठी, स्टेशन रोड, पोलोविक्ट्री और कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या का आकलन किया जा सकता है।इसके अलावा, दिन के अलग-अलग समय में यातायात दबाव, वाहनों की दिशा और जाम लगने वाले प्रमुख स्थानों का अध्ययन भी जरूरी है। जयपुर विकास प्राधिकरण संबंधित तकनीकी रिकॉर्ड और मौजूदा यातायात स्थिति की समीक्षा कर सकता है। वर्ष 2002 में प्रस्तावित अलाइनमेंट और बाद में अपनाए गए विकल्प की तुलना सार्वजनिक होने से परियोजना के निर्णयों को समझने में मदद मिलेगी।
170 करोड़ के बीआरटीएस कॉरिडोर को भी हटाया गया
जयपुर में यातायात योजना को लेकर बीआरटीएस कॉरिडोर का उदाहरण भी सामने रखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से बने इस कॉरिडोर को हटाने की कार्रवाई की गई थी। इसके लिए न्यू सांगानेर रोड, अजमेर रोड और सीकर रोड पर भी काम किया गया।रिपोर्ट में कॉरिडोर हटाने पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है। यह उदाहरण सार्वजनिक परियोजनाओं की योजना, उपयोगिता और बाद में होने वाले बदलावों पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने की लागत और प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों की आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि जरूरी है। खासा कोठी फ्लाईओवर के मामले में भी तकनीकी समीक्षा के आधार पर निर्णय लेने की मांग की जा रही है।
जनता के पैसे और जवाबदेही का मुद्दा
खासा कोठी फ्लाईओवर को लेकर उठ रहे सवाल केवल जाम तक सीमित नहीं हैं। यह मामला सार्वजनिक धन के उपयोग और निर्माण योजनाओं की जवाबदेही से भी जुड़ा है। यदि किसी परियोजना से अपेक्षित यातायात लाभ नहीं मिल रहा, तो उसके कारणों को स्पष्ट करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।अलाइनमेंट में बदलाव हुआ तो उसका आधार क्या था? निर्माण से पहले यातायात का कितना अध्ययन किया गया? वर्तमान में फ्लाईओवर का कितना उपयोग हो रहा है? इन सवालों के जवाब तकनीकी दस्तावेजों और स्वतंत्र अध्ययन से सामने आ सकते हैं। किसी भी ढांचे को तोड़ने या नया फ्लाईओवर बनाने का फैसला करने से पहले लागत, सुरक्षा और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था का आकलन आवश्यक होगा।
अब क्या हो सकता है समाधान?
खासा कोठी क्षेत्र में जाम से राहत के लिए सबसे पहले मौजूदा यातायात व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा जरूरी है। विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि समस्या फ्लाईओवर के अलाइनमेंट, सड़क की क्षमता, चौराहों की बनावट या वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण है।इसके आधार पर ट्रैफिक सिग्नल में बदलाव, सड़क सुधार, पार्किंग व्यवस्था और वैकल्पिक मार्गों जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है। यदि अध्ययन में फ्लाईओवर की संरचना या मौजूदा योजना में गंभीर कमी सामने आती है, तो आगे की कार्रवाई तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर होनी चाहिए। फिलहाल, खासा कोठी फ्लाईओवर की उपयोगिता और आसपास लगने वाले जाम का मुद्दा जयपुर की यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।