राजसमंद सभापति चुनाव: BJP-कांग्रेस में सीधा मुकाबला, कुमावत समाज की मांग से बढ़ी हलचल
राजसमंद नगर परिषद में सभापति पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला तय हो गया है। भाजपा ने वार्ड 6 से निर्वाचित अनिता पालीवाल को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने वार्ड 12 के पार्षद मोहनलाल कुमावत पर भरोसा जताया है। 45 सदस्यीय परिषद में भाजपा के 27, कांग्रेस के 14 और चार निर्दलीय पार्षद हैं। संख्या के लिहाज से भाजपा के पास स्पष्ट बढ़त है। हालांकि, कुमावत समाज की ओर से समाज के व्यक्ति को सभापति बनाने की मांग और क्रॉस वोटिंग की आशंका ने चुनावी समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। सभापति पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होगा।
भाजपा की अनिता पालीवाल मैदान में
भाजपा ने सभापति पद के लिए वार्ड 6 की पार्षद अनिता पालीवाल को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। अनिता पालीवाल 35 वर्ष की हैं और ग्रेजुएट हैं।
वह गृहिणी हैं और 2016 से राजनीति में सक्रिय बताई गई हैं। इस बार उनका पहला चुनावी अनुभव है। उनके नामांकन में घोषित संपत्ति करीब 23.42 लाख रुपए बताई गई है। उनके खिलाफ कोई घोषित आपराधिक मामला नहीं है।
अनिता पालीवाल ने शहर के नियोजित विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और सीवरेज व्यवस्था को प्राथमिकता बताया है।
कांग्रेस ने मोहनलाल कुमावत पर बदला दांव
कांग्रेस की ओर से वार्ड 12 के पार्षद मोहनलाल कुमावत को सभापति पद का प्रत्याशी बनाया गया है। इससे पहले कांग्रेस खेमे में निवर्तमान उपसभापति चुन्नीलाल पंचोली और पार्षद भूरालाल कुमावत के नामों की चर्चा थी।
दोनों की ओर से नामांकन पत्र दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में कांग्रेस ने मोहनलाल कुमावत को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया।
मोहनलाल कुमावत 37 वर्ष के हैं और मार्बल व्यवसाय से जुड़े हैं। वह जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव भी बताए गए हैं। उनकी घोषित संपत्ति करीब 7.25 लाख रुपए है।
45 वार्डों में BJP के 27 पार्षद
राजसमंद नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में भाजपा के 27 पार्षद जीतकर आए हैं।
कांग्रेस के खाते में 14 सीटें गईं, जबकि चार निर्दलीय पार्षद भी निर्वाचित हुए हैं। संख्या के लिहाज से भाजपा बहुमत के आंकड़े से ऊपर है।
इसके बावजूद सभापति चुनाव में पार्टी के सामने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी। वहीं कांग्रेस अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है।
कुमावत समाज की मांग से बढ़ी राजनीतिक हलचल
राजसमंद में सभापति चुनाव से पहले कुमावत समाज की ओर से समाज के व्यक्ति को सभापति बनाने की मांग चर्चा में है। भाजपा के भीतर कुमावत समाज से नौ पार्षद चुने जाने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी मोहनलाल कुमावत के नाम को लेकर सामाजिक समीकरणों पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, किसी समाज के पार्षदों का समर्थन किस उम्मीदवार को मिलेगा, यह मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
भाजपा की कोशिश संभावित असंतोष को रोककर अपने पार्षदों को एकजुट रखने की होगी।
क्रॉस वोटिंग की आशंका ने बढ़ाई चिंता
सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते दोनों दल अपने-अपने पार्षदों पर नजर बनाए हुए हैं। पार्षदों की बाड़ेबंदी की चर्चा के बीच पार्टी नेतृत्व के सामने एकजुटता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
भाजपा के पास 27 पार्षद हैं। वहीं कांग्रेस के 14 और निर्दलीयों की संख्या चार है। ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित वोटिंग से राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है।
हालांकि संख्या के मौजूदा गणित में भाजपा आगे है, लेकिन अंतिम परिणाम मतदान के बाद ही सामने आएगा।
एसडीएम कार्यालय के बाहर दिखी चुनावी हलचल
नामांकन के दौरान एसडीएम कार्यालय के आसपास भी राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। प्रत्याशियों के समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब दोनों दलों की नजर अपने पार्षदों के समर्थन पर है। सभापति पद के लिए सामान्य वर्ग का आरक्षण होने के कारण मुकाबले में दोनों प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
अब 21 सितंबर तक राजसमंद की स्थानीय राजनीति में बैठकों और समर्थन जुटाने का दौर जारी रहने की संभावना है।
21 सितंबर को होगा सभापति पद का फैसला
राजसमंद नगर परिषद में सभापति पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होगा। इसी दिन स्पष्ट होगा कि 45 सदस्यीय परिषद की कमान किसके हाथ जाती है।
भाजपा संख्या बल के लिहाज से मजबूत स्थिति में है। वहीं कांग्रेस के पास मोहनलाल कुमावत के रूप में सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास है।
चार निर्दलीय पार्षद भी चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर मतदान के दिन पार्षदों के रुख और अंतिम परिणाम पर रहेगी।