जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट: सरवर और शाहबाज को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, जेल में ही रहेंगे
2008 के जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद सरवर आजमी उर्फ ढिल्ला पप्पू और शाहबाज अहमद को राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने दोनों की रिहाई और जमानत से जुड़ी याचिकाएं खारिज करते हुए मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और जन-सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना। यह मामला जयपुर के चांदपोल बाजार में मिले उस जिंदा बम से जुड़ा है, जिसे समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना वी. वराले की पीठ ने दोनों आरोपियों की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें उनकी सजा के निलंबन और रिहाई से राहत नहीं दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सामान्य जमानत प्रकरण की तरह नहीं माना। अदालत के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े पहलू भी महत्वपूर्ण रहे।
चांदपोल में मिला था नौवां जिंदा बम
13 मई 2008 को जयपुर में सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे शहर को दहला दिया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार नौ स्थानों पर बम लगाए गए थे, जिनमें से आठ में विस्फोट हुआ, जबकि चांदपोल इलाके में रखा एक बम फटने से पहले बरामद कर लिया गया।
धमाकों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। जिंदा बम को समय रहते निष्क्रिय किए जाने से संभावित रूप से एक और बड़ा हादसा टल गया।
भीड़भाड़ वाले इलाके में रखा गया था बम
चांदपोल में मिला बम सीतारामजी मंदिर के सामने भीड़भाड़ वाले इलाके में रखा गया था। बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर उसे निष्क्रिय किया था।
इस घटना को उस समय एक बड़े खतरे के रूप में देखा गया था, क्योंकि अगर बम में विस्फोट हो जाता तो भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका थी।
आरोपियों की ओर से क्या दलील दी गई?
सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि इसी घटनाक्रम से जुड़े अन्य आठ मामलों में राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों को बरी किया था। बचाव पक्ष का तर्क था कि सभी बम एक ही आपराधिक साजिश का हिस्सा बताए गए थे, इसलिए आठ मामलों में बरी होने का लाभ इस मामले में भी मिलना चाहिए।
बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया। अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपी लंबे समय से जेल में रह चुके हैं और 15 वर्ष से अधिक समय हिरासत में बिता चुके हैं।
राज्य सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने आरोपियों की रिहाई का विरोध किया।
सरकार की ओर से कहा गया कि चांदपोल में मिले जिंदा बम का मामला अन्य आठ मामलों से अलग है और इसमें अलग साक्ष्य मौजूद हैं। अभियोजन पक्ष ने एक दुकानदार की पहचान का भी हवाला दिया, जिसने कथित तौर पर उस व्यक्ति की पहचान की थी जिसने बम ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई साइकिल खरीदी थी।
राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि अन्य मामलों में हाईकोर्ट के बरी करने के आदेशों के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसलिए उन फैसलों को मौजूदा मामले में आरोपियों की रिहाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।
2025 में विशेष अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
जिंदा बम बरामद होने से जुड़े मामले में विशेष अदालत ने अप्रैल 2025 में मोहम्मद सरवर आजमी, शाहबाज अहमद और अन्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसके बाद दोनों ने सजा के निलंबन और रिहाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब शीर्ष अदालत ने भी रिहाई की मांग स्वीकार नहीं की है।
2008 से 2026 तक ऐसे आगे बढ़ा मामला
13 मई 2008: जयपुर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए। आठ स्थानों पर विस्फोट हुए और अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
20 सितंबर 2019: विशेष अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।
29 मार्च 2023: राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच को त्रुटिपूर्ण और अधूरा बताते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
24 जुलाई 2023: जिंदा बम मामले में एटीएस ने पूरक आरोप पत्र दाखिल किया।
8 अप्रैल 2025: विशेष अदालत ने जिंदा बम बरामदगी के मामले में चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
1 मई 2026: राजस्थान हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा स्थगित करने से इनकार कर दिया।
अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद सरवर और शाहबाज अहमद को रिहाई/जमानत के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया।
पीड़ितों के लिए लंबे इंतजार के बाद आया फैसला
जयपुर सीरियल ब्लास्ट को करीब 18 साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग स्तरों पर जारी रही है। धमाकों में जान गंवाने वाले और घायल हुए लोगों के परिवारों के लिए यह मामला आज भी बेहद संवेदनशील है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद चांदपोल में मिले जिंदा बम से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सरवर और शाहबाज फिलहाल जेल में ही रहेंगे। आगे की कानूनी प्रक्रिया और लंबित मामलों में आने वाले फैसलों से इस पूरे प्रकरण की तस्वीर और स्पष्ट होगी।