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अलवर में बाल विवाह रोकथाम को लेकर कार्यशाला, PLV को दिए जागरूकता के टिप्स

अलवर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और शिव शिक्षा समिति के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को प्रतापगढ़ ऑडिटोरियम में एकदिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी मुख्य अतिथि रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मोहनलाल सोनी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यशाला में नालसा आशा योजना 2025 और नालसा शिक्षा योजना 2026 सहित विभिन्न कानूनी और सामाजिक विषयों पर जानकारी दी गई। साथ ही बाल विवाह रोकथाम के लिए जिला स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने और पैरा लीगल वालंटियर्स की भूमिका को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।

प्रतापगढ़ ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

अलवर के प्रतापगढ़ ऑडिटोरियम में आयोजित इस एकदिवसीय कार्यक्रम में कानूनी जागरूकता और सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य पैरा लीगल वालंटियर्स को उनके दायित्वों और जमीनी स्तर पर कानूनी जागरूकता बढ़ाने के तरीकों की जानकारी देना रहा।कार्यक्रम में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों तक कानूनी जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।

जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी रहे मुख्य अतिथि

कार्यक्रम में जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मोहनलाल सोनी विशिष्ट अतिथि रहे।अधिकारियों ने प्रतिभागियों को विभिन्न कानूनी योजनाओं और सामाजिक मुद्दों से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में पैरा लीगल वालंटियर्स की भूमिका पर जोर दिया गया।

नालसा आशा और शिक्षा योजना की दी जानकारी

कार्यशाला के दौरान नालसा आशा योजना 2025 और नालसा शिक्षा योजना 2026 सहित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।प्रतिभागियों को योजनाओं के उद्देश्य, जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाने और जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी बनाने के तरीकों से अवगत कराया गया।इसके अलावा सामाजिक और कानूनी समस्याओं के समाधान में सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

बाल विवाह रोकथाम के लिए कार्ययोजना पर प्रशिक्षण

कार्यशाला का प्रमुख विषय जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर जिला बाल विवाह कार्ययोजना तैयार करना रहा।नई दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पारित निर्णय के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने को लेकर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की पहचान, रोकथाम और संबंधित विभागों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।

पैरा लीगल वालंटियर्स की भूमिका पर जोर

कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर्स को उनके दायित्वों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों के बीच कानूनी जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी देने के साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया गया।

सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भूमिका की अपील

अधिकारियों ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।कार्यक्रम में कहा गया कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए परिवार, समाज, स्वयंसेवी संगठन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। समय रहते जानकारी मिलने और हस्तक्षेप से बाल विवाह को रोका जा सकता है।

प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर की चर्चा

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने कानूनी और सामाजिक विषयों से जुड़ी जानकारी हासिल की। विभिन्न गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा हुई।कार्यक्रम के अंत में कानूनी जागरूकता को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा बाल विवाह रोकथाम से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

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Stv News Rajasthan

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