सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी का हमला, बोले- मलबे में दब रहे सपने और अरमान
इंट्रो:
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हादसों को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई नहीं होती और घटना के बाद कुछ अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालकर मामला खत्म कर दिया जाता है। उन्होंने दिल्ली में बीजेपी की सरकारों को ‘ट्रिपल इंजन’ बताते हुए पूछा कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने में सरकार लाचार क्यों है। राहुल गांधी ने दिल्ली में हाल के अन्य हादसों का भी जिक्र किया और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
सत्य निकेतन हादसे को लेकर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इमारत गिरने की घटना नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोगों की जिंदगी, भविष्य और परिवार प्रभावित होते हैं। राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर हादसों के बाद कार्रवाई करने और पहले से रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि घटनाओं के बाद छोटे स्तर के अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
‘हर बार मलबे में दबते हैं सपने और अरमान’
राहुल गांधी ने दिल्ली में पिछले कुछ महीनों में हुई अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सैदुलाजाब और हौज रानी में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार लोगों की जान जा रही है और परिवारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनके मुताबिक हादसे के बाद कुछ समय तक राजनीतिक बयानबाजी होती है, लेकिन स्थायी समाधान और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया दिखाई नहीं देती। राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में कहा कि हर बार जिंदगियां, सपने और अरमान मलबे में दब जाते हैं।
‘जवाबदेही मांगने पर लोगों को बदनाम किया जाता है’
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ बयानों का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल पूछने वालों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब लोग जवाबदेही की मांग करते हैं तो उन्हें अलग-अलग तरह के राजनीतिक तमगे दिए जाते हैं। राहुल गांधी के मुताबिक इसका उद्देश्य सवाल उठाने वालों को शर्मिंदा करना और उनकी आवाज दबाना है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय हादसों की रोकथाम और जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए।
‘दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार तो फिर लाचारी क्यों?’
राहुल गांधी ने दिल्ली में बीजेपी की सरकारों के संदर्भ में ‘ट्रिपल इंजन’ का सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब केंद्र, दिल्ली और स्थानीय स्तर पर बीजेपी की सरकार है तो फिर ऐसी घटनाओं को रोकने में सरकार के सामने क्या परेशानी है। राहुल गांधी ने इसे सरकार की नीयत से जोड़ते हुए कहा कि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती। उनके इस बयान के बाद सत्य निकेतन हादसे को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी लिया हादसे का संज्ञान
सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी मामला पहुंचा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली नगर निगम (MCD), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दिल्ली में लगातार सामने आ रही इमारत गिरने, आग लगने और जलभराव जैसी घटनाओं का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई।
दिल्ली में लगातार सामने आती रही हैं हादसों की घटनाएं
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में इमारत गिरने और आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं। रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद समेत कई इलाकों में भवन गिरने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। ऐसी घटनाओं में लोगों की जान जाने के साथ बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। हादसों के बाद भवनों की सुरक्षा, अवैध निर्माण और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
आग की घटनाओं ने भी दिल्ली को झकझोरा
इमारत ढहने के अलावा दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े अग्निकांड भी सामने आए हैं। मुंडका औद्योगिक क्षेत्र, करोल बाग और अनाज मंडी की आग में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं के बाद भी व्यावसायिक और आवासीय इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आग की घटनाओं ने यह मुद्दा भी सामने रखा है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों और बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच कितनी जरूरी है।
ओल्ड राजेंद्र नगर हादसे की भी हुई थी देशभर में चर्चा
दिल्ली में जलभराव से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का विषय रही हैं। जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बारिश का पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद दिल्ली में ड्रेनेज व्यवस्था, बेसमेंट के इस्तेमाल, कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर व्यापक सवाल उठे थे। सत्य निकेतन हादसे के संदर्भ में राहुल गांधी ने भी दिल्ली में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
हादसों की रोकथाम और जवाबदेही पर उठे सवाल
सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर दिल्ली में भवन सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक आरोपों से अलग देखें तो ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए भवनों की नियमित जांच, निर्माण नियमों का पालन, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कार्रवाई होती है।