राजस्थान कांग्रेस में बड़ी एंट्री, पंचायत चुनाव से पहले गोपाल गुर्जर और नेम सिंह फौजदार की ‘घर वापसी’
जयपुर/भरतपुर। राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में दो नेताओं को पार्टी में शामिल किया है। भरतपुर के नेम सिंह फौजदार और गोपाल गुर्जर ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। दोनों नेताओं को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पार्टी में शामिल कराया।दोनों नेताओं की कांग्रेस में वापसी ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। कांग्रेस ने हाल में पंचायत चुनाव की तैयारियों के लिए संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया है। डोटासरा और जूली भी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने की अपील कर चुके हैं।
गोपाल गुर्जर की कांग्रेस में वापसी
गोपाल गुर्जर की कांग्रेस में वापसी को उनके पुराने राजनीतिक सफर से जोड़कर देखा जा रहा है। वह पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2020 में वे मालपुरा पंचायत समिति के वार्ड-9 से सदस्य निर्वाचित हुए थे।इसके बाद उन्होंने वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव मालपुरा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा। चुनाव में उन्हें करीब 47,765 वोट मिले। वे तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा के कन्हैयालाल विजयी हुए, जबकि कांग्रेस के घासी लाल चौधरी दूसरे स्थान पर रहे।कुछ चुनावी स्रोतों में गोपाल गुर्जर के वोटों की संख्या 48,184 भी दर्ज है। यह अंतर अलग-अलग डेटा स्रोतों के संकलन से जुड़ा है।
निर्दलीय चुनाव लड़ने का मिला था फायदा-नुकसान का राजनीतिक संदेश
मालपुरा विधानसभा चुनाव में गोपाल गुर्जर के निर्दलीय उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। उन्हें मिले करीब 48 हजार वोट कांग्रेस उम्मीदवार के वोटों से काफी कम, लेकिन महत्वपूर्ण संख्या में थे।अब कांग्रेस में उनकी वापसी के बाद मालपुरा क्षेत्र में पार्टी के स्थानीय समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है। हालांकि इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव पंचायत चुनाव और आगे के राजनीतिक घटनाक्रम में ही स्पष्ट होगा।
नेम सिंह फौजदार की भी कांग्रेस में वापसी
नेम सिंह फौजदार पूर्वी राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। खासतौर पर भरतपुर, डीग और आसपास के क्षेत्रों में जाट आरक्षण से जुड़े आंदोलनों के कारण उनकी पहचान बनी।फौजदार अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। वे कांग्रेस और भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक मंचों से भी चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे भरतपुर जिला परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं।
किसान और जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़ा चेहरा
नेम सिंह फौजदार को किसान और जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े नेता के रूप में भी जाना जाता है। पूर्वी राजस्थान में जाटों को केंद्र की OBC सूची में आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर वे लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं।उनकी राजनीतिक सक्रियता का प्रभाव मुख्य रूप से भरतपुर, डीग और धौलपुर क्षेत्र में दिखाई देता रहा है। ऐसे में कांग्रेस में उनकी वापसी को पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस का संगठन मजबूत करने पर जोर
राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस ने संगठन को बूथ और गांव स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति अपनाई है। हाल की बैठकों में पार्टी नेताओं ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनाव की तैयारी करने का संदेश दिया है।ऐसे में नए नेताओं की एंट्री को कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय राजनीतिक समीकरण कई स्तरों पर बदलते रहे हैं।
भरतपुर-डीग की राजनीति में बढ़ सकती है चर्चा
नेम सिंह फौजदार की कांग्रेस में वापसी का असर भरतपुर और डीग क्षेत्र की राजनीति में देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में पंचायत चुनाव के दौरान स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।वहीं गोपाल गुर्जर की वापसी मालपुरा-टोंक क्षेत्र से जुड़ी है। ऐसे में दोनों नेताओं की वापसी का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय संगठन और चुनावी राजनीति के स्तर पर देखा जाएगा।
विश्वेंद्र सिंह प्रकरण के बीच भी बढ़ी सियासी चर्चा
कांग्रेस में इन नेताओं की एंट्री ऐसे समय हुई है, जब पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़ने के बाद भरतपुर क्षेत्र की राजनीति में चर्चा तेज है। विश्वेंद्र सिंह ने हाल में कांग्रेस से अलग होने का ऐलान किया था। पार्टी ने इससे पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।ऐसे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नए नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी के लिए संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इसका चुनावी असर अभी तय नहीं माना जा सकता।
अब पंचायत चुनाव में भूमिका पर नजर
गोपाल गुर्जर और नेम सिंह फौजदार की कांग्रेस में वापसी के बाद अब दोनों नेताओं की पंचायत चुनाव में भूमिका पर नजर रहेगी। पार्टी उन्हें किस तरह संगठनात्मक जिम्मेदारी देती है और स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता कैसी रहती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।फिलहाल कांग्रेस पंचायत चुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। दोनों नेताओं की वापसी इसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।