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Jaipur News: सोना-चांदी आयात पर IGST छूट खत्म, ज्वैलर्स की बढ़ सकती है मुश्किल

जयपुर। सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर मिलने वाली एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) की छूट समाप्त होने से बुलियन कारोबार और ज्वैलरी उद्योग पर असर पड़ सकता है। अब इन धातुओं के आयात पर 3 प्रतिशत IGST देना होगा। इससे बैंकों और अधिकृत एजेंसियों के साथ-साथ उनसे आयातित सोना-चांदी खरीदने वाले बुलियन डीलरों की कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ सकती है। जयपुर के ज्वैलरी कारोबारियों का कहना है कि इसका असर सप्लाई चेन और कारोबार में लगने वाली पूंजी पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोने-चांदी की कीमत सीधे 3 प्रतिशत बढ़ जाएगी।

1 अप्रैल से लागू हुई नई व्यवस्था

सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर मिलने वाली IGST छूट को आगे नहीं बढ़ाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह छूट 31 मार्च के बाद समाप्त हो गई और नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू हुई। जीएसटी परिषद की बैठक में गुरुवार को इस बदलाव की जानकारी दी गई।राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार, सरकार ने छूट को आगे जारी नहीं रखने का फैसला किया है। इससे आयात के समय संबंधित संस्थाओं को अतिरिक्त कर चुकाना होगा। पहले इन धातुओं के आयात पर IGST से राहत मिलती थी। सोने के लिए यह व्यवस्था वर्ष 2017 में शुरू हुई थी। बाद में इसे चांदी और प्लैटिनम तक भी बढ़ाया गया।

सरकार ने क्यों खत्म की IGST छूट?

सरकार का तर्क है कि आयात के अलग-अलग माध्यमों के बीच कर व्यवस्था में समानता होनी चाहिए। किसी एक माध्यम को कर के लिहाज से अतिरिक्त लाभ नहीं मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से आयात पर मिलने वाली IGST छूट को आगे नहीं बढ़ाया गया।इस बदलाव से आयातकों को माल मंगाते समय पहले की तुलना में अधिक रकम खर्च करनी पड़ेगी। हालांकि, अंतिम लागत पर असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कारोबार में इनपुट टैक्स क्रेडिट कब और किस तरह उपलब्ध होता है।

बुलियन डीलरों पर कैसे पड़ेगा असर?

जयपुर ज्वैलर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नीरज लूणावत के अनुसार, बैंक या अधिकृत एजेंसी से आयातित सोना-चांदी खरीदने वाले बुलियन डीलरों को सप्लाई चेन में अतिरिक्त कर का भुगतान करना पड़ेगा।लूणावत का कहना है कि इससे सोने-चांदी की कीमत सीधे 3 प्रतिशत बढ़ना जरूरी नहीं है। लेकिन IGST का इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने तक कारोबारियों की पूंजी फंसी रह सकती है। इससे खास तौर पर उन कारोबारियों पर दबाव बढ़ सकता है, जिन्हें नियमित रूप से बड़ी मात्रा में बुलियन खरीदना पड़ता है।

त्योहारी और शादी के सीजन में बढ़ सकती है चुनौती

जेम्स-ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के रीजनल मेंबर डॉ. संजय जोशी के अनुसार, नवरात्र से दिवाली तक त्योहारी सीजन और इसके बाद शादी-विवाह के मौसम में सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है।ऐसे समय में ज्वैलर्स को ग्राहकों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक रखना पड़ता है। यदि आयातित बुलियन खरीदने में अतिरिक्त पूंजी लगती है या टैक्स क्रेडिट मिलने में समय लगता है, तो कारोबारियों के पास उपलब्ध नकदी पर दबाव बढ़ सकता है।इसका असर छोटे ज्वैलर्स पर ज्यादा महसूस हो सकता है, क्योंकि उनके पास बड़े कारोबारियों की तुलना में पूंजी के विकल्प सीमित हो सकते हैं। हालांकि, वास्तविक असर कारोबार की प्रकृति और टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

भारत के सोना-चांदी बाजार पर क्यों अहम है फैसला?

भारत दुनिया के प्रमुख सोना-चांदी बाजारों में शामिल है और घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। देश में सोने का आयात निर्धारित व्यवस्था के तहत होता है। बैंक और अधिकृत एजेंसियां इसकी आपूर्ति के प्रमुख माध्यम हैं।पात्र ज्वैलर्स इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के जरिए भी आयात कर सकते हैं। ऐसे में आयात पर कर व्यवस्था में बदलाव का असर बुलियन कारोबार से जुड़े विभिन्न पक्षों पर पड़ सकता है।

क्या ग्राहकों के लिए महंगा होगा सोना-चांदी?

IGST छूट समाप्त होने के बाद ग्राहकों के मन में सोना-चांदी महंगा होने का सवाल उठ सकता है। लेकिन आयात पर 3 प्रतिशत IGST लगने का अर्थ यह नहीं है कि खुदरा कीमतें भी सीधे 3 प्रतिशत बढ़ जाएंगी।कीमतों पर असर आयात लागत, टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता, कारोबारियों की पूंजी जरूरत और बाजार की अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इस बदलाव को कारोबार की लागत और नकदी प्रबंधन पर पड़ने वाले संभावित असर के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।

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Stv News Rajasthan

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