राजस्थान में रोज 9500 टन खाना बर्बाद, जयपुर सबसे आगे; जानिए शहरवार आंकड़े
राजस्थान में हर दिन करीब 9,490 मीट्रिक टन यानी लगभग 9,500 टन भोजन बर्बाद होने का दावा किया गया है। शादी, पार्टी और बड़े आयोजनों में भोजन की बर्बादी ज्यादा होने की बात सामने आई है। वहीं देश में करोड़ों लोग अल्पपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं। प्रदेश के प्रमुख शहरों में जयपुर में रोजाना करीब 110 टन भोजन बर्बाद होने का आंकड़ा दिया गया है। इसके बाद जोधपुर 75 टन, कोटा 60 टन, उदयपुर 50 टन और अजमेर 45 टन के साथ सूची में हैं। खेत से लेकर बाजार और घर तक खाद्य सामग्री के खराब होने से भी बड़ी मात्रा में नुकसान होता है।
राजस्थान में रोज 9,490 टन भोजन बर्बादी का दावा
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में रोज करीब 9,490 मीट्रिक टन भोजन बर्बाद हो रहा है। यह आंकड़ा घरों के साथ शादी समारोह, पार्टियों और बड़े आयोजनों में होने वाली बर्बादी से जुड़ा बताया गया है।भोजन की बर्बादी का असर सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ पानी, ऊर्जा, श्रम और परिवहन में इस्तेमाल संसाधन भी व्यर्थ जाते हैं।
जयपुर में सबसे ज्यादा 110 टन खाना बर्बाद
राजस्थान के प्रमुख शहरों में जयपुर में सबसे ज्यादा भोजन बर्बादी का आंकड़ा दिया गया है। यहां प्रतिदिन करीब 110 टन भोजन कचरे में जाने की बात सामने आई है।इसके बाद जोधपुर में 75 टन और कोटा में 60 टन भोजन बर्बाद होने का आंकड़ा दिया गया है। बड़े शहरों में आबादी और आयोजनों की संख्या अधिक होने से खाद्य अपशिष्ट की मात्रा भी बढ़ सकती है।
जोधपुर, कोटा और उदयपुर की स्थिति
आंकड़ों के मुताबिक जोधपुर में रोज करीब 75 टन, कोटा में 60 टन और उदयपुर में 50 टन भोजन बर्बाद होता है।अजमेर में यह आंकड़ा करीब 45 टन बताया गया है। वहीं अलवर में 35 टन और भीलवाड़ा में 30 टन भोजन रोजाना बर्बाद होने का दावा किया गया है।
अजमेर से भरतपुर तक शहरवार आंकड़े
दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रमुख शहरों में भोजन की रोजाना बर्बादी इस प्रकार बताई गई है:
| क्रम | शहर | रोजाना भोजन बर्बादी |
|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 110 टन |
| 2 | जोधपुर | 75 टन |
| 3 | कोटा | 60 टन |
| 4 | उदयपुर | 50 टन |
| 5 | अजमेर | 45 टन |
| 6 | अलवर | 35 टन |
| 7 | भीलवाड़ा | 30 टन |
| 8 | सीकर | 25 टन |
| 9 | भरतपुर | 20 टन |
इन आंकड़ों में दिए गए शहरों में जयपुर सबसे ऊपर है, जबकि भरतपुर में रोजाना 20 टन भोजन बर्बाद होने का आंकड़ा दिया गया है।
सिर्फ घरों में नहीं, सप्लाई चेन में भी बर्बादी
भोजन की बर्बादी केवल घरों या आयोजनों तक सीमित नहीं है। खेत से बाजार और फिर उपभोक्ता तक पहुंचने के दौरान भी खाद्य सामग्री खराब हो सकती है।भंडारण, परिवहन और दूसरी प्रक्रियाओं में अनाज, फल और सब्जियों के खराब होने से भी खाद्य नुकसान होता है। ऐसे नुकसान को कम करने के लिए बेहतर स्टोरेज और सप्लाई चेन जरूरी है।
देश में भी खाद्य बर्बादी बड़ी चुनौती
दिए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में घरों से हर साल करीब 7.82 करोड़ टन भोजन बर्बाद होने की बात कही गई है। वहीं खाद्य सामग्री के उत्पादन से उपभोग तक की प्रक्रिया में भी बड़े स्तर पर नुकसान होता है।ऐसे में भोजन की बर्बादी कम करना खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
शादी-पार्टियों में सबसे ज्यादा खाना फेंकने की बात
राजस्थान में भोजन की बर्बादी का एक बड़ा हिस्सा शादी समारोहों और बड़े आयोजनों से जुड़ा बताया गया है।ऐसे आयोजनों में मेहमानों की संख्या का अनुमान, कई तरह के व्यंजन और अतिरिक्त भोजन तैयार करने के कारण जरूरत से ज्यादा खाना बच सकता है। अगर बचे हुए भोजन को सुरक्षित तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाए तो बर्बादी कम की जा सकती है।
भोजन बचाने के लिए चल रहे प्रयास
जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में कुछ सामाजिक संस्थाओं की ओर से समारोहों के बाद बचा भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाने का काम किया जाता है।कोटा, अजमेर और उदयपुर में भी स्थानीय स्तर पर रोटी बैंक और स्वयंसेवी समूह भोजन एकत्र कर वितरण करते हैं। हालांकि, ऐसे प्रयासों की पहुंच और क्षमता शहर-दर-शहर अलग हो सकती है।
‘प्लेट में उतना ही लें, जितना खा सकें’
भोजन की बर्बादी कम करने के लिए आयोजनों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। विवाह स्थलों और सामुदायिक आयोजनों में लोगों से जरूरत के मुताबिक ही भोजन लेने की अपील की जाती है।इसके अलावा बचा हुआ सुरक्षित भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी खाद्य बर्बादी कम करने में मदद कर सकती है।
भोजन की बर्बादी रोकना सामूहिक जिम्मेदारी
खाद्य बर्बादी कम करने के लिए घरों, होटल-रेस्तरां, विवाह आयोजकों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।जरूरत के मुताबिक भोजन तैयार करना, सही तरीके से स्टोर करना, बचा भोजन सुरक्षित रूप से वितरित करना और प्लेट में उतना ही भोजन लेना जितना खाया जा सके—इन छोटे कदमों से बर्बादी कम की जा सकती है।राजस्थान में रोजाना हजारों टन भोजन बर्बाद होने के दावे के बीच सबसे जरूरी सवाल यही है कि खाने की बर्बादी रोकने के लिए व्यवस्था और समाज दोनों स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।