Tarang Shakti 2026: जोधपुर में आज से सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास, 8 देशों की वायुसेना शामिल
भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ का शनिवार से राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर आगाज हो रहा है। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभ्यास में भारत समेत कुल 8 देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसके अलावा 32 देश पर्यवेक्षक के तौर पर अभ्यास से जुड़े हैं। 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान और करीब 3,000 सैन्यकर्मी इस मेगा एक्सरसाइज का हिस्सा होंगे। अभ्यास से पहले ही कई विदेशी सैन्य परिवहन विमान जोधपुर पहुंच चुके हैं।
जोधपुर एयरबेस पर आज से शुरू होगा तरंग शक्ति-2026
भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति-2026 शनिवार से जोधपुर एयरबेस पर शुरू हो रहा है। यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलेगा।इस दौरान भारत और मित्र देशों की वायुसेनाएं संयुक्त रूप से विभिन्न हवाई अभियानों का अभ्यास करेंगी। अभ्यास का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच संचालन और समन्वय को मजबूत करना है।
8 देशों की वायुसेनाएं लेंगी हिस्सा
तरंग शक्ति-2026 में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।इन देशों की वायुसेनाएं अपने लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों के साथ अभ्यास में हिस्सा लेंगी। इससे भारतीय वायुसेना को अलग-अलग देशों की ऑपरेशनल प्रक्रियाओं के साथ संयुक्त अभ्यास का अवसर मिलेगा।
32 देश पर्यवेक्षक के तौर पर जुड़े
इस बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में 32 अन्य देशों के प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल होंगे।इन देशों के प्रतिनिधि अभ्यास की गतिविधियों और विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के संयुक्त संचालन को देखेंगे। इस तरह तरंग शक्ति-2026 को भारत की रक्षा कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण अभ्यास माना जा रहा है।
100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, 3 हजार जवान
अभ्यास में 100 से अधिक लड़ाकू विमान शामिल होने की जानकारी है। इसके अलावा करीब 3,000 सैन्यकर्मी और पायलट विभिन्न गतिविधियों का हिस्सा बनेंगे।अभ्यास के संचालन के लिए चार से पांच प्रमुख एयरबेस के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। जोधपुर एयरबेस इस पूरे अभ्यास का प्रमुख केंद्र है।
अभ्यास से पहले जोधपुर पहुंचे विदेशी विमान
तरंग शक्ति-2026 शुरू होने से पहले ही कई देशों के सैन्य परिवहन विमान जोधपुर पहुंच चुके हैं।शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस पर ऑस्ट्रेलिया का C-130J सुपर हरक्यूलिस, अमेरिका का C-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का C-130J और फ्रांस का A330 MRTT पहुंचने की जानकारी सामने आई।इन विमानों के जरिए विदेशी सैन्य दल, तकनीकी स्टाफ और आवश्यक उपकरण जोधपुर पहुंचे हैं।
2024 में हुआ था पहला संस्करण
तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में आयोजित किया गया था। इसका आयोजन तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में हुआ था।2026 के संस्करण का दायरा पहले की तुलना में अधिक व्यापक बताया जा रहा है। इस बार बड़ी संख्या में विदेशी वायुसेनाओं की भागीदारी और पर्यवेक्षक देशों की मौजूदगी अभ्यास को बहुराष्ट्रीय स्वरूप दे रही है।
विदेशी पायलटों के सामने राजस्थान की गर्मी भी चुनौती
जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान में सितंबर के अंतिम दिनों और अक्टूबर की शुरुआत में भी तापमान ऊंचा रह सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जोधपुर में दिन का तापमान करीब 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है।रेगिस्तानी क्षेत्र की गर्म और शुष्क परिस्थितियां विदेशी एयरक्रू और तकनीकी दलों के लिए अलग तरह की चुनौती पेश कर सकती हैं। ऐसे मौसम में विमान संचालन के साथ कर्मियों की हाइड्रेशन और ग्राउंड सपोर्ट व्यवस्था भी महत्वपूर्ण रहती है।
क्यों अहम है तरंग शक्ति-2026?
तरंग शक्ति केवल दो देशों के बीच होने वाला सैन्य अभ्यास नहीं है। यह एक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास है, जिसमें अलग-अलग देशों की वायुसेनाएं संयुक्त संचालन का अभ्यास करती हैं।अभ्यास के दौरान एयर ऑपरेशंस, साझा रणनीति, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और विभिन्न सामरिक परिस्थितियों में समन्वय जैसी क्षमताओं पर काम किया जाता है।
भारत की रक्षा कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण आयोजन
भारत में इतने बड़े स्तर पर मित्र देशों की वायुसेनाओं का एक साथ अभ्यास करना रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है।तरंग शक्ति-2026 के जरिए विभिन्न देशों के बीच सैन्य संपर्क और आपसी संचालन क्षमता को बढ़ाने का अवसर मिलेगा। साथ ही भारतीय वायुसेना को अलग-अलग देशों के विमान और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा।
जोधपुर के आसमान में दिखेगी आधुनिक एयर पावर
अभ्यास के दौरान जोधपुर एयरबेस और आसपास के निर्धारित हवाई क्षेत्र में विभिन्न देशों के आधुनिक लड़ाकू विमान और सैन्य विमान गतिविधियों में शामिल होंगे।अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान अलग-अलग सामरिक परिदृश्यों के तहत संयुक्त हवाई अभियानों का अभ्यास किया जाएगा। सुरक्षा और हवाई क्षेत्र से जुड़े नियमों के तहत इन गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।