भरतपुर में चीनी के भाव में भारी गिरावट, 1400 रुपए क्विंटल तक सस्ती; मिठाई कारोबारियों को राहत
त्योहारी सीजन से पहले भरतपुर में चीनी के दामों में बड़ी गिरावट आई है। थोक बाजार में चीनी के भाव करीब 1200 से 1400 रुपए प्रति क्विंटल तक कम हुए हैं। कुछ समय पहले 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रही चीनी अब करीब 4800 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर आ गई है। केंद्र सरकार की ओर से मासिक बिक्री कोटा बढ़ाए जाने के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ी है। इससे थोक कारोबारियों के साथ मिठाई कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को भी राहत की उम्मीद है।
6200 से घटकर 4800-5000 रुपए क्विंटल हुआ भाव
भरतपुर के थोक बाजार में चीनी के दामों में पिछले कुछ समय में उल्लेखनीय कमी आई है। पहले चीनी करीब 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रही थी।अब इसके भाव घटकर लगभग 4800 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल रह गए हैं। यानी बाजार में करीब 1200 से 1400 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट देखने को मिली है।
केंद्र सरकार ने बढ़ाया मासिक बिक्री कोटा
चीनी की कीमतों में कमी के पीछे केंद्र सरकार की बिक्री व्यवस्था में बदलाव को अहम कारण बताया जा रहा है। सरकार ने मासिक बिक्री कोटा बढ़ा दिया है।पहले यह कोटा 22 लाख टन था, जिसे बढ़ाकर 26.50 लाख टन कर दिया गया है। इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
महीने में दो हिस्सों में होगी चीनी की बिक्री
नई व्यवस्था के तहत महीने की पहली से 15 तारीख तक 13 लाख टन चीनी की बिक्री का प्रावधान किया गया है।वहीं 16 से 30 तारीख के बीच 13.50 लाख टन चीनी बिक्री की व्यवस्था रहेगी। सरकार ने हर महीने उपलब्ध स्टॉक के निस्तारण के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य बाजार में नियमित आपूर्ति बनाए रखना बताया गया है।
मिठाई कारोबारियों को त्योहारी सीजन में राहत
त्योहारों से पहले चीनी के दाम कम होने से मिठाई कारोबारियों की लागत पर भी असर पड़ने की उम्मीद है। मिठाई बनाने में चीनी प्रमुख कच्चे माल में शामिल है।व्यापारियों के अनुसार चीनी महंगी होने पर मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ जाती है। अब भाव कम होने से कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
थोक कारोबारियों ने भी जताई राहत
भरतपुर के थोक विक्रेता बनवारी के मुताबिक चीनी की कीमतों में गिरावट से बाजार में राहत का माहौल है। उनके अनुसार पहले बढ़ते भाव को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों में चिंता थी।मथुरा गेट के व्यापारी लोकेश गर्ग ने भी कहा कि त्योहारों से पहले चीनी सस्ती होने से थोक कारोबारियों को राहत मिली है। उनके मुताबिक बाजार में कीमतें सामान्य होने से व्यापार को फायदा हो सकता है।
आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकती है राहत
चीनी के थोक भाव में कमी का असर आगे चलकर खुदरा बाजार और मिठाई की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम कीमतों पर अन्य कच्चे माल, श्रम और कारोबार की लागत का भी असर रहता है।त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने के बीच चीनी की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं पर लागत का दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरकार का फोकस आपूर्ति और कालाबाजारी पर
केंद्र सरकार की ओर से बिक्री कोटा बढ़ाने का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना बताया गया है। इसके साथ ही स्टॉक के नियमित निस्तारण पर भी जोर दिया गया है।व्यापारियों के अनुसार पर्याप्त आपूर्ति रहने से बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। अब त्योहारों के दौरान चीनी के भाव किस स्तर पर बने रहते हैं, इस पर बाजार की नजर रहेगी।