राजस्थान: दौसा के बाजरे की गुजरात में बढ़ी मांग, 5 से 6 अरब रुपये के कारोबार का अनुमान
दौसा। राजस्थान के दौसा जिले का बाजरा अपनी गुणवत्ता, मोटे दाने, चमक और स्वाद के कारण गुजरात समेत कई राज्यों के बाजारों में पहचान बना रहा है। इस बार जिले में बाजरे की बंपर पैदावार के बीच कारोबार 5 से 6 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। मंडियों में रोजाना 30 से 35 हजार कट्टों की आवक हो रही है। व्यापारियों के अनुसार, गुजरात और पंजाब के अलावा दक्षिण भारत के बाजारों में भी दौसा के बाजरे की मांग है। स्थानीय किसानों के मुताबिक, वे बाजरे की खेती में कीटनाशकों का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं, जबकि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग भी सीमित रखते हैं।
गुजरात में क्यों पसंद किया जा रहा दौसा का बाजरा?
दौसा के बाजरे की पहचान उसके मोटे दाने, चमक और स्वाद से जुड़ी है। व्यापारियों के अनुसार, यहां के बाजरे का दाना अन्य क्षेत्रों के मुकाबले मोटा और चमकदार होता है। इसका स्वाद भी अपेक्षाकृत मीठा बताया जाता है।इन्हीं विशेषताओं के कारण गुजरात के व्यापारी दौसा की मंडियों से बाजरा खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और दूसरे राज्यों में भी इसकी आपूर्ति की जा रही है। इस बार समय-समय पर हुई बारिश से फसल को फायदा मिलने की बात भी सामने आई है।
मंडियों में रोजाना 30 से 35 हजार कट्टों की आवक
इन दिनों दौसा कृषि उपज मंडी में बाजरे की अच्छी आवक हो रही है। बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, दौसा मंडी में प्रतिदिन औसतन 30 से 35 हजार कट्टे बाजरा आ रहा है।लालसोट, बांदीकुई, मंडावरी और रामगढ़ पचवारा सहित जिले की अन्य मंडियों में भी बाजरे की आवक जारी है। कुछ क्षेत्रों में कटाई का काम अंतिम चरण में है। ऐसे में आने वाले दिनों में मंडियों में आवक और कारोबार की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
कीटनाशकों का कम इस्तेमाल, खेती के तरीके पर चर्चा
दौसा जिले के कई किसान बाजरे की खेती में रासायनिक उर्वरकों का सीमित इस्तेमाल करने की बात कहते हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, फसल में कीटनाशकों का उपयोग भी बहुत कम किया जाता है।हालांकि, पूरे जिले के बाजरे को कीटनाशक-मुक्त या जैविक कहना उचित नहीं होगा। इसके लिए खेती के तरीकों और उपज की प्रमाणित जांच जरूरी है। फिर भी कम रासायनिक इनपुट का दावा स्थानीय बाजरे की खेती को लेकर चर्चा का एक पहलू है।
5 से 6 अरब रुपये के कारोबार का गणित
इस बार दौसा जिले में बाजरे का कुल रकबा करीब 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर बताया गया है। औसतन 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के हिसाब से कुल पैदावार लगभग 24 लाख क्विंटल बैठती है।यदि औसत भाव 2,100 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल माना जाए, तो कुल उपज का अनुमानित मूल्य करीब 504 से 600 करोड़ रुपये यानी 5.04 से 6 अरब रुपये बनता है। यह अनुमानित सकल मूल्य है। वास्तविक कारोबार मंडियों के भाव, बिक्री और अंतिम उत्पादन के आधार पर अलग हो सकता है।
गुजरात से दक्षिण भारत तक भेजा जा रहा बाजरा
व्यापारियों के अनुसार, बांदीकुई मंडी से बाजरा पंजाब, हरियाणा और गुजरात सहित कई राज्यों में भेजा जा रहा है। इसके अलावा तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिण भारतीय बाजारों में भी इसकी आपूर्ति की जा रही है।बांदीकुई मंडी के व्यापारी राजेंद्र विजय के मुताबिक, दक्षिण भारत के लिए बाजरे की खेप हिंडौन से रेल के जरिए भेजने की योजना है। इससे लंबी दूरी तक उपज पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
पशु आहार से लेकर बिस्किट तक में उपयोग
दौसा के बाजरे का उपयोग केवल घरेलू भोजन तक सीमित नहीं है। व्यापारी अमित माचीवाल के अनुसार, पंजाब में पशु आहार और मुर्गी दाने के लिए भी बाजरा भेजा जाता है। वहीं, गुजरात और तमिलनाडु जैसे बाजारों में खाने के लिए इसकी मांग है।बाजरे से बिस्किट, सेरेलेक और दूसरे खाद्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं। पोषण संबंधी विशेषताओं और अलग-अलग खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल के कारण बाजरे की मांग कई क्षेत्रों में बनी हुई है।
बाजरा क्यों माना जाता है पौष्टिक अनाज?
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. शंभूदयाल शर्मा के अनुसार, बाजरे में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। फाइबर की मौजूदगी पाचन के लिए उपयोगी हो सकती है। बाजरा प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त अनाज भी है।सर्दियों में बाजरे की रोटी, खिचड़ी और अन्य व्यंजन खास तौर पर पसंद किए जाते हैं। स्वाद, पोषण और अलग-अलग खाद्य उत्पादों में उपयोग के कारण बाजरा अब ग्रामीण बाजारों के साथ शहरी उपभोक्ताओं के बीच भी लोकप्रिय हो रहा है।
इस बार किसानों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद
बंपर आवक और दूसरे राज्यों से मिल रही मांग के बीच दौसा के किसानों और व्यापारियों को इस बार अच्छे कारोबार की उम्मीद है। हालांकि, किसानों की वास्तविक कमाई मंडी भाव, उत्पादन लागत, गुणवत्ता और बिक्री पर निर्भर करेगी।यदि मांग और भाव बने रहते हैं, तो जिले के बाजरा उत्पादकों को इसका लाभ मिल सकता है। इस सीजन में दौसा का बाजरा गुजरात और अन्य राज्यों के बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करता दिखाई दे रहा है।