अलवर मेयर चुनाव में उलझा बहुमत का गणित, BJP-कांग्रेस आमने-सामने; क्रॉस वोटिंग पर नजर
अलवर नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 21 सितंबर को मेयर पद के लिए मतदान होना है। भाजपा की सुमन अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा आमने-सामने हैं। 65 वार्डों वाले नगर निगम में किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। भाजपा 40 पार्षदों के समर्थन का दावा कर रही है। वहीं कांग्रेस को निर्दलीयों और संभावित क्रॉस वोटिंग से उम्मीद है। दोनों दलों के पार्षद फिलहाल बाड़ेबंदी में हैं। मतदान के दिन पार्षदों को सीधे निगम पहुंचाने की तैयारी बताई जा रही है। ऐसे में मेयर चुनाव का फैसला अंतिम समय के समर्थन और मतदान पर निर्भर करेगा।
65 वार्डों में बहुमत का आंकड़ा 33
अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और निर्दलीय 13 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। एक वार्ड में बसपा का पार्षद है।मेयर चुनाव में बहुमत के लिए 33 पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपने मौजूदा संख्या बल से अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।यही वजह है कि निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इस चुनाव में महत्वपूर्ण हो गई है।
भाजपा का 40 पार्षदों के समर्थन का दावा
भाजपा ने शनिवार को अपने पार्षदों की एक तस्वीर जारी की। इसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य मंत्री संजय शर्मा के साथ 37 पार्षद नजर आए।भाजपा का दावा है कि तस्वीर में दिखाई दे रहे 37 पार्षदों के अलावा तीन अन्य पार्षद अलवर में मौजूद हैं। पार्टी के मुताबिक इस तरह सुमन अग्रवाल के समर्थन में कुल 40 पार्षद हैं।यदि भाजपा का यह दावा मतदान तक कायम रहता है तो पार्टी के पास बहुमत के आंकड़े से सात अधिक समर्थन होगा।
कांग्रेस ने भाजपा के दावे पर उठाए सवाल
कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने भाजपा के 40 पार्षदों के समर्थन के दावे को खारिज किया है।गंगावत का दावा है कि भाजपा के 12 से 15 पार्षद क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस के अनुसार भाजपा की बाड़ेबंदी के बावजूद पार्टी के भीतर असंतोष है।हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक दावा है। मतदान से पहले यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा के कितने पार्षद वास्तव में क्रॉस वोटिंग करेंगे।
कांग्रेस को निर्दलीयों से उम्मीद
कांग्रेस के पास 23 पार्षद हैं। बहुमत के लिए उसे अपने संख्या बल के अलावा कम से कम 10 और वोटों की जरूरत होगी।ऐसे में कांग्रेस की नजर 13 निर्दलीय पार्षदों पर है। पार्टी को उम्मीद है कि इनमें से पर्याप्त पार्षद उसके प्रत्याशी कमलेश शर्मा के समर्थन में मतदान कर सकते हैं।इसके अलावा कांग्रेस भाजपा के भीतर संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी भरोसा कर रही है। ऐसे में अंतिम समय तक समर्थन का गणित बदलने की संभावना बनी हुई है।
पिछले चुनाव में भाजपा को लगा था झटका
अलवर नगर निगम के पिछले चुनाव का उदाहरण भी इस बार चर्चा में है। उस समय भाजपा के 27 पार्षद निर्वाचित हुए थे। कांग्रेस और निर्दलीयों के खाते में 19-19 सीटें थीं।संख्या बल में भाजपा सबसे बड़ा दल होने के बावजूद कांग्रेस निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड बनाने में सफल रही थी।उस समय भाजपा के कुछ पार्षदों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप भी लगाए गए थे। इसी घटनाक्रम को कांग्रेस इस बार अपने पक्ष में राजनीतिक तर्क के तौर पर सामने रख रही है।
दोनों दलों की नजर निर्दलीयों पर
इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पार्षदों को एकजुट रखने की है। इसके साथ ही निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करना भी जरूरी है।भाजपा 40 पार्षदों के समर्थन का दावा कर रही है। कांग्रेस अपने 23 पार्षदों के साथ निर्दलीयों और संभावित क्रॉस वोटिंग से संख्या बढ़ाने की कोशिश में है।निर्दलीय पार्षदों का अंतिम रुख ही कई स्थितियों में चुनाव का गणित बदल सकता है।
मतदान के दिन सीधे निगम पहुंचेंगे पार्षद
दोनों दलों के पार्षद फिलहाल बाड़ेबंदी में बताए जा रहे हैं। मतदान के दिन उन्हें सीधे नगर निगम पहुंचाने की योजना है।बाड़ेबंदी का उद्देश्य पार्षदों को एकजुट रखना और संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकना बताया जा रहा है। वहीं मतदान से पहले दोनों दल अपने समर्थन वाले पार्षदों की संख्या को लेकर लगातार दावे कर रहे हैं।
21 सितंबर को होगा मेयर का फैसला
अलवर नगर निगम मेयर पद के लिए 21 सितंबर को पार्षद मतदान करेंगे। भाजपा की ओर से सुमन अग्रवाल और कांग्रेस की ओर से कमलेश शर्मा मैदान में हैं।बहुमत का आंकड़ा 33 है, जबकि दोनों दल अपने-अपने समर्थन को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम से पहले संख्या बल का अंतिम अनुमान लगाना मुश्किल है।अब निगाहें 21 सितंबर के मतदान पर हैं। इसी दिन स्पष्ट होगा कि भाजपा का 40 पार्षदों वाला दावा कायम रहता है या कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग और निर्दलीयों को लेकर बनाई गई रणनीति असर दिखाती है।