अलवर में गणेश चतुर्थी की तैयारियां तेज, बाजारों में सजी गणेश प्रतिमाएं
खबर का सारांश
गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके साथ ही दस दिवसीय गणेश महोत्सव की शुरुआत होगी। अलवर में पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के बाजारों में गणेश प्रतिमाओं की बिक्री शुरू हो चुकी है। होप सर्कस सहित अन्य बाजारों में अलग-अलग आकार और स्वरूप की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 100 से 1,000 रुपए तक बताई गई है। इस बार बड़े आकार की वस्त्रधारी गणेश प्रतिमाएं लोगों को खासा आकर्षित कर रही हैं।
बाजारों में बढ़ी गणेश प्रतिमाओं की मांग
गणेश चतुर्थी की तारीख नजदीक आने के साथ अलवर के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। होप सर्कस सहित कई बाजारों में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं बिक्री के लिए सजाई गई हैं। इनमें छोटे से लेकर बड़े आकार तक की प्रतिमाएं शामिल हैं। घरों में स्थापना के लिए छोटी प्रतिमाओं की मांग है। वहीं, गणेश मंडलों और पांडालों के लिए बड़ी प्रतिमाएं खरीदी जा रही हैं। मूर्ति विक्रेता सोनू के अनुसार, प्रतिमाएं गुजरात और अन्य शहरों से मंगवाई गई हैं।
100 से 1,000 रुपए तक प्रतिमाओं की कीमत
बाजार में उपलब्ध गणेश प्रतिमाओं की कीमत उनके आकार और स्वरूप के अनुसार अलग-अलग है। मूर्ति विक्रेता के मुताबिक, प्रतिमाएं 100 रुपए से शुरू होकर करीब 1,000 रुपए तक उपलब्ध हैं। इस बार बड़े आकार की प्रतिमाओं को भी लोग पसंद कर रहे हैं। खासतौर पर वस्त्र धारण किए हुए गणेश जी की प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पर्व करीब आने के साथ खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
14 सितंबर को होगा गणेश पूजन
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इसी दिन घरों और पांडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी को शुभ अवसर माना जाता है। इसी कारण कई लोग इस दिन शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी करते हैं।
सुबह 11:09 से दोपहर 1:36 बजे तक पूजन का समय
पं. तपेश अवस्थी के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी सोमवार को मध्याह्न काल में होने के कारण इसी दिन गणेश चौथ मनाई जाएगी। बंशीधर पंचांग के अनुसार गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय सुबह 11:09 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक रहेगा। इसमें दोपहर 1:21 बजे तक वृश्चिक लग्न को विशेष रूप से श्रेष्ठ बताया गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग भी बन रहे हैं।
चंद्र दर्शन नहीं करने की मान्यता
गणेश चतुर्थी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में चंद्र दर्शन का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। श्रद्धालु परंपरा के अनुसार गणेश पूजन करते हैं। वहीं, अलग-अलग क्षेत्रों में गणेश स्थापना और पूजा की अपनी स्थानीय परंपराएं भी हैं। अलवर में भी घरों और गणेश मंडलों में पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन
दस दिवसीय गणेश महोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। हालांकि, घरों और गणेश मंडलों में परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन बाद भी विसर्जन किया जाता है। वहीं, कई स्थानों पर दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर ही गणपति विसर्जन की परंपरा है।