राजस्थान निकाय चुनाव: कहीं BJP तो कहीं कांग्रेस की बढ़त, निर्दलीयों के हाथ सत्ता की चाबी; मेयर की रेस में ये नाम
राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल बोर्ड गठन और मेयर के नाम को लेकर है। कई नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, तो कुछ जगह निर्दलीय निर्णायक स्थिति में पहुंच गए हैं। अलवर में भाजपा बहुमत से पांच सीट दूर है, लेकिन 13 निर्दलीय पार्षदों के कारण उसका बोर्ड बनना आसान माना जा रहा है। उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस बहुमत में है। पाली और अजमेर में भी बहुमत के लिए समर्थन जुटाने की कवायद शुरू हो गई है। भरतपुर में निर्दलीयों ने ही बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि जोधपुर में BJP और कांग्रेस 44-44 सीटों पर बराबर हैं।
अलवर में BJP बोर्ड की राह आसान, 13 निर्दलीयों पर नजर
अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा ने 28 और कांग्रेस ने 23 सीटें जीती हैं। निर्दलीय पार्षदों की संख्या 13 है, जबकि एक सीट अन्य के खाते में गई है। बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है।
भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए केवल पांच पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता है। ऐसे में 13 निर्दलीयों में से कुछ का समर्थन मिलने पर भाजपा बहुमत हासिल कर सकती है। हालांकि, अंतिम बोर्ड गठन समर्थन और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
मेयर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। संभावित चेहरों में पूर्व अध्यक्ष अजय अग्रवाल की पत्नी सुमनलता अग्रवाल और पुरुषोत्तम मनचंदा की बहू नेहा मनचंदा का नाम चर्चा में है। नेहा मनचंदा के साथ सामाजिक समीकरण भी जोड़े जा रहे हैं। नीलेश खंडेलवाल की बहू अपूर्वा शर्मा का नाम भी संभावित दावेदारों में है।
उदयपुर में BJP का बहुमत, जैन-ब्राह्मण समीकरण पर नजर
उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने 80 में से 53 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। अब पार्टी के सामने मेयर के चेहरे का चयन सबसे अहम है।
भाजपा के सहकारिता प्रकोष्ठ के संयोजक प्रमोद समर का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में है। वे वरिष्ठ पार्षद हैं और पार्टी संगठन के साथ उनके मजबूत संपर्क बताए जाते हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए भी उनके नाम की चर्चा हो चुकी है।
पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश भट्ट भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। संघ और संगठन में उनकी पकड़ तथा ब्राह्मण सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में जा सकता है।
इसके अलावा आकाश और अतुल चंदालिया भी चुनाव जीत चुके हैं। इनमें अतुल चंदालिया के नाम पर भी पार्टी के भीतर चर्चा होने की बात सामने आई है।
बीकानेर में कांग्रेस का बहुमत, कल्ला परिवार का नाम आगे
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। इसके साथ ही मेयर पद के लिए पार्टी के संभावित चेहरे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। उन्होंने बीकानेर पश्चिम क्षेत्र से जुड़े वार्डों में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन के बीच जीत दर्ज की है। सामाजिक गतिविधियों के कारण भी उनकी स्थानीय पहचान मजबूत बताई जाती है।
दूसरे संभावित चेहरे के तौर पर दिलीप बंथिया का नाम सामने आ रहा है। वे पहले पार्षद और जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं। गंगाशहर क्षेत्र से उनकी जीत को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्व यूआईटी अध्यक्ष मकसूद अहमद भी संभावित दावेदार हैं। यदि पार्टी सामाजिक समीकरण में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देती है, तो उनका नाम भी मजबूत हो सकता है।
भीलवाड़ा में BJP बहुमत में, दो महिला चेहरों में मुकाबला
भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में भाजपा ने 45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। यहां मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है।
वार्ड 60 से जीतने वाली सुमन ओझा और वार्ड 61 की विजेता पूर्णिमा जैन के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
सुमन ओझा पहले भी पार्षद रह चुकी हैं। उन्हें सांसद दामोदर अग्रवाल और पूर्व मेयर राकेश पाठक के खेमे से जोड़ा जाता है।
वहीं पूर्णिमा जैन को पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी के खेमे का समर्थन मिलने की चर्चा है। उनके पति विजय पोखर्ना भाजपा के जिला प्रवक्ता भी बताए जाते हैं। जैन समाज के सामाजिक समीकरण को देखते हुए उनकी दावेदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पाली में कांग्रेस बहुमत से चार कदम दूर
पाली नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीती हैं। बहुमत के लिए 33 सीटों की जरूरत है। वहीं 15 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए हैं।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाया जा सकता है। हालांकि, अंतिम स्थिति समर्थन के रुख के बाद ही स्पष्ट होगी।
मेयर पद के लिए वार्ड 38 से जीतीं राजबाला हिंगड़ का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। वे कांग्रेस नेता प्रदीप हिंगड़ की पत्नी हैं और उन्हें स्थानीय विधायक भीमराज भाटी तथा संगठन के समर्थन की चर्चा है।
सुमित्रा जैन भी संभावित दावेदार हैं। वे कांग्रेस की राज्य कार्यकारिणी से जुड़ी रही हैं। अनामिका सोलंकी मेवाड़ा का नाम भी संभावित विकल्प के तौर पर सामने आ रहा है।
भरतपुर में निर्दलीयों का बहुमत, इतिहास भी रहा है अलग
भरतपुर नगर निगम के नतीजे सबसे अलग रहे हैं। यहां निर्दलीय प्रत्याशियों ने 65 में से 36 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है।
भरतपुर में पहले भी निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रभाव रहा है। 2019 में भी निर्दलीयों का प्रदर्शन मजबूत रहा था। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस ने बोर्ड बनाया था।
2014 में भी निर्दलीयों की संख्या ज्यादा थी। उस समय राज्य में भाजपा की सरकार थी और भाजपा ने बोर्ड बनाया था।
इसी इतिहास को देखते हुए स्थानीय राजनीति में यह चर्चा है कि निर्दलीय पार्षद सत्ता में रहने वाली पार्टी के साथ जाने की रणनीति अपना सकते हैं। हालांकि इस बार निर्दलीयों के पास खुद बहुमत होने के कारण उनका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
अजमेर में कांग्रेस बहुमत के करीब, 36 साल बाद वापसी की चर्चा
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस ने 80 में से 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बढ़त बनाई है। भाजपा को 32 सीटें मिली हैं।
बहुमत का आंकड़ा 41 है। ऐसे में कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए चार और पार्षदों की जरूरत है।
कांग्रेस की ओर से दावा किया जा रहा है कि उसके तीन बागी विधायक अब पार्टी के साथ हैं। यदि कांग्रेस निर्दलीय और अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो करीब 36 साल बाद अजमेर में कांग्रेस का बोर्ड बनने की संभावना बन सकती है।
हालांकि अंतिम फैसला पार्षदों के समर्थन और बोर्ड गठन के दौरान होने वाले चुनाव पर निर्भर करेगा।
जोधपुर में BJP-कांग्रेस 44-44, निर्दलीय बने किंगमेकर
जोधपुर नगर निगम में 100 में से 99 वार्डों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं। अन्य प्रत्याशियों के खाते में 11 सीटें हैं।
वार्ड 50 के एक बूथ पर EVM में तकनीकी खराबी के कारण दोबारा मतदान कराया जाएगा। यहां 16 सितंबर को री-पोल और 17 सितंबर को परिणाम आएगा।
मेयर का चुनाव भी स्थगित कर दिया गया है। अब अंतिम सीट का परिणाम आने के बाद बोर्ड गठन का गणित साफ होगा।
जोधपुर में मेयर पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। भाजपा की ओर से मेघराज लोहिया और विकास राजवानी के नाम चर्चा में हैं। कांग्रेस की तरफ से पूर्व जिलाध्यक्ष नरेश चंद्र जोशी प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं।
पूर्व मेयर कुंती देवड़ा और भाजपा के पूर्व डिप्टी मेयर देवेंद्र सालेचा चुनाव हार चुके हैं। इसलिए उनकी दावेदारी खत्म हो गई है।
मेयर की कुर्सी के लिए सामाजिक समीकरण भी अहम
राजस्थान के इन नगर निगमों में बोर्ड गठन के साथ मेयर चयन भी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती है। जहां स्पष्ट बहुमत है, वहां पार्टी नेतृत्व के पास चेहरे का चयन करने की ज्यादा स्वतंत्रता होगी।
वहीं अलवर, पाली, अजमेर और जोधपुर जैसे निगमों में समर्थन जुटाना भी महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में मेयर का नाम केवल वरिष्ठता या संगठनात्मक अनुभव से तय नहीं होगा। सामाजिक समीकरण और पार्षदों की स्वीकार्यता भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब बोर्ड गठन पर टिकी सभी की नजर
नगर निगम चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों उन निकायों पर विशेष ध्यान दे रही हैं, जहां बहुमत स्पष्ट नहीं है।
अलवर और पाली में निर्दलीय निर्णायक भूमिका में हैं। अजमेर में कांग्रेस बहुमत के करीब है। जोधपुर में दोनों दल बराबरी पर हैं। वहीं भरतपुर में निर्दलीयों ने ही बहुमत हासिल कर लिया है।
अब आने वाले दिनों में समर्थन जुटाने, पार्षदों को एकजुट रखने और मेयर पद के लिए चेहरे तय करने की प्रक्रिया तेज होगी। अंतिम तस्वीर बोर्ड गठन और मेयर चुनाव के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।