राजस्थान निकाय चुनाव: कोटा में मतदान बहिष्कार का ऐलान, सड़क-पानी और नाली की समस्याओं से नाराज वार्डवासी
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के बीच कोटा नगर निगम दक्षिण के वार्ड नंबर 3 में स्थानीय लोगों ने मतदान के बहिष्कार का ऐलान किया है। चुनाव से महज दो दिन पहले रोजड़ी क्षेत्र के लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इलाके में लंबे समय से सड़क, नाली और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। वार्डवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि और प्रत्याशी वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव के बाद क्षेत्र की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।
चुनाव से पहले वार्डवासियों ने किया मतदान बहिष्कार का ऐलान
कोटा नगर निगम दक्षिण के वार्ड नंबर 3 में मतदान से ठीक पहले स्थानीय लोगों के बहिष्कार के ऐलान ने चुनावी माहौल में हलचल बढ़ा दी है। रोजड़ी क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से वे बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
वार्डवासियों के मुताबिक, कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने समस्याएं रखी गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसी नाराजगी के चलते लोगों ने इस बार मतदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।
सड़कें बदहाल, आवागमन में परेशानी का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वार्ड की कई सड़कें खराब स्थिति में हैं। बारिश के दौरान हालात और मुश्किल हो जाते हैं। सड़क पर कीचड़ और जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों का आरोप है कि सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसे लेकर प्रभावी और स्थायी काम नहीं हुआ।
नालियों की व्यवस्था भी बनी परेशानी
वार्डवासियों ने नालियों की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बारिश के समय पानी जमा हो जाता है।
जलभराव और गंदगी की समस्या से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि नालियों की नियमित सफाई और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था की जरूरत है।
पेयजल समस्या से भी परेशान हैं लोग
रोजड़ी क्षेत्र के लोगों ने पेयजल की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बताया है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, क्षेत्र में पानी से जुड़ी परेशानी लंबे समय से बनी हुई है।
वार्डवासियों का कहना है कि सड़क, नाली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों का समाधान उनकी प्राथमिकता है। उनका आरोप है कि बार-बार समस्याएं उठाने के बावजूद स्थायी राहत नहीं मिली।
‘चुनाव के समय आते हैं, बाद में ध्यान नहीं देते’
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी नाराजगी जनप्रतिनिधियों और चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को लेकर है। वार्डवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान प्रत्याशी घर-घर पहुंचकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद क्षेत्र की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
इसी वजह से लोगों ने मतदान बहिष्कार का फैसला लिया है। हालांकि, यह स्थानीय निवासियों की ओर से किया गया ऐलान है और मतदान के दिन कितने लोग वास्तव में इससे दूर रहते हैं, यह बाद में स्पष्ट होगा।
प्रत्याशियों और प्रशासन के सामने चुनौती
मतदान बहिष्कार के ऐलान के बाद अब चुनाव मैदान में मौजूद प्रत्याशियों के सामने वार्डवासियों की नाराजगी दूर करने की चुनौती है। प्रशासन के लिए भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतदान के दिन वार्ड में कितनी भागीदारी होती है।
फिलहाल रोजड़ी क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सड़क, नाली और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे मतदान से दूरी बनाए रखेंगे।
विकास के मुद्दे पर चुनावी बहिष्कार कितना असरदार?
वार्ड नंबर 3 में मतदान बहिष्कार का ऐलान स्थानीय मुद्दों को चुनाव के केंद्र में ले आया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान महत्वपूर्ण है, वहीं स्थानीय लोगों की समस्याओं को सामने रखना भी चुनावी व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन और प्रत्याशी वार्डवासियों से संवाद कर उनकी नाराजगी दूर कर पाते हैं या नहीं और मतदान के दिन इसका चुनाव पर कितना असर दिखाई देता है।