जयपुर में JLN मार्ग का ‘चीरहरण’ क्यों? पुराने विरोध के बाद भी 500 करोड़ का ट्रैफिक प्लान
जयपुर के JLN मार्ग को शहर की सबसे खूबसूरत सड़कों में गिना जाता है। अब इसी मार्ग को पूरी तरह सिग्नल-फ्री बनाने के लिए करीब 500 करोड़ रुपए का ट्रैफिक प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। JDA ने दिल्ली के School of Planning and Architecture (SPA) के विशेषज्ञों की मदद से करीब 7.5 किलोमीटर लंबे मार्ग का प्लान तैयार कराया है। इसमें एलिवेटेड रोड, अंडरपास, लूप और यू-टर्न जैसी संरचनाएं प्रस्तावित हैं। खास बात यह है कि 2024 में तत्कालीन प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर JLN मार्ग की खूबसूरती प्रभावित होने की चिंता जताई गई थी और प्रोजेक्ट के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में अब नए प्लान को लेकर शहर में बहस शुरू हो गई है।
JLN मार्ग पर 500 करोड़ का नया प्लान
JDA ने रामनिवास बाग से जवाहर सर्किल तक करीब 7.5 किलोमीटर के हिस्से को सिग्नल-फ्री बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए करीब 500 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान बताया गया है।JDA के अनुसार योजना तैयार करने में दिल्ली के SPA के विशेषज्ञों की मदद ली गई है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाना है। मंजूरी मिलने के बाद ही इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
सड़क पर क्या-क्या बदलेगा?
प्रस्तावित प्लान में JLN मार्ग के कई प्रमुख जंक्शनों पर ट्रैफिक व्यवस्था बदलने की योजना है।जानकारी के अनुसार त्रिमूर्ति सर्किल से राजस्थान यूनिवर्सिटी तिराहे के बीच एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है। गांधी सर्किल पर अंडरपास की योजना है।इसके अलावा गांधी सर्किल से OTS तक लूप, MNIT और जवाहर सर्किल के पास यू-टर्न जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। JDA सर्किल और SL रोड तिराहे को बंद करने का प्रस्ताव भी योजना में शामिल बताया गया है।
पैदल यात्रियों के लिए भी बदलाव
JLN मार्ग के नए ट्रैफिक प्लान में पैदल यात्रियों की आवाजाही को भी शामिल किया गया है।SMS मेडिकल कॉलेज और वर्ल्ड ट्रेड पार्क के पास भूमिगत पैदल क्रॉसिंग प्रस्तावित हैं। इसका उद्देश्य वाहनों और पैदल यात्रियों के आवागमन को अलग करना बताया गया है।JDA का लक्ष्य सड़क पर सिग्नल कम करके यातायात को लगातार चलाना है। हालांकि, इस पूरी योजना का अंतिम स्वरूप मंजूरी और विस्तृत डिजाइन के बाद ही स्पष्ट होगा।
2024 में एलिवेटेड रोड पर उठी थी आपत्ति
JLN मार्ग पर एलिवेटेड रोड का मुद्दा नया नहीं है। 2024 में अंबेडकर सर्किल से जवाहर सर्किल तक एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव बजट में शामिल किया गया था।नवंबर 2024 की समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने JLN मार्ग की विशिष्ट खूबसूरती और पहचान पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद प्रोजेक्ट का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए थे।यानी उस समय सरकार के स्तर पर इस तरह के निर्माण के सौंदर्यात्मक प्रभाव को लेकर सवाल उठे थे।
JDA का नया प्लान पुराने प्रस्ताव से कितना अलग?
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 2026 का नया प्लान 2024 के प्रस्ताव से कितना अलग है।नए प्लान में पूरे 7.5 किलोमीटर मार्ग को सिग्नल-फ्री करने के लिए कई अलग-अलग ट्रैफिक संरचनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें सिर्फ एलिवेटेड रोड नहीं, बल्कि अंडरपास, लूप और यू-टर्न भी शामिल हैं।इसलिए इसे सीधे पुराने एलिवेटेड रोड प्रस्ताव की हूबहू पुनरावृत्ति कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। हालांकि, एलिवेटेड सेक्शन का दोबारा प्रस्तावित होना पुराने विवाद को जरूर सामने लाता है।
JLN मार्ग की खूबसूरती क्यों खास?
