लड़की समझकर 25 हजार लोगों ने जिसे दिल दे दिया, वो निकला AI बॉट; राजस्थान में भी ऐसे फ्रॉड
AI के दौर में अब सिर्फ फोटो और वीडियो ही नकली नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन प्यार भी फर्जी हो सकता है। एंथ्रोपिक की एक रिपोर्ट ने डेटिंग ऐप्स से जुड़े ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जहां हजारों लोगों ने AI प्रोफाइल से बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से जुड़े ऐप स्टूडियो ने 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप्स पर करीब 4,700 नकली AI प्रोफाइल चलाए। सिर्फ दो सप्ताह में करीब 25 हजार यूजर्स इन प्रोफाइल्स से बातचीत कर चुके थे। इस नेटवर्क में Claude AI का इस्तेमाल बातचीत के लिए किया गया। राजस्थान में भी डेटिंग और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म से जुड़े फर्जी प्रोफाइल और ब्लैकमेलिंग के मामले सामने आ चुके हैं।
AI के पीछे छिपा था नकली प्यार
डेटिंग ऐप पर किसी खूबसूरत लड़की की प्रोफाइल देखकर बातचीत शुरू करना आज आम बात है। लेकिन अब यही बातचीत साइबर फ्रॉड का रास्ता भी बन सकती है।
एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऐप्स पर AI से बनाए गए प्रोफाइल यूजर्स से लगातार बातचीत कर रहे थे। यूजर्स को लगता था कि वे किसी वास्तविक व्यक्ति से चैट कर रहे हैं। जबकि दूसरी तरफ AI अलग-अलग किरदार बनाकर जवाब दे रहा था।
4,700 AI प्रोफाइल और 25 हजार यूजर्स
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप्स के नेटवर्क में करीब 4,700 नकली AI प्रोफाइल बनाए गए थे।
इन प्रोफाइल्स से लगभग 25 हजार लोग बातचीत कर चुके थे। दो सप्ताह के दौरान 23.6 लाख से ज्यादा मैसेज भेजे जाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है। यानी AI को इस तरह इस्तेमाल किया गया कि यूजर को लंबे समय तक बातचीत में बनाए रखा जा सके।
Claude को इंसान बनकर चैट करने के निर्देश
रिपोर्ट के अनुसार, AI मॉडल को इस तरह निर्देशित किया गया था कि वह यूजर्स को यह न बताए कि वह बॉट है। फोटो या वीडियो कॉल की मांग होने पर बातचीत को दूसरी दिशा में मोड़ने की व्यवस्था की गई थी।
प्रोफाइल तस्वीरों के लिए AI इमेज एडिटिंग का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। वहीं कुछ वास्तविक लोगों को वीडियो कॉल या सोशल मीडिया फॉलोबैक जैसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, ताकि प्रोफाइल ज्यादा भरोसेमंद लगे।
75 फीसदी प्रोफाइल AI होने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ऐप्स के मैच फीड में करीब 75 प्रतिशत प्रोफाइल AI आधारित और 25 प्रतिशत वास्तविक लोगों की थीं।
यूजर जब बातचीत करता था तो शुरुआत में कुछ चैट फ्री होती थीं। इसके बाद बातचीत जारी रखने के लिए कॉइन खरीदने पड़ते थे। यानी यूजर जितना ज्यादा बातचीत में फंसा रहता, ऐप संचालकों की कमाई उतनी बढ़ती थी।
संदिग्ध बातचीत से खुला पूरा नेटवर्क
एंथ्रोपिक को कुछ बातचीत के दौरान असामान्य पैटर्न दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ यूजर्स ने गंभीर बीमारी या खराब मानसिक स्थिति जैसी बातें भी बताईं। इसके बावजूद AI बातचीत जारी रखता रहा।
इन गतिविधियों के बाद कंपनी ने जुड़े अकाउंट्स पर कार्रवाई की। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अन्य AI कंपनियों के साथ मिलकर इस तरह के नेटवर्क को रोकने की कोशिश की गई।
डोरा से लेकर हेवन तक कई ऐप्स
रिपोर्ट में इस नेटवर्क से जुड़े कई ऐप्स के नाम सामने आए हैं। इनमें डोरा, डोनी, रोमी, लूमा, जोविया, किरा, ग्रेसचैट, हेवन, नालो और लोविया जैसे नाम शामिल हैं।
इन ऐप्स का इस्तेमाल डेटिंग और सोशल इंटरैक्शन के लिए किया जाता था। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इनके पीछे AI आधारित फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल किया जा रहा था।
राजस्थान में भी सामने आ चुके हैं डेटिंग फ्रॉड
राजस्थान में इस तरह का Claude आधारित नेटवर्क सामने आने की जानकारी नहीं है। लेकिन डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स के जरिए फर्जी प्रोफाइल बनाकर ठगी और ब्लैकमेलिंग के मामले सामने आते रहे हैं।
जयपुर समेत प्रदेश के साइबर पुलिस अधिकारियों की ओर से भी लोगों को ऑनलाइन रिश्तों और अनजान प्रोफाइल से सावधान रहने की सलाह दी जाती रही है। AI के जरिए बनाई गई तस्वीरों के बढ़ते इस्तेमाल ने ऐसे फ्रॉड को और मुश्किल बना दिया है।
करौली में डेटिंग ऐप से ब्लैकमेलिंग का मामला
फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस ने ऑनलाइन डेटिंग और फर्जी प्रोफाइल से जुड़े साइबर अपराधों को लेकर लोगों को सतर्क किया था। वहीं करौली में मई 2026 में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला सामने आया था।
पुलिस के अनुसार, डेटिंग ऐप के जरिए संपर्क के बाद वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेलिंग किए जाने का आरोप था। ऐसे मामलों में पहले भरोसा बनाया जाता है और फिर निजी तस्वीरों या वीडियो के जरिए पीड़ित को दबाव में लेने की कोशिश की जाती है।
जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम भी चर्चा में
जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग फ्रॉड से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया या डेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को आकर्षित किया जाता है।
इसके बाद उन्हें किसी क्लब या निर्धारित जगह पर बुलाकर भारी बिल या अन्य तरीके से पैसे वसूलने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और जांच के आधार पर ही अपराध की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट होती है।
कैसे पहचानें AI या फर्जी डेटिंग प्रोफाइल?
ऑनलाइन किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। प्रोफाइल की तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च के जरिए जांचा जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति लगातार वीडियो कॉल से बचता है, बहुत जल्दी भावनात्मक रिश्ता बनाने की कोशिश करता है या अचानक पैसे मांगता है तो सावधान हो जाएं। निवेश, क्रिप्टो, बीमारी या इमरजेंसी के नाम पर पैसे मांगने वाले ऑनलाइन संपर्क पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
प्यार के नाम पर पैसे मांगे तो तुरंत सावधान
AI तकनीक ने फर्जी तस्वीर और बातचीत बनाना आसान कर दिया है। इसलिए केवल प्रोफाइल फोटो या मीठी बातचीत के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान तय करना सुरक्षित नहीं है।
किसी अनजान ऑनलाइन संपर्क को बैंक डिटेल, OTP, निजी दस्तावेज, निजी तस्वीरें या पैसे नहीं देने चाहिए। शक होने पर बातचीत रोकें और साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत पुलिस या आधिकारिक साइबर शिकायत व्यवस्था से संपर्क करें।
यह पूरा मामला एक बड़ा संकेत है कि AI अब सिर्फ सुविधा देने वाली तकनीक नहीं रह गया है। इसका इस्तेमाल फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए ऑनलाइन रिश्तों में भरोसे से पहले सत्यापन जरूरी है।