Jaipur Nagar Nigam Election: जयपुर के वो 6 चर्चित वार्ड, जहां दांव पर नेताओं की साख
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए शुक्रवार को मतदान होगा। इस चुनाव में 723 प्रत्याशी मैदान में हैं और 24.33 लाख से अधिक मतदाता अपने वार्ड का पार्षद चुनेंगे। लेकिन शहर के कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां मुकाबला सिर्फ पार्षद की जीत-हार तक सीमित नहीं है। इन सीटों पर पूर्व मेयर, पूर्व डिप्टी मेयर, नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के पूर्व शहर अध्यक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। टिकट वितरण से उपजा असंतोष, व्यक्तिगत जनसंपर्क और संगठन की पकड़ भी इन वार्डों में परिणाम को प्रभावित कर सकती है। मतदान से पहले नजर डालते हैं जयपुर के छह चर्चित वार्डों पर।
वार्ड 110: पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा: ज्योति खंडेलवाल
कांग्रेस: सुनीता मेठी
अन्य: बीना मेठी, सोना जैन
मतदाता: 12,165
वार्ड 110 में भाजपा ने पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को मैदान में उतारा है। उनके सामने कांग्रेस की सुनीता मेठी हैं। इसके अलावा बीना मेठी और सोना जैन भी चुनावी मुकाबले में हैं। ज्योति खंडेलवाल के लिए यह चुनाव सिर्फ एक वार्ड की लड़ाई नहीं है। उनकी जीत या हार आगे की राजनीतिक भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किसका असर: ज्योति खंडेलवाल का स्थानीय नेटवर्क उनकी बड़ी ताकत है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी के पति के पूर्व पार्षद रहने का स्थानीय प्रभाव भी मुकाबले को रोचक बनाता है।
वार्ड 112: सुनील कोठारी के सामने कांग्रेस की चुनौती
भाजपा: सुनील कोठारी
कांग्रेस: आशीष शर्मा
अन्य: मोहम्मद तौहीद, रमेश (आप)
मतदाता: 12,288
वार्ड 112 में भाजपा ने पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष रह चुके सुनील कोठारी को चुनाव मैदान में उतारा है। उनके सामने कांग्रेस के आशीष शर्मा हैं। वहीं आम आदमी पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशी भी मुकाबले में हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के साथ तीसरे कोण की भूमिका भी अहम हो सकती है।
किसका असर: आप और निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलने वाले वोट चुनाव का गणित बदल सकते हैं। कुछ सौ वोट भी जीत-हार के अंतर को प्रभावित कर सकते हैं।
वार्ड 76: टिकट विवाद के बाद पुनीत कर्णावट की परीक्षा
भाजपा: पुनीत कर्णावट
कांग्रेस: प्रदीप जैन
अन्य: प्रभुदयाल
मतदाता: 13,729
वार्ड 76 भाजपा के टिकट विवाद के कारण चर्चा में रहा है। पार्टी की सूची में निवर्तमान उप महापौर पुनीत कर्णावट का नाम सामने आया था। इसके बाद विधायक कालीचरण सराफ की ओर से कुलदीप मिश्रा को सिंबल दिए जाने को लेकर विवाद हुआ। बाद में सराफ ने इसे गफलत बताते हुए सफाई दी। अंततः पुनीत कर्णावट मैदान में हैं।
कांग्रेस ने यहां राजस्थान जैन युवा महासभा के अध्यक्ष प्रदीप जैन को प्रत्याशी बनाया है। इससे मुकाबले में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
किसका असर: पुनीत कर्णावट की व्यक्तिगत पकड़ और डिप्टी मेयर के तौर पर पहचान उनकी ताकत है। लेकिन टिकट विवाद के बाद संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता उनके लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगी।
वार्ड 135: बहुकोणीय मुकाबले में हर वोट अहम
भाजपा: विमल अग्रवाल
कांग्रेस: रविकुमार शर्मा
आप: अमित कुमार शर्मा
अन्य: चिमनलाल सैनी, अख्तर हुसैन
मतदाता: 17,823
वार्ड 135 में भाजपा के विमल अग्रवाल और कांग्रेस के रविकुमार शर्मा के साथ आम आदमी पार्टी के अमित कुमार शर्मा मैदान में हैं। इसके अलावा दो निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। कुल छह उम्मीदवारों की मौजूदगी से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।
विमल अग्रवाल को दोबारा टिकट दिए जाने को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष की चर्चा भी सामने आई है। ऐसे में अधिकृत संगठन के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ की भी परीक्षा होगी।
किसका असर: यहां वोटों का बंटवारा परिणाम पर सीधा असर डाल सकता है। आप और निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन भाजपा-कांग्रेस के बीच जीत का अंतर तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
वार्ड 43: शैलेंद्र भार्गव और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर
भाजपा: शैलेंद्र भार्गव
कांग्रेस: आशीष शर्मा
मतदाता: 13,624
वार्ड 43 में भाजपा के शैलेंद्र भार्गव और कांग्रेस के आशीष शर्मा आमने-सामने हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यहां मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों प्रत्याशियों के बीच है। ऐसे में किसी तीसरे मजबूत उम्मीदवार की गैरमौजूदगी में दोनों दलों के बूथ प्रबंधन और मतदाताओं से अंतिम समय तक संपर्क की भूमिका बढ़ जाती है।
किसका असर: यह सीट भाजपा के संगठनात्मक नेटवर्क और कांग्रेस के स्थानीय प्रत्याशी के जनसंपर्क के बीच मुकाबले के तौर पर देखी जा रही है।
वार्ड 53: राजीव चौधरी की प्रतिष्ठा का सीधा मुकाबला
भाजपा: सतीश कुमार शर्मा
कांग्रेस: राजीव चौधरी
मतदाता: 14,169
वार्ड 53 में कांग्रेस के निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष राजीव चौधरी और भाजपा के सतीश कुमार शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है। यहां केवल दो प्रत्याशी मैदान में हैं। इसलिए वोटों के बंटवारे की स्थिति कम है और दोनों दलों के लिए हर वोट महत्वपूर्ण होगा।
वार्ड में प्रताप नगर के हाउसिंग बोर्ड सेक्टर, जेडीए सोसाइटी कॉलोनियां और आसपास की ढाणियां शामिल हैं। अलग-अलग इलाकों के मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी चुनावी नतीजे पर असर डाल सकती हैं।
किसका असर: राजीव चौधरी के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा प्रत्याशी संगठन के समर्थन के साथ मुकाबले में हैं।
इन छह वार्डों पर क्यों है खास नजर?
जयपुर नगर निगम चुनाव में इन छह वार्डों की अहमियत अलग-अलग कारणों से है। कहीं पूर्व मेयर की प्रतिष्ठा दांव पर है तो कहीं पूर्व उप महापौर की। कुछ सीटों पर पूर्व भाजपा पदाधिकारियों की साख जुड़ी है, जबकि एक वार्ड में नेता प्रतिपक्ष सीधे चुनावी मैदान में हैं।
इसके अलावा टिकट वितरण के बाद उपजा असंतोष, निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी और व्यक्तिगत जनसंपर्क जैसे फैक्टर भी चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। मतदान के बाद इन सीटों के परिणाम यह संकेत देंगे कि जयपुर में संगठन की ताकत ज्यादा प्रभावी रही या स्थानीय चेहरे और व्यक्तिगत नेटवर्क भारी पड़े।