JLN मार्ग जयपुर की प्रमुख सड़कों में शामिल है। रामनिवास बाग से जवाहर सर्किल तक का यह कॉरिडोर कई महत्वपूर्ण संस्थानों और पर्यटन स्थलों को जोड़ता है।सड़क के आसपास हरियाली, चौड़े हिस्से और खुले क्षेत्र इसकी पहचान का हिस्सा हैं। इसी वजह से यहां किसी बड़े निर्माण का असर केवल ट्रैफिक पर नहीं, बल्कि सड़क के दृश्य स्वरूप पर भी पड़ सकता है।2024 में मुख्यमंत्री की आपत्ति का एक प्रमुख आधार भी यही सौंदर्यात्मक पहलू था।
JDA के सामने ट्रैफिक और सौंदर्य का संतुलन
JDA का तर्क ट्रैफिक को सिग्नल-फ्री और अधिक सुचारू बनाने पर केंद्रित है। दूसरी ओर, शहर की पहचान से जुड़े मार्ग पर बड़े ढांचों के प्रभाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।इसलिए असली चुनौती सिर्फ ट्रैफिक कम करना नहीं है। सवाल यह भी है कि समाधान ऐसा हो, जिससे सड़क की मौजूदा पहचान और हरियाली पर न्यूनतम असर पड़े।
क्या छोटे सुधारों से समस्या हल हो सकती है?
JLN मार्ग पर पहले भी ट्रैफिक सिग्नल और जंक्शन मैनेजमेंट से जुड़े सुधार किए गए हैं। JDA के पुराने दस्तावेजों में JLN मार्ग के कई जंक्शनों पर ATCS और ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम का काम दर्ज है।हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी यह सवाल उठाया गया है कि क्या केवल सबसे अधिक दबाव वाले जंक्शनों पर अंडरपास या ग्रेड सेपरेशन जैसे उपाय पर्याप्त हो सकते हैं। हालांकि, यह विशेषज्ञों और नागरिकों के बीच चल रही बहस है, कोई अंतिम सरकारी निर्णय नहीं।
500 करोड़ खर्च से पहले उठ रहे सवाल
JLN मार्ग के नए प्लान पर सबसे बड़ा सवाल लागत और आवश्यकता को लेकर है।यदि समस्या मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा जंक्शनों पर ज्यादा है, तो क्या पूरे 7.5 किलोमीटर कॉरिडोर में बड़े बदलाव जरूरी हैं? वहीं यदि ट्रैफिक दबाव भविष्य में बढ़ने वाला है, तो क्या मौजूदा संरचना पर्याप्त होगी?इन सवालों का जवाब विस्तृत ट्रैफिक सर्वे, पर्यावरणीय प्रभाव और परियोजना की DPR सामने आने के बाद अधिक स्पष्ट होगा।
हाई कोर्ट में भी JLN के OTS प्रोजेक्ट का मामला पहुंच चुका है
JLN मार्ग के OTS चौराहे से जुड़े पुराने ट्रैफिक प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट में भी विवाद पहुंच चुका है।जून 2026 के फैसले में कोर्ट के रिकॉर्ड में 2022 में OTS Crossing के ट्रैफिक सुधार और सौंदर्यीकरण से जुड़े ₹184.30 करोड़ के EPC प्रोजेक्ट और बाद में OTS फ्लाईओवर की DPR के लिए 2025 में जारी नए टेंडर का उल्लेख है।यह मामला अलग कानूनी विवाद है, लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि JLN मार्ग पर ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर योजनाएं पिछले कुछ वर्षों से लगातार बदलती रही हैं।
अब मुख्यमंत्री की मंजूरी पर नजर
फिलहाल 500 करोड़ रुपए का नया JLN मार्ग प्रोजेक्ट प्रस्तावित स्तर पर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसे मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाना है। मंजूरी के बाद ही परियोजना के क्रियान्वयन की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जयपुर की इस खास सड़क पर ट्रैफिक सुधार किस मॉडल से किया जाएगा। क्या बड़े ढांचे आएंगे या कम हस्तक्षेप वाले विकल्पों पर जोर होगा, यह आने वाले निर्णयों से स्पष्ट होगा।