जयपुर में सिम ब्लॉक कराने के बाद भी खाते से 1.24 लाख गायब, UPI फ्रॉड से मचा हड़कंप
जयपुर के सांगानेर इलाके में मोबाइल चोरी के बाद साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। युवती ने मोबाइल चोरी होते ही सिम बंद करवा दी थी। अगले दिन उसी नंबर की डुप्लीकेट सिम भी जारी करा ली। इसके बावजूद 17 सितंबर को बैंक खाते से यूपीआई के जरिए 1.24 लाख रुपए निकल गए। पीड़िता ने मालपुरा गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सिम बंद होने और नई सिम जारी होने के बावजूद आरोपियों ने बैंक खाते तक कैसे पहुंच बनाई।
सब्जी खरीदने गई थी युवती, भीड़ में मोबाइल चोरी
राधा बल्लभ मार्ग निवासी दिव्या छीपा के मुताबिक, 14 सितंबर को वह सेक्टर-35 में सब्जी खरीदने गई थीं। इसी दौरान भीड़भाड़ का फायदा उठाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका मोबाइल चोरी कर लिया।मोबाइल चोरी होने का पता चलते ही उन्होंने बिना देरी किए ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क किया। उन्होंने चोरी हुए मोबाइल में लगी सिम को तत्काल बंद करवा दिया।
अगले दिन उसी नंबर की डुप्लीकेट सिम ली
मोबाइल चोरी होने के बाद दिव्या ने सुरक्षा के लिए अगले दिन यानी 15 सितंबर को उसी नंबर की नई डुप्लीकेट सिम भी जारी करवा ली।उन्हें उम्मीद थी कि पुराना मोबाइल और सिम दोनों बंद होने के बाद बैंक खाते से कोई अनधिकृत लेन-देन नहीं हो सकेगा। लेकिन इसके बावजूद दो दिन बाद उनके बैंक खाते से यूपीआई ट्रांजैक्शन हो गया।
17 सितंबर को खाते से निकले 1.24 लाख रुपए
पीड़िता के अनुसार, 17 सितंबर को उनके बैंक खाते से यूपीआई के जरिए कुल 1.24 लाख रुपए निकाल लिए गए।खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने का मैसेज मिलने के बाद उन्हें घटना की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
सिम बंद होने के बाद भी कैसे हुआ UPI ट्रांजैक्शन?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुरानी सिम बंद होने और नई सिम जारी होने के बाद भी बैंक खाते से यूपीआई के जरिए रकम कैसे निकली।पुलिस अब तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों ने बैंकिंग ऐप, यूपीआई या किसी अन्य माध्यम से खाते तक पहुंच कैसे बनाई।इसके अलावा मोबाइल चोरी होने के बाद फोन में मौजूद किसी जानकारी का इस्तेमाल हुआ या नहीं, इसकी भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
किस खाते में ट्रांसफर हुई रकम?
पुलिस अब 1.24 लाख रुपए के सभी ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटा रही है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि रकम आखिर किन बैंक खातों या यूपीआई आईडी में ट्रांसफर हुई।लेन-देन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस संबंधित खातों और यूपीआई आईडी से जुड़े लोगों की पहचान करने की कोशिश करेगी।
पुलिस खंगाल रही है बैंकिंग और तकनीकी रिकॉर्ड
मालपुरा गेट थाना पुलिस मामले में बैंक से ट्रांजैक्शन की जानकारी लेने के साथ तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मोबाइल चोरी के बाद फोन में कोई बैंकिंग ऐप पहले से लॉगिन था या नहीं। इसके अलावा यूपीआई पिन, डिवाइस एक्सेस और अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा सकती है।
मोबाइल चोरी के बाद बैंकिंग सुरक्षा बेहद जरूरी
मोबाइल चोरी होने पर सिर्फ सिम बंद कराना ही पर्याप्त सुरक्षा कदम नहीं माना जाना चाहिए। बैंकिंग ऐप, यूपीआई और कार्ड से जुड़ी सेवाओं को भी तत्काल सुरक्षित करना जरूरी है।ऐसी स्थिति में बैंक को फोन कर मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई से जुड़ी सेवाओं की जानकारी देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर संबंधित बैंकिंग सुविधाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराना भी महत्वपूर्ण है।
साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत शिकायत करें
मोबाइल चोरी के बाद खाते से पैसे निकलने की स्थिति में पीड़ित को तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना देनी चाहिए। डिजिटल लेन-देन से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखना जांच में मदद कर सकता है।पुलिस अब इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने खाते तक किस तरीके से पहुंच बनाई और रकम कहां ट्रांसफर की। जांच पूरी होने के बाद ही ठगी का पूरा तरीका स्पष्ट हो सकेगा।