राजस्थान में जर्जर सरकारी स्कूलों पर सवाल, अजमेर और डीग में गिरी बिल्डिंग; बाल-बाल बचे बच्चे
इंट्रो:
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले 24 घंटे में अजमेर और डीग जिले से स्कूल भवन का हिस्सा गिरने की दो घटनाएं सामने आई हैं। अजमेर में स्कूल की दीवार गिरने से बाहर खड़ी पांच कारें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि डीग के कामा क्षेत्र में प्राथमिक स्कूल की छत और भवन का बड़ा हिस्सा ढह गया। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाएं बच्चों की छुट्टी के बाद हुईं, जिससे किसी छात्र की जान पर नहीं बनी। हालांकि, लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अजमेर में बारिश के बीच स्कूल की दीवार भरभराकर गिरी
अजमेर के डिग्गी बाजार इलाके में स्थित आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दीवार तेज बारिश के दौरान अचानक गिर गई। दीवार का मलबा स्कूल के बाहर खड़ी पांच कारों पर जा गिरा, जिससे वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि ये कारें दरगाह में जियारत के लिए आए श्रद्धालुओं की थीं। गनीमत रही कि हादसे के समय स्कूल में बच्चे मौजूद नहीं थे और कारों के अंदर भी कोई व्यक्ति नहीं बैठा था।
स्कूल प्रबंधन ने पार्किंग को बताया वजह, सुरक्षा पर उठे सवाल
स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. सीमा शर्मा ने स्कूल के बाहर वाहनों की पार्किंग को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि स्कूल के बाहर अवैध रूप से वाहन खड़े कराए जाते हैं। हालांकि, घटना के बाद स्कूल की जर्जर दीवार की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि दीवार पहले से कमजोर थी तो उसकी मरम्मत या सुरक्षा के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए, यह सवाल अब चर्चा में है। सबसे अहम सवाल स्कूल परिसर और आसपास रहने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर है।
डीग के कामा में प्राथमिक स्कूल की छत का हिस्सा ढहा
दूसरी घटना अलवर से सटे डीग जिले के कामा क्षेत्र की बताई जा रही है। रविवार शाम बारिश के दौरान प्राथमिक स्कूल की इमारत का बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। स्कूल की छत पूरी तरह गिर गई, जबकि दीवार और पिलर भी मलबे में तब्दील हो गए। रविवार की छुट्टी होने के कारण उस समय स्कूल में बच्चे मौजूद नहीं थे। इससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद स्कूल भवनों की स्थिति और उनकी सुरक्षा जांच को लेकर सवाल फिर सामने आ गए हैं।
गहलोत और टीकाराम जूली ने सरकार पर साधा निशाना
स्कूल भवन गिरने की घटनाओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर सवाल उठाए और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। लगातार बारिश के दौरान कमजोर भवनों के गिरने की घटनाओं ने विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और मुद्दा दे दिया है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
अजमेर और डीग की घटनाओं के बाद सरकारी स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा जांच को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि जिन स्कूल भवनों की हालत पहले से खराब है, उनकी पहचान कर मरम्मत का काम समय रहते क्यों नहीं किया जाता। खासकर बारिश के मौसम में जर्जर छत, दीवार और पिलर छात्रों और शिक्षकों के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे में स्कूलों की नियमित सुरक्षा ऑडिट और जरूरी मरम्मत की व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी अहम हो जाती है।
निकाय चुनाव के बीच शिक्षा मंत्री पर भी सवाल
इन घटनाओं के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निकाय चुनाव प्रचार में व्यस्त होने को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। खबर के अनुसार मंत्री लंबे समय से कोटा और बारां जिलों में चुनावी गतिविधियों में सक्रिय हैं। ऐसे में विपक्ष और आलोचक यह सवाल उठा रहे हैं कि सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और बच्चों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विभाग का फोकस कितना है। हालांकि, चुनावी व्यस्तता और स्कूल भवनों की घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करना उचित नहीं होगा।
स्कूलों की सुरक्षा को लेकर फिर उठी बड़ी चिंता
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब अजमेर और डीग में सामने आई घटनाओं ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। राहत यह है कि दोनों मामलों में बच्चों को कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन सवाल यही है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय जर्जर भवनों की पहचान और मरम्मत पहले क्यों नहीं की जाती। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे सुरक्षित भवन और बेहतर माहौल में शिक्षा हासिल करें, इसके लिए समय पर कार्रवाई जरूरी है।