चित्तौड़गढ़ में आकर्षण बनी ‘झकोलमा पूड़ी’, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की महाप्रसादी
चित्तौड़गढ़ में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित विशाल महाप्रसादी में इस बार ‘झकोलमा पूड़ी’ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। करीब 2 से ढाई फीट आकार की इस विशाल पूड़ी को विशेष पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया। इसके लिए बाहर से 15 कुशल हलवाइयों की टीम बुलाई गई थी। दिनभर श्रद्धालु विशाल पूड़ी को देखने और प्रसादी ग्रहण करने पहुंचते रहे। आयोजन में भक्ति, सेवा और सामूहिक भोजन का अनोखा संगम देखने को मिला।
पहली बार तैयार हुई विशाल ‘झकोलमा पूड़ी’
चित्तौड़गढ़ महोत्सव समिति की ओर से आयोजित महाप्रसादी में इस बार पहली बार झकोलमा पूड़ी तैयार की गई। अपने विशाल आकार के कारण यह पूड़ी लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी रही।करीब 2 से ढाई फीट आकार की इस पूड़ी को तैयार करने के लिए विशेष कौशल की जरूरत पड़ी। समिति ने इसके लिए बाहर से 15 अनुभवी हलवाइयों की टीम बुलाई।श्रद्धालु दिनभर इस विशेष व्यंजन को देखने और महाप्रसादी का हिस्सा बनने के लिए पहुंचते रहे।
2012 में 20 दानदाताओं से शुरू हुआ आयोजन
चित्तौड़गढ़ की यह महाप्रसादी वर्ष 2012 में शुरू हुई थी। उस समय करीब 20 दानदाताओं के सहयोग से सात हजार श्रद्धालुओं को प्रसादी कराने का लक्ष्य रखा गया था।हालांकि पहले ही वर्ष अनुमान से अधिक करीब 12 हजार लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। इसके बाद आयोजन लगातार बड़ा होता गया।आज करीब 400 भामाशाह इस सेवा आयोजन से जुड़े हुए हैं। समिति के अनुसार यह आयोजन सामूहिक सहयोग और सेवा भावना का उदाहरण बन चुका है।
45 क्विंटल आटा और 60 टीन तेल का इस्तेमाल
समिति के सुनील ढीलीवाल के अनुसार इस वर्ष महाप्रसादी के लिए बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जुटाई गई।आयोजन में करीब 45 क्विंटल आटा और 60 टीन तेल का इस्तेमाल किया गया। इनमें 23 क्विंटल आटे से सामान्य पूड़ी तैयार की गई, जबकि 15 बोरी आटे से झकोलमा पूड़ी बनाई गई।महाप्रसादी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया गया।
सब्जियों और व्यंजनों की रही भरमार
महाप्रसादी में श्रद्धालुओं को कई तरह की सब्जियां और व्यंजन परोसे गए। इनमें करीब 12 क्विंटल आलू-टमाटर की सब्जी, ढाई क्विंटल दाना मेथी और 5 क्विंटल पकौड़ी शामिल रही।इसके अलावा करीब ढाई क्विंटल नमकीन की चटपटी सब्जी भी तैयार की गई। प्रसादी में 100 किलो टमाटर-मिर्ची के गट्टे और 80 किलो अचार भी परोसा गया।इतनी बड़ी मात्रा में भोजन तैयार करने के लिए कई क्विंटल कच्ची सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
140 हलवाइयों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने संभाली जिम्मेदारी
महाप्रसादी की तैयारियों के लिए कुमावतों का नोहरा और सिंधी धर्मशाला में दो अलग-अलग स्थानों पर भोजन बनाया गया।आयोजन में करीब 140 हलवाई, 60 से 70 मजदूर और समिति के 150 कार्यकर्ता दिन-रात सेवा में जुटे रहे।व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए भोजन तैयार करने से लेकर वितरण तक अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई थीं।
गैस की कमी के बीच सात पारंपरिक भट्टियां तैयार
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता में परेशानी को देखते हुए इस बार लकड़ी से खाना पकाने की व्यवस्था भी की गई।करीब 40 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल कर सात पारंपरिक भट्टियां तैयार की गईं। इनमें दो चल भट्टियां भी शामिल थीं।इन भट्टियों पर बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया गया। आयोजन में पारंपरिक तरीके और आधुनिक व्यवस्थाओं का संयोजन देखने को मिला।
सूचना केंद्र पर मुख्य प्रसाद वितरण
महाप्रसादी का वितरण दोपहर करीब एक बजे सूचना केंद्र के बाहर बनाए गए मुख्य काउंटर से शुरू हुआ।यहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और वितरण देर रात तक जारी रहने की जानकारी दी गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाप्रसादी ग्रहण करने पहुंचे।
महिलाओं के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था
नेहरू बाजार स्थित त्रिनेत्र गणेश चौक पर शाम करीब 5:30 बजे महिलाओं के लिए अलग प्रसाद काउंटर शुरू किया गया।इस काउंटर की पूरी व्यवस्था महिला कार्यकर्ताओं ने संभाली। इससे महिलाओं के लिए प्रसाद ग्रहण करने और वितरण व्यवस्था को अलग रखने में सुविधा हुई।
सेवा और परंपरा का बना संगम
चित्तौड़गढ़ की इस महाप्रसादी में जहां बड़ी संख्या में लोगों ने भोजन ग्रहण किया, वहीं झकोलमा पूड़ी ने आयोजन को खास पहचान दी।विशाल आकार की इस पूड़ी को तैयार करने में हलवाइयों और कार्यकर्ताओं की बड़ी टीम जुटी। वहीं सैकड़ों भामाशाहों और कार्यकर्ताओं के सहयोग से पूरा आयोजन संचालित हुआ।