जोधपुर आयुर्वेद विश्वविद्यालय का असिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार, छात्राओं ने लगाए आपत्तिजनक मैसेज और धमकी के आरोप
राजस्थान के जोधपुर स्थित आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छात्राओं से कथित छेड़छाड़ और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश भेजने के मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर अजीत सिंह चारण को गिरफ्तार किया गया है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि आरोपी उन पर निजी संबंध बनाने का दबाव डालता था। उन्होंने यह भी शिकायत की कि बात नहीं करने पर फेल करने की धमकी दी जाती थी। पुलिस ने मामला दर्ज होने के करीब 18 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का फैसला लिया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
छात्राओं की शिकायत पर असिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार
जोधपुर के करवड़ स्थित आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छात्राओं की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर की पहचान अजीत सिंह चारण के रूप में हुई है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि वह व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के जरिए आपत्तिजनक संदेश भेजकर उन्हें परेशान करता था। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी उनसे बात करने और दोस्ती करने के लिए दबाव डालता था। मना करने पर पढ़ाई में नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
सीकर जिले के लोसल का रहने वाला है आरोपी
पुलिस के अनुसार, अजीत सिंह चारण सीकर जिले के लोसल का निवासी है। वह आयुर्वेद विश्वविद्यालय के शरीर रचना विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था। करवड़ थाना पुलिस ने छात्राओं की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया। इसके बाद आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस अब शिकायत में बताए गए घटनाक्रम, सोशल मीडिया संदेशों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। छात्राओं की ओर से दिए गए चैट रिकॉर्ड भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस ने 18 घंटे के भीतर की कार्रवाई
मामले की जांच और गिरफ्तारी के लिए जोधपुर पूर्व के पुलिस उपायुक्त मनीष कुमार चौधरी के निर्देशन में टीम बनाई गई। थानाधिकारी परमेश्वरी के नेतृत्व में पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। इस दौरान पुलिस को उसके मंडोर थाना क्षेत्र में मौजूद होने की सूचना मिली। इसके बाद टीम ने बताए गए स्थान पर दबिश दी और आरोपी को पकड़ लिया। रिपोर्ट के अनुसार, मामला दर्ज होने के करीब 18 घंटे के भीतर गिरफ्तारी की गई। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
शिकायत लेकर कुलगुरु कार्यालय पहुंचीं छात्राएं
इस मामले को लेकर शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई थी। छात्राएं शिकायत लेकर कुलगुरु कार्यालय पहुंचीं और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान एक छात्रा की तबीयत बिगड़ने की जानकारी भी सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलगुरु डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला ने छात्राओं से बातचीत की और उनकी शिकायत सुनी। छात्राओं ने आरोपी के व्यवहार और कथित आपत्तिजनक संदेशों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया और मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की।
विश्वविद्यालय ने आरोपी को बर्खास्त करने का लिया फैसला
छात्राओं की शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने असिस्टेंट प्रोफेसर अजीत सिंह चारण को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का फैसला लिया। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी भी बनाई। कुलगुरु की ओर से कहा गया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अनुशंसा की जाएगी। विश्वविद्यालय की कार्रवाई और पुलिस जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। पुलिस आपराधिक शिकायत से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है, जबकि विश्वविद्यालय की कमेटी संस्थान के स्तर पर मामले की पड़ताल करेगी। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और संबंधित नियमों के अनुसार होगी।
निजी संबंध बनाने और फेल करने की धमकी देने का आरोप
छात्राओं ने शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी उन पर निजी संबंध बनाने का दबाव डालता था। उनके अनुसार, वह कमरे पर आने और दोस्ती करने के लिए कहता था। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि टॉपर बनने के लिए उसकी बात मानने का दबाव बनाया जाता था। इसके अलावा, पहनावे और शारीरिक बनावट को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने की शिकायत भी की गई है। छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कुछ व्हाट्सऐप चैट भी उपलब्ध कराई हैं। इन आरोपों की जांच पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन कर रहे हैं। फिलहाल, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्षों से अलग समझना जरूरी है।
अब पुलिस जांच और विश्वविद्यालय की रिपोर्ट पर नजर
इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और विश्वविद्यालय की कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। जांच में सोशल मीडिया संदेशों, छात्राओं के बयानों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई का आधार भी जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगा। छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब यह देखना होगा कि जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं और संबंधित अधिकारी आगे क्या कदम उठाते हैं।