Rajasthan Solar Energy: सौर ऊर्जा में राजस्थान नंबर वन, फिर भी रूफटॉप सोलर में क्यों पिछड़ा?
राजस्थान देश में सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में अग्रणी राज्यों में है, लेकिन रूफटॉप सोलर के मामले में तस्वीर अलग है। प्रदेश में सौर विकिरण की प्रचुरता और बड़े सोलर पार्क होने के बावजूद घरेलू और छोटे उपभोक्ताओं तक रूफटॉप सोलर का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग यानी RERC ने वर्चुअल और ग्रुप नेट मीटरिंग की व्यवस्था लागू करने के नियम बनाए हैं। लेकिन डिस्कॉम स्तर पर प्रशासनिक आदेश और ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू नहीं होने से उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सौर क्षमता में राजस्थान आगे, रूफटॉप में पांचवें स्थान पर
राजस्थान में देश के सबसे अधिक सौर विकिरण वाले क्षेत्रों में से कई क्षेत्र मौजूद हैं। बड़े सोलर पार्कों और विशाल भू-भाग के कारण राज्य सौर ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।इसके बावजूद रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता के मामले में राजस्थान गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और केरल के बाद पांचवें स्थान पर बताया जा रहा है। यानी बड़े सोलर प्रोजेक्ट में आगे रहने वाला राज्य घरों और छोटे प्रतिष्ठानों की छतों पर सोलर लगाने में उसी गति से आगे नहीं बढ़ पाया।
RERC ने वर्चुअल नेट मीटरिंग का दिया प्रावधान
राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने ‘डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी जनरेटिंग सिस्टम्स विनियम-2025’ के तहत वर्चुअल नेट मीटरिंग का प्रावधान किया है।इस व्यवस्था का फायदा उन उपभोक्ताओं को मिल सकता है, जिनके पास सोलर पैनल लगाने के लिए अपनी छत उपलब्ध नहीं है। गांवों में कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार, बहुमंजिला इमारतों के निवासी और छोटे दुकानदार सामूहिक सोलर प्लांट में हिस्सेदारी लेकर अपने बिजली बिल में उसका क्रेडिट हासिल कर सकते हैं।
ग्रुप नेट मीटरिंग से कई कनेक्शनों का हो सकता है समायोजन
RERC के नियमों में ग्रुप नेट मीटरिंग की व्यवस्था भी शामिल की गई है। इसका फायदा ऐसे बड़े घरेलू या औद्योगिक उपभोक्ताओं को मिल सकता है, जिनके एक से अधिक बिजली कनेक्शन हैं।इस व्यवस्था में मुख्य परिसर पर सोलर प्लांट लगाकर पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली का समायोजन दूसरे सर्विस कनेक्शनों के बिल में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए किसी कारोबारी का मुख्य प्रतिष्ठान, गोदाम और दूसरा छोटा औद्योगिक परिसर अलग-अलग कनेक्शन पर है, तो नियमों के तहत बिजली क्रेडिट का समायोजन संभव हो सकता है।
डिस्कॉम ने गाइडलाइन बनाई, लेकिन आगे की प्रक्रिया अटकी
RERC के आदेश के बाद जयपुर डिस्कॉम ने 30 दिसंबर 2025 को ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। इसके बाद अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम की ओर से भी गाइडलाइन जारी किए जाने की जानकारी है।लेकिन गाइडलाइन के बाद जरूरी प्रशासनिक आदेश जारी नहीं होने से योजना का जमीनी क्रियान्वयन प्रभावित है। यही वजह है कि नियम मौजूद होने के बावजूद पात्र उपभोक्ता इसका लाभ लेने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
आठ महीने बाद भी वेब पोर्टल शुरू नहीं
अजमेर डिस्कॉम ने 2 जनवरी को ग्रिड इंटरैक्टिव डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी जनरेटिंग सिस्टम को लेकर गाइडलाइन जारी की थी।इसके तहत वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने और ऑनलाइन आवेदन की सुविधा विकसित करने की बात थी। ऑनलाइन आवेदनों की प्रोसेसिंग के लिए तीन महीने में वेब आधारित सिस्टम तैयार किया जाना था। लेकिन दिए गए विवरण के अनुसार करीब आठ महीने बाद भी पोर्टल शुरू नहीं हो पाया।इस देरी से उपभोक्ताओं के लिए आवेदन और कनेक्शन प्रक्रिया आसान बनाने का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका है।
स्मार्ट मीटर लग रहे, लेकिन नियमों में बदलाव लंबित
राजस्थान में नए बिजली कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाने की योजना भी लागू है। इसके बावजूद मौजूदा गाइडलाइन में नेट मीटर का उल्लेख होने से स्मार्ट मीटर व्यवस्था के साथ नियमों के तालमेल को लेकर संशोधन की जरूरत सामने आती है।जरूरी संशोधन आदेश जारी नहीं होने से प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है। ऐसे में स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था के अनुरूप नेट मीटरिंग के नियमों को स्पष्ट करना जरूरी माना जा रहा है।
1.75 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं वाला प्रदेश
राजस्थान में करीब 1.75 करोड़ विद्युत उपभोक्ता बताए गए हैं। इनमें लगभग 1.38 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं।करीब 1.04 करोड़ उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनकी मासिक बिजली खपत 100 यूनिट तक बताई गई है। इसके अलावा करीब 31 लाख कृषि, 15 लाख व्यावसायिक और 4 लाख औद्योगिक उपभोक्ता हैं। अन्य श्रेणी में लगभग 1.5 लाख उपभोक्ता शामिल हैं।इतने बड़े उपभोक्ता आधार में रूफटॉप सोलर का विस्तार बिजली व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।
पीएम सूर्य घर योजना से भी बड़ी उम्मीद
प्रदेश में पीएम सूर्य घर योजना के तहत करीब 5 लाख घरों को सोलर से जोड़ने का लक्ष्य बताया गया है।ऐसे में वर्चुअल और ग्रुप नेट मीटरिंग जैसी व्यवस्थाएं उन उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी हो सकती हैं, जो अपनी छत पर सोलर पैनल नहीं लगा सकते। लेकिन इसके लिए आवेदन, मीटरिंग, बिल क्रेडिट और ऑनलाइन प्रोसेसिंग की व्यवस्था स्पष्ट और समयबद्ध होना जरूरी है।
विशेषज्ञ ने जल्द प्रशासनिक आदेश जारी करने की मांग की
सेवानिवृत्त एसई और ऊर्जा सलाहकार येवंती कुमार बोलिया के मुताबिक, RERC के आदेश की अनुपालना में जयपुर डिस्कॉम ने गाइडलाइन जारी की थी। इसके बाद अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम ने भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई।उनका कहना है कि प्रशासनिक आदेश के अभाव में उपभोक्ताओं को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जल्द आदेश जारी करने की जरूरत बताई।
बड़े सोलर पार्क से छतों तक पहुंचना अब चुनौती
राजस्थान के पास सौर ऊर्जा उत्पादन की बड़ी क्षमता है। लेकिन रूफटॉप सोलर का विस्तार अलग तरह की प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था मांगता है।बड़े सोलर पार्क में जमीन, ग्रिड कनेक्शन और बड़े पैमाने पर उत्पादन की व्यवस्था होती है। वहीं रूफटॉप सोलर में लाखों छोटे उपभोक्ताओं, मीटरिंग, बिलिंग और आवेदन प्रक्रिया को संभालना पड़ता है।इसलिए राजस्थान के सामने अब चुनौती केवल सौर बिजली उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि उसे घरों, दुकानों और छोटे उद्योगों तक पहुंचाने की भी है।