जयपुर मेयर की कुर्सी पर किसकी नजर? BJP के 5 नाम चर्चा में, जानिए पूरा समीकरण
जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। 150 वार्डों में भाजपा ने 78 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 53 वार्डों तक सिमट गई। बहुमत का आंकड़ा 76 होने के कारण भाजपा अब आसानी से बोर्ड बनाने की स्थिति में है। चुनाव परिणाम के साथ ही जयपुर के अगले मेयर को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के निर्वाचित पार्षद फिलहाल बाड़ेबंदी में हैं और प्रदेश नेतृत्व मेयर पद के लिए नामों पर मंथन कर रहा है। ज्योति खंडेलवाल और विमल कटियार चुनाव नहीं जीत सके, इसलिए उनकी दावेदारी फिलहाल खत्म हो गई है। अब पांच पार्षदों के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
भाजपा को 78 सीटों के साथ मिला स्पष्ट बहुमत
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के चुनाव परिणाम में भाजपा ने 78 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 53 वार्डों में जीत मिली है। बाकी सीटों पर निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।
भाजपा के पास बहुमत होने के कारण अब बोर्ड गठन को लेकर स्थिति काफी स्पष्ट है। सबसे बड़ा सवाल मेयर के नाम को लेकर है। पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरण, संगठन में सक्रियता और सरकार से नजदीकी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला कर सकता है।
ज्योति खंडेलवाल और विमल कटियार दौड़ से बाहर
मेयर पद के लिए पहले जिन नामों की चर्चा थी, उनमें ज्योति खंडेलवाल और विमल कटियार का नाम भी शामिल था। लेकिन दोनों चुनाव जीतकर पार्षद नहीं बन सके।
मेयर पद के लिए पार्षद होना जरूरी होने के कारण अब दोनों नेताओं की दावेदारी समाप्त मानी जा रही है। इसके बाद भाजपा के भीतर नए नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सुनील कोठारी: संगठन से सरकार तक मजबूत संपर्क
मेयर पद के संभावित दावेदारों में सुनील कोठारी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वे कोठारी जेम्स एंड ज्वेलरी कारोबार से जुड़े हैं और चुनाव में वार्ड 112 से जीतकर पार्षद बने हैं।
कोठारी लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं। वे प्रदेश उपाध्यक्ष और जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। संगठन में सक्रिय रहने के साथ उनके मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के करीबी लोगों में शामिल होने की चर्चा है।
उनका कारोबारी और राजनीतिक प्रोफाइल मेयर पद की दौड़ में उनके पक्ष में जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
शैलेन्द्र भार्गव: संघ और संगठन का जाना-पहचाना चेहरा
शैलेन्द्र भार्गव भी भाजपा के संभावित मेयर दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। वे पहले जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
भार्गव का संगठन और संघ से जुड़ा लंबा अनुभव है। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे हैं। भाजपा अगर किसी अनुभवी और संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरे को मेयर बनाना चाहती है, तो उनका नाम आगे आ सकता है।
पार्टी के भीतर उनका संगठनात्मक अनुभव और निर्विवाद छवि उनके पक्ष में महत्वपूर्ण factor मानी जा रही है।
पुनीत कर्णावत: पूर्व डिप्टी मेयर और आक्रामक चेहरा
पुनीत कर्णावत का नाम भी मेयर पद की दौड़ में मजबूत माना जा रहा है। वे जयपुर नगर निगम के पूर्व उप महापौर रह चुके हैं।
कर्णावत लंबे समय से भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। उनका जुड़ाव पहले वसुंधरा राजे और बाद में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ भी बताया जाता रहा है। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं।
उनकी जमीनी सक्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली को देखते हुए पार्टी के भीतर उन्हें मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है।
विमल अग्रवाल: वैश्य समाज का समीकरण
विमल अग्रवाल का नाम भी मेयर पद को लेकर चर्चा में है। जयपुर में वैश्य समाज को भाजपा का महत्वपूर्ण सामाजिक आधार माना जाता है। ऐसे में पार्टी अगर सामाजिक समीकरण साधने के लिए वैश्य समाज से चेहरा चुनती है, तो विमल अग्रवाल का नाम आगे आ सकता है।
अग्रवाल पहले पार्षद रह चुके हैं और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे हैं। हालांकि अतीत में उन्होंने घनश्याम तिवाड़ी के साथ भाजपा से दूरी बनाई थी। बाद में दोनों की वापसी भाजपा में हुई।
अब संगठन के साथ उनकी वर्तमान स्थिति और सामाजिक समीकरण उनकी दावेदारी में अहम हो सकते हैं।
भवानी सिंह राजावत: राजपूत समाज के समीकरण पर नजर
मेयर पद के संभावित नामों में भवानी सिंह राजावत का नाम भी चर्चा में है। वे पहले पार्षद रह चुके हैं और राजपूत समाज से आते हैं।
अगर भाजपा मेयर चयन में सवर्ण और विशेष रूप से राजपूत समाज के सामाजिक समीकरण को प्राथमिकता देती है, तो भवानी सिंह राजावत की दावेदारी मजबूत हो सकती है।
यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज, खासकर राजपूत समाज की ओर से हुए आंदोलन के बाद इस वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा रही है। ऐसे में पार्टी के अंतिम सामाजिक समीकरण पर उनकी दावेदारी निर्भर कर सकती है।
अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी नजर
भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण मेयर का चुनाव किसी बाहरी समर्थन पर निर्भर नहीं है। अब पूरा फोकस पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन पर है।
पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन, सामाजिक समीकरण, सरकार से तालमेल और जयपुर की राजनीतिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। पांचों नामों में से किसे मौका मिलता है, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।
फिलहाल सुनील कोठारी, शैलेन्द्र भार्गव, पुनीत कर्णावत, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत के नाम चर्चा में हैं। मेयर पद के लिए अंतिम तस्वीर पार्टी के आधिकारिक निर्णय के बाद ही साफ होगी।