Rajasthan Coaching Crisis: ‘राजस्थान छोड़ दूसरे राज्यों में शिफ्ट होंगे कोचिंग सेंटर!’ जयपुर से कोटा तक संचालकों ने खोला मोर्चा
राजस्थान के कोचिंग उद्योग में नए बिल्डिंग बायलॉज और सीलिंग कार्रवाई को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। जयपुर के गोपालपुरा बाईपास पर कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के बाद संचालकों ने आपात बैठक की। बैठक में जयपुर के साथ कोटा, सीकर और जोधपुर के संचालक भी शामिल हुए। उनका कहना है कि मौजूदा नियमों का पालन करना बड़ी संख्या में संस्थानों के लिए मुश्किल है। संचालकों ने चेतावनी दी है कि नियमों में राहत नहीं मिली, तो वे दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने पर विचार करेंगे। हालांकि, इन दावों और संभावित आर्थिक नुकसान के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
गोपालपुरा बाईपास पर कार्रवाई से बढ़ी नाराजगी
जयपुर के गोपालपुरा बाईपास को लंबे समय से कोचिंग और शिक्षण संस्थानों के प्रमुख क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां संचालित संस्थानों के खिलाफ जयपुर विकास प्राधिकरण की प्रवर्तन शाखा ने कार्रवाई तेज की है। कई संस्थानों को नोटिस दिए जाने और कुछ परिसरों को सील किए जाने की बात सामने आई है।
कोचिंग संचालकों का कहना है कि कार्रवाई से संस्थानों के संचालन पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे पर राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन ने बैठक बुलाई। इसमें प्रदेश के अलग-अलग एजुकेशन हब से जुड़े संचालकों ने अपनी समस्याएं रखीं।
नए बिल्डिंग बायलॉज पर सबसे बड़ी आपत्ति
संचालकों की सबसे बड़ी आपत्ति 5 दिसंबर 2025 से लागू किए गए नए बिल्डिंग बायलॉज को लेकर है। उनका दावा है कि नए नियमों में कोचिंग संस्थानों के लिए कई ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिन्हें पुराने संस्थानों के लिए पूरा करना मुश्किल है।
एसोसिएशन के मुताबिक, 500 वर्ग मीटर न्यूनतम भूमि और संस्थागत पट्टे जैसी शर्तें बड़ी चुनौती हैं। खासकर जयपुर और कोटा के पुराने इलाकों में कई संस्थान पहले से बनी इमारतों में संचालित हो रहे हैं। संचालकों का कहना है कि नियम लागू करने से पहले मौजूदा संस्थानों की स्थिति पर व्यावहारिक चर्चा जरूरी थी।
संस्थागत पट्टे को लेकर उठाया सवाल
कोचिंग संचालकों ने संस्थागत पट्टे की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि निजी कोचिंग संस्थानों के लिए संस्थागत पट्टा हासिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वे नए नियमों का पालन किस तरह करें, यह बड़ा सवाल है।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि संस्थागत पट्टा अनिवार्य किया गया है, तो सरकार को इसकी प्रक्रिया भी स्पष्ट करनी चाहिए। संचालकों ने आरोप लगाया कि नियमों को लागू करने से पहले संबंधित पक्षों से पर्याप्त बातचीत नहीं की गई। हालांकि, इस संबंध में सरकारी पक्ष और नियमों की आधिकारिक व्याख्या भी महत्वपूर्ण होगी।
500 वर्ग मीटर जमीन की शर्त पर विवाद
नए नियमों में बताई जा रही 500 वर्ग मीटर न्यूनतम भूमि की शर्त भी विवाद का प्रमुख कारण बनी है। कोचिंग संचालकों का कहना है कि जयपुर, कोटा और दूसरे शहरों के पुराने कोचिंग क्षेत्रों में इतनी बड़ी जमीन उपलब्ध कराना आसान नहीं है।
उनके मुताबिक, कई संस्थान वर्षों से छोटे भूखंडों या मौजूदा व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अचानक नई भूमि संबंधी शर्त लागू होने से उनके लिए संचालन मुश्किल हो सकता है। संचालक नियमों में व्यावहारिक छूट या संक्रमण अवधि की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और JDA की कार्रवाई
कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई का मामला व्यापक रूप से भवन उपयोग और सुरक्षा मानकों से जुड़ा है। प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की बात कही जा रही है। इसी क्रम में जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने गोपालपुरा बाईपास सहित संबंधित क्षेत्रों में कार्रवाई की है।
वहीं, कोचिंग संचालकों का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाना चाहिए। लेकिन इसके साथ सरकार को ऐसा व्यावहारिक रास्ता भी निकालना चाहिए, जिससे नियमों का पालन करते हुए पुराने संस्थानों को संचालन का अवसर मिल सके।
राजस्थान से पलायन की चेतावनी
बैठक में शामिल संचालकों ने चेतावनी दी कि यदि नियमों में राहत नहीं मिली, तो वे अपने संस्थान दूसरे राज्यों में ले जाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर जैसे विकल्पों का उल्लेख किया।
कोचिंग संचालकों का तर्क है कि इस क्षेत्र से सिर्फ शिक्षण संस्थान ही नहीं जुड़े हैं। हजारों शिक्षक और कर्मचारी रोजगार पाते हैं। इसके अलावा हॉस्टल, पीजी, मेस, परिवहन, स्टेशनरी और छोटे कारोबार भी छात्रों की मौजूदगी से चलते हैं। इसलिए उनका कहना है कि इसका असर पूरे स्थानीय अर्थतंत्र पर पड़ सकता है।
कोटा, सीकर और जयपुर की अर्थव्यवस्था पर असर
राजस्थान में कोटा, जयपुर और सीकर देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल हैं। इन शहरों की अर्थव्यवस्था में कोचिंग और उससे जुड़े कारोबार की महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रोफेशनल कोर्स की तैयारी के लिए आते हैं।
अगर बड़ी संख्या में संस्थान दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, तो इसका असर छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि, राजस्थान की अर्थव्यवस्था को होने वाले संभावित नुकसान के सटीक आंकड़े के लिए आधिकारिक आर्थिक आकलन जरूरी है।
सरकार से समाधान और बातचीत की मांग
कोचिंग एसोसिएशन ने सरकार और मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। संचालकों का कहना है कि नियमों में व्यावहारिक बदलाव के साथ संस्थागत पट्टे की प्रक्रिया स्पष्ट की जानी चाहिए।
उनकी मांग है कि कार्रवाई से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक हो। साथ ही पुराने संस्थानों के लिए नियमों के अनुपालन की स्पष्ट समयसीमा और प्रक्रिया तय की जाए। अब निगाह सरकार के अगले कदम पर है। क्या नियमों में राहत मिलती है या सीलिंग कार्रवाई जारी रहती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।