बाबूलाल कटारा को 60 दिन की अंतरिम जमानत नहीं, बेटे की शादी में पुलिस अभिरक्षा में होंगे शामिल
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा को बेटे की शादी के लिए 60 दिन की अंतरिम जमानत नहीं मिली है। जयपुर की सीबीआई कोर्ट और ईडी कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि, इन दोनों अदालतों ने उन्हें 9 से 13 दिसंबर तक पुलिस अभिरक्षा में विवाह से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति दी है। दूसरी ओर, जयपुर महानगर द्वितीय की एडीजे कोर्ट ने भी पेपरलीक से जुड़े तीन मामलों में उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इस अदालत ने विवाह समारोह में शामिल होने की अनुमति भी नहीं दी।
बेटे की शादी के लिए मांगी थी 60 दिन की अंतरिम जमानत
बाबूलाल कटारा के वकील भानुप्रकाश शर्मा ने अदालत में दलील दी कि उनके बेटे दीपेश की शादी 12 दिसंबर को निर्धारित है। उन्होंने कहा कि दीपेश परिवार का इकलौता बेटा है और विवाह से जुड़ी धार्मिक रस्में निभाना बाबूलाल कटारा की जिम्मेदारी है। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने 60 दिन की अंतरिम जमानत देने की मांग की थी।
सीबीआई और ईडी ने किया जमानत का विरोध
वरिष्ठ अध्यापक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा-2022 के पेपरलीक से जुड़े मामलों में सीबीआई कोर्ट और ईडी कोर्ट में सुनवाई हुई। सीबीआई कोर्ट में एसओजी के विशिष्ट लोक अभियोजक बीएस चौहान ने अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया। ईडी ने भी कटारा को जमानत देने का विरोध किया।अदालतों ने 60 दिन की अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, सीबीआई कोर्ट और ईडी कोर्ट ने 9 से 13 दिसंबर तक पुलिस अभिरक्षा में विवाह संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति दी।
एडीजे कोर्ट ने भी राहत देने से किया इनकार
जयपुर महानगर द्वितीय की एडीजे कोर्ट में भी बाबूलाल कटारा के खिलाफ पेपरलीक से जुड़े तीन मामले लंबित हैं। इनमें एसआई भर्ती परीक्षा-2020, स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2022 और कृषि व्याख्याता भर्ती परीक्षा से संबंधित मामले शामिल हैं।इन मामलों में भी कटारा ने बेटे की शादी का हवाला देते हुए 60 दिन की अंतरिम जमानत मांगी थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। इस अदालत ने उन्हें विवाह समारोह में शामिल होने की अनुमति भी नहीं दी।
पेपरलीक और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में न्यायिक अभिरक्षा
बाबूलाल कटारा वरिष्ठ अध्यापक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा के पेपरलीक प्रकरण और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज मामले में न्यायिक अभिरक्षा में हैं। उनके खिलाफ अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामले भी लंबित हैं।अंतरिम जमानत याचिकाओं पर आए इन फैसलों के बाद अब विवाह कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर दोनों अदालतों के आदेशों में अंतर स्पष्ट है। सीबीआई और ईडी कोर्ट ने सीमित अवधि के लिए पुलिस अभिरक्षा में शामिल होने की अनुमति दी है, जबकि एडीजे कोर्ट ने ऐसी राहत नहीं दी